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Hindi News ›   Ram Mandir ›   Ayodhya Ram Mandir Inauguration Ramlala Maryada Purushottam Lord Ram is truth, Ram is Eternal

Ayodhya Ram Mandir: मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम ही सत्य हैं, राम ही सनातन हैं

Thu, 28 Dec 2023 08:27 PM IST
अमर शर्मा अंकेश्वर मिश्रा
अंकेश्वर मिश्रा Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 28 Dec 2023 08:27 PM IST
सार

कुछ देश विरोधी, सनातन विरोधी एवं समाज विरोधी ताकतों को जब भगवान राम के समतुल्य कोई भी दूसरा उदाहरण पेश करना असंभव हो गया, तो वे तथाककित धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) बुद्धिजीवी लोगों ने अपनी अल्पबुद्धि अथवा कुबुद्धि का इस्तेमाल करते हुए भगवान राम के अवतरित होने पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया। भगवान राम संसार के किसी भी धर्म के एक मात्र ऐसे अराध्य हैं जिनकी प्रमाणिकता को संसार के किसी भी देश के सर्वोच्च न्यायालय में सिद्ध किया गया एवं स्वीकार किया गया है।

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Ayodhya Ram Mandir Inauguration Ramlala Maryada Purushottam Lord Ram is truth, Ram is Eternal
अंकेश्वर मिश्रा का आलेख - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मन में राम, तन में राम, जीवन में राम, रोम-रोम में राम और भारत के कण-कण में राम। राम एक आदर्श है, राम एक परिकल्पना है, राम एक जीवन है,  राम एक दर्शन है, भगवान राम ही मर्यादा पुरूषोत्तम है। 
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गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान राम के संदर्भ में रामचरित मानस में लिखा है 'जाकी जैसी भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी' अर्थात् भगवान राम के संदर्भ में जिनकी जैसी मान्यताऍं, भावनाऍं, समझ अथवा विवेक रहती है वे भगवान राम को उसी दृष्टिकोण अथवा नजरिये से और वैसे ही देखते हैं। 
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भगवान के 10 अवतारों में से मर्यादा के प्रतिरूप भगवान राम के अवतार जिनके समतुल्य मर्यादित उदाहरण संसार में कहीं भी कोई दूसरा नहीं मिलता है। मर्यादा पुरूषोत्तम राम ने एक पुत्र, पति, भाई, शिष्य या किसी भी रिश्ते के निर्वहन में कहीं से कोई भी कसर नहीं छोड़ी है। 
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कुछ देश विरोधी, सनातन विरोधी एवं समाज विरोधी ताकतों को जब भगवान राम के समतुल्य कोई भी दूसरा उदाहरण पेश करना असंभव हो गया, तो वे तथाककित धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) बुद्धिजीवी लोगों ने अपनी अल्पबुद्धि अथवा कुबुद्धि का इस्तेमाल करते हुए भगवान राम के अवतरित होने पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया। 

परंतु विदेशी एवं विधर्मी फंडिंग से संचालित लोगों ने यह नहीं सोचा कि संसार का पहला महाकाव्य 'रामायण' जो कि भगवान राम पर रचा गया और रचयिता स्वयं भगवान राम के समकालीन हैं, इस कटु सत्य को कैसे झूठलाया जाए? रामसेतु के मौजूदा अस्तित्व को कैसे नकारा जाए? भगवान राम ने जो त्याग, करूणा, दया, राष्ट्रीयत एवं मानवता की मिसाल पेश की उसकी कैसे अनदेखी की जाए? 

भगवान राम संसार के किसी भी धर्म के एक मात्र ऐसे अराध्य हैं जिनकी प्रमाणिकता को संसार के किसी भी देश के सर्वोच्च न्यायालय में सिद्ध किया गया एवं स्वीकार किया गया है। माता सीता की अग्नि परीक्षा तो लंका विजय के पश्चात् ही हो गई थी। परंतु भगवान राम की अग्नि परीक्षा उनके अवतरण के हजारों वर्ष पश्चात् 21वीं शताब्दी में धर्म, दर्शन, ज्ञान, विज्ञान, तकनीक एवं कानून के सारे मानकों एवं कसौटियों के आधार पर सरेआम देश के सर्वोच्च अदालत में की गई, एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न भगवान राम के सिर्फ अवतरित होने की पुष्टि की गई बल्कि उनके अवतरित होने के समय, स्थान इत्यादि संपूर्ण संबंधित तथ्यों की सत्यता एवं प्रमाणिकता को भी स्वीकार किया गया। 

सनातन विरोधी ताकतों द्वारा भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न उठाने वाले एवं उन्हें काल्पनिक सिद्ध करने के लिए जुटाए गए तमाम मनगंढ़त आरोपों एवं तथ्यों के बावजूद भी जब देश के सर्वोच्च न्यायलय द्वारा भगवान राम के अयोध्या में अवतरित होने के प्रमाण पर मुहर लगा दिया गया तो तथाकथित धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों के पेट का दर्द सर तक आना लाजमी है। भगवान राम ने जीवन के हर किरदार को पूरी शिद्दत से जिया है तथा संसार के सामने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिशाल पेश की है। 

कहा गया कि राम कौन है? तो जिनका राजाभिषेक होने जा रहा था वो पिता के वचन का मान रखने के लिए न केवल राज्य त्याग देता है वरन 14 वर्ष के लिए वनवासी जीवन जीने के लिए निकलते हुए रत्ती भर भी जिनके चेहरे पर शिकन का भाव नहीं दिखाई देता है वही भगवान राम है। 

चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के पुत्र एवं मिथीला नरेश जनक के जामाता होते हुए भी अपने सबसे कठिन दौर में, जबकि पत्नी का अपहरण हो गया हो तथा अपने पास कोई भी साधन, सैनिक अथवा सेना न हो, फिर भी किसी भी राजा-महाराजा से मदद नहीं लेकर तथा केवल अपने बूते से जंगल के बंदर, भालू को साथ लेकर प्रतापी और शक्तिशाली रावण से युद्ध करने और उसे जीत लेने वाला भगवान राम है। 

रावण के लंका जैसे संपन्न राज्य को जीतने के पश्चात् भी जो यह कहने का साहस रखता है कि "अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" अर्थात् यद्यपि यह लंका संपन्नता से भरी हुई है फिर भी मुझे अच्छी नहीं लग रही है क्योंकि मॉं एवं मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है। और यहाँ पर न तो हमारी माँ है और न ही यह लंका हमारी मातृभूमि है। इसलिए हम यहां नहीं रह सकते हम तो अपने मातृभूमि पर ही रहेंगे ऐसा कहने वाला भगवान राम है। 

भगवान राम के बारे में चंद लाइनें लिखकर उन्हें व्याख्यायित नहीं किया जा सकता। क्योंकि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान राम के संदर्भ में स्पष्ट शब्दों में लिख दिया है "हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता" अर्थात भगवान राम अनंत हैं और उनकी कथा भी अनंत है। सज्जन व्यक्ति अपने-अपने अनुसार उनकी व्याख्या करने की कोशिश अथवा केवल प्रयत्न कर सकते हैं। 

आज अयोध्या में भगवान राम का सुंदर मंदिर स्थापित होने जा रहा है। इसके लिए पिछले पांच सौ वर्षो से संघर्ष चल रहा था। 

विधर्मियों का देश में शासन स्थापित होने के पश्चात् 1528 ई0 में भगवान राम के मंदिर के कुछ ऊपरी हिस्से को गुंबद में रूपांतरित करके मस्जिद का रूप दे दिया गया था। जिस प्रकार से भगवान राम का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था वैसे ही उनके जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का कार्य भी काफी संघर्षमय रहा। पर जैसा कि गोस्वामी जी ने रामचरित मानस में लिखा है, "जब जब होई धरम की हानि, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी, तब-तब प्रभु धरि विविध सरीरा, हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा" अर्थात जब-जब इस धरती पर धर्म की हानि होगी, असुरों और अधर्मियों का अन्याय धरती पर बढ़ जाएगा। तब-तब प्रभु अलग अलग रूपों में अवतार लेकर धरती पर आएंगे, और सज्जनों और साधु संतों को उन अधर्मियों के अन्याय से मुक्ति दिलाएंगे। 

इसी को साकार करते हुए भगवान राम देश के जनता के रूप में, मंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में, वकील एवं न्यायाधीश  के रूप में, राम मंदिर के लिए कार्यरत भक्तों के प्रेरणास्रोत बनकर राममंदिर के लिए अधीर हो चुके लोगों में आशा एवं विश्वास को सृजित किया। हम परम सौभाग्यशाली एवं गौरवशाली हैं कि भव्य राम मंदिर निर्माण के इस पुनीत कार्य को संपन्न होते हुए एवं "सत्यमेव जयते" को सार्थक होते हुए अपनी आँखों से देख रहे हैं। 


निश्चय ही राम आशा है, राम विश्वास है राम सपना है और राम ही संकल्पना है। भारत एवं आसपास के देशों में शायद ही कोई शिक्षित एवं समझदार व्यक्ति हो जिसे राम से संबंधित कोई दोहा अथवा चौपाई का ज्ञान न हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि राम ही सत्य है, राम ही सनातन है राम ही आदि है और राम ही अनंत है। जय श्री राम। 

- अंकेश्वर मिश्रा
(संयुक्त निदेशक, भारत सरकार)
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