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Ayodhya Ground Report: दुनिया से अलग सोचते हैं अयोध्या के बच्चे, उनकी नजर में कुछ ऐसे हैं भगवान श्रीराम
सार
Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के छोटे- छोटे बच्चों की सोच और विचार अलग हैं। हनुमानगढ़ी से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर एक स्कूल के बच्चों से बात की गई। आइए जानते हैं बच्चों ने क्या कहा।
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अयोध्याके बच्चों के अपने-अपने राम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अयोध्या की गलियों में राम को खोजें तो कई बार आसानी से मिल जाते हैं और कई बार काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इस बार में राम के स्वरूप में विराजमाने होने वाले अयोध्या के छोटे- छोटे राम की खोज में निकला था। मन में विचार अयोध्या के बच्चे इस समय कहां होंगे और उनके मन में क्या विचार होंगे।
मैं निकल पड़ा एक बार फिर अयोध्या की गलियों में एक स्कूल की खोज में जहां बहुत सारे बच्चे मुझे मिल जाएं। हनुमानगढ़ी से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर एक स्कूल मिला, जिसका नाम था महाराजा पब्लिक स्कूल। स्कूल के प्राचार्य अजीत कुमार द्विवेदी से मिलने का अनुरोध किया।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन क्लास चल रही हैं, सर्दी के कारण बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा है। मैंने अपना उद्देश्य उन्हें बताया कि मैं बच्चों से भगवान को लेकर उनकी भावनाओं के बारे में जानना चाहता हूं। उन्होंने मुझे कुछ बच्चों का नंबर दिया लेकिन उनके संपर्क न हो सका। एक बच्चे अंश पांडेय से संपर्क हुआ और उसने हमसे कुछ दोस्तों के साथ मिलने के आग्रह को स्वीकार कर लिया।
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मैं न्यू कॉलोनी प्रमोदवन की ओर चल पड़ा। अयोध्या की गलियों से होते हुए आखिरकार मैं अंश पांडेय (कक्षा पांचवी का छात्र) के घर पहुंच गया। मेरा सौभाग्य ये रहा कि अंश पांडेय के साथ-साथ उसकी छोटी बहन आरोही पांडेय से भी वहीं मिल गई। कुछ ही समय में अंश ने अपने जिन छोटे-छोटे मित्रों को बुलाया था वो भी आ गए। अब इस समय के सबसे अहम शब्द 'राम' पर चर्चा शुरू हुई।
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मैं निकल पड़ा एक बार फिर अयोध्या की गलियों में एक स्कूल की खोज में जहां बहुत सारे बच्चे मुझे मिल जाएं। हनुमानगढ़ी से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर एक स्कूल मिला, जिसका नाम था महाराजा पब्लिक स्कूल। स्कूल के प्राचार्य अजीत कुमार द्विवेदी से मिलने का अनुरोध किया।
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उन्होंने बताया कि ऑनलाइन क्लास चल रही हैं, सर्दी के कारण बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा है। मैंने अपना उद्देश्य उन्हें बताया कि मैं बच्चों से भगवान को लेकर उनकी भावनाओं के बारे में जानना चाहता हूं। उन्होंने मुझे कुछ बच्चों का नंबर दिया लेकिन उनके संपर्क न हो सका। एक बच्चे अंश पांडेय से संपर्क हुआ और उसने हमसे कुछ दोस्तों के साथ मिलने के आग्रह को स्वीकार कर लिया।
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मैं न्यू कॉलोनी प्रमोदवन की ओर चल पड़ा। अयोध्या की गलियों से होते हुए आखिरकार मैं अंश पांडेय (कक्षा पांचवी का छात्र) के घर पहुंच गया। मेरा सौभाग्य ये रहा कि अंश पांडेय के साथ-साथ उसकी छोटी बहन आरोही पांडेय से भी वहीं मिल गई। कुछ ही समय में अंश ने अपने जिन छोटे-छोटे मित्रों को बुलाया था वो भी आ गए। अब इस समय के सबसे अहम शब्द 'राम' पर चर्चा शुरू हुई।
छोटी बहन आरोही के साथ अंश पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले अंश के बारे में राम के बारे में पूछने पर वो कहते हैं कि जब भी राम का जिक्र आता है तो उनके जहन में रामजन्म भूमि का द्वारा आता है। मैं उनसे पूछता हूं, आपने इसे देखा है, वो कहते हैं हां। इसके बाद उनके जहन में सीता राम के तस्वीर सामने आ जाती है और टीवी पर जो सीरियल देखे हैं उनकी पिक्चर दिमाग में घूमने लगती है। पर अभी का जो माहौल है उससे वो काफी खुश है। उन्हें अयोध्या की सड़के पसंद है और एक बात उन्होंने विशेष रूप से कही कि लोगों ने यहां वहां धूकना कम कर दिया है जो उन्हें सही लगता हैं।
आरोही
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद मैं आरोही(कक्षा दो की छात्रा) से बात करता हूं कि आप जानते हैं भगवान राम कौन है? वो मेरी तरफ देखती है और कहती है, वही जिन्होंने वनवास लिया था। मैंने कहां आप जानते हैं कि उन्होंने वनवास क्यों लिया था? वो कहती है नहीं। लेकिन बातों में पता चला कि उसे हनुमान चालीसा पूरी याद है और एक बार कहने पर उसने सुना भी दी।
छात्र अभिजीत पाठक
- फोटो : अमर उजाला
अगली बात हुई छात्र अभिजीत पाठक (कक्षा पांचवी का छात्र) से जो अयोध्या की तुलसीवारी रामघाट में रहते हैं। राम के बारे में कहते हैं, राम वही है जिनकी उनके पापा पूजा करते हैं। मैंने कहां कभी आपने पापा से पूछा नहीं कि आप ये किसकी पूजा और क्यों करते हैं तो, कहते हैं नहीं। राम भगवान है बस इसलिए उनकी पूजा होती है।
छात्र सुधांशु मिश्र
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद बात होती है छात्र सुधांशु मिश्र से वो बताते हैं क उन्होंने राम के बारे में सुना है। उन्हें यह जानकारी है कि राम मंदिर के विरोध में मस्जिद तोड़ी गई थी। वो जिस किराये के मकान में रहते हैं उनके मकान मालिक के पास एक ईंट है जो उस समय से संबंधित है। उन्हें अयोध्या में हो रहे बदलाव पसंद हैं। गंदगी में कमी को वो पसंद करते हैं।
अगली बारी थी छात्र प्रभु दुबे की उन्होंने मुझे ज्यादा कुछ बताना उचित नहीं समझा। बस इतना बोले की अयोध्या पर राम जी की कृपा है। सही हैं बच्चों के अपने राम, सब के अपने अपने राम!!!
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