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राम मंदिर का शिल्पकार सोमपुरा परिवार: 34 साल पहले कदमों से मापा था गर्भगृह, पेंसिल स्केच से शुरू किया काम

Tue, 09 Jan 2024 06:57 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 09 Jan 2024 06:57 PM IST
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सार
Ayodhya Ram Mandir Architecture: अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के लिए डिजाइन गुजरात से आने वाले चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया है। सोमपुरा कहते हैं कि वो वास्तुकला के किसी भी औपचारिक स्कूल में नहीं गए। उन्होंने इसे अपने दादा और पिता और शास्त्रों से सीखा है। 
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Ayodhya Ram Mandir Architecture Sompura Family Story Ram Temple Pencil Sketch
सोमपुरा परिवार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अयोध्या नगरी अपने आराध्य के आगमन की प्रतीक्षा में है। 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा से नगरी में उमंग और उत्सव का माहौल है। चौराहों-दीवारों को मनोभावन बनाने के लिए इन पर देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी जा रही हैं। मंदिर बनाते समय इसकी वास्तुकला से लेकर सुरक्षा जैसे सभी अहम पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया है। मंदिर का डिजाइन सोमपुरा परिवार ने तैयार किया है, जिसकी पीढ़ियां ऐसे कामों के लिए भारत समेत दुनियाभर में मशहूर हैं। आइये जानते हैं सोमपुरा परिवार के बारे में...

चंद्रकांत सोमपुरा
चंद्रकांत सोमपुरा - फोटो : Social Media

सोमपुरा परिवार कौन है?
5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी गई थी। भूमि-पूजन के साथ ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर के पहले चरण का आधिकारिक तौर पर निर्माण शुरू हुआ। 18,000 करोड़ रुपये में बनने वाले राम मंदिर के लिए डिजाइन गुजरात से आने वाले सोमपुरा परिवार ने तैयार किया। इस परिवार का ताल्लुक भावनगर के पलिताना शहर से है। परिवार के 77 वर्षीय सदस्य चंद्रकांत सोमपुरा ने डिजाइन के काम को अंजाम दिया है। 

परिवार के लिए सोमनाथ मंदिर उनके दिल के सबसे करीब है। सोमपुरा परिवार का मानना है कि उनके पूर्वजों को मंदिर निर्माण की कला स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने सिखाई थी। सोमपुरा खुद को 'चंद्रमा के निवासी' मानते हैं।

सोमपुरा कहते हैं कि वो वास्तुकला के किसी भी औपचारिक स्कूल में नहीं गए। उन्होंने इसे अपने दादा और पिता और शास्त्रों से सीखा है। हालांकि, उनके बेटे और अन्य जो मंदिर परियोजना में शामिल हुए वो प्रशिक्षित इंजीनियर या वास्तुकार हैं।

सोमनाथ मंदिर
सोमनाथ मंदिर - फोटो : Social media

राम मंदिर ही नहीं 200 से अधिक मंदिर की डिजाइन तैयार कर चुका सोमपुरा परिवार 
अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का डिजाइन जिसने तैयार किया है, उन्हें इस काम में महारत हासिल है। अपने इस काम के बूते उन्होंने न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी खूब नाम कमाया है। सोमपुरा परिवार के डिजाइन बनाने की एक और खास बात है। यह नागर शैली के मंदिरों की डिजाइन वास्तुकला के हिसाब से बनाते हैं। गुजरात के इस सोमपुरा परिवार ने अयोध्या से पहले भी कई बड़े मंदिरों के डिजाइन तैयार किए हैं। इनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर, अक्षरधाम और अंबाजी मंदिर शामिल है। इसके अलावा लंदन के स्वामीनारयाण मंदिर का डिजाइन भी इसी परिवार देन है। इनकी 15 पीढ़ियां अब तक देश विदेश में 200 से अधिक मंदिर की डिजाइन तैयार कर चुकी हैं।  

दुर्घटना में परिवार ने खोया अपना सदस्य 
चंद्रकांत के पिता प्रभाशंकर ने 1951 में गुजरात में सोमनाथ मंदिर का डिजाइन तैयार किया था। प्रभाशंकर को बाद में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। प्रभाशंकर ने 51 वर्षीय बेटे बलवंतराय को एक दुर्घटना में खो दिया, जब वह बद्रीनाथ मंदिर के नवीकरण परियोजना से लौट रहे थे। चंद्रकांत के बेटे आशीष को राम मंदिर परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मिली थी। आशीष की परियोजनाओं में मुंबई के एंटिला में अंबानी के घर में निजी मंदिर भी शामिल है। 

चंद्रकांत सोमपुरा
चंद्रकांत सोमपुरा - फोटो : Social media

34 साल पहले पेंसिल स्केच से शुरू किया था मंदिर का काम
सोमपुरा परिवार करीब 34 साल पहले ही राम जन्मभूमि से जुड़ गया था, जिसके पीछे एक दिलचस्प वाकया है। दरअसल, उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला ने चंद्रकांत सोमपुरा से पूछा था कि क्या वह राम मंदिर परियोजना को अपनाएंगे और जब उन्होंने सहमति दी तो उन्हें विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल से मिलवाया। सोमपुरा ने तब कई बिड़ला मंदिरों पर काम किया था।

चंद्रकांत सोमपुरा ने अयोध्या में अशोक सिंघल से मुलाकात के बाद ही राम मंदिर पर काम शुरू किया। उस समय जब सोमपुरा पहली बार राम जन्मभूमि स्थान पर गर्भगृह के अंदर गए और उसे अपने कदमों से मापा, क्योंकि उन्हें कोई भी उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं थी। उस समय सोमपुरा पेंसिल ड्राइंग बनाते थे और ट्रेसिंग पेपर पर स्याही विशेषज्ञ बनाते थे। इस काम में चंद्रकांत के बेटे आशीष 1993 के आसपास अपने पिता के साथ जुड़ गए।

सोमपुरा ने मंदिर के लिए दो-तीन योजनाएं तैयार कीं, जिनमें से एक को मंजूरी मिली। उन्होंने एक लकड़ी का मॉडल बनाया गया और उसके बाद कुंभ मेले में मॉडल को जुटे साधुओं के सामने रखा गया, जिन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी। 

चंद्रकांत सोमपुरा
चंद्रकांत सोमपुरा - फोटो : Amar Ujala

मुकदमेबाजी के कारण पैसा कम पड़ा और काम धीमा हो गया
1992 से 1996 के बीच अयोध्या की कार्यशाला में मंदिर का काम जोरों से चला और मंदिर के घटकों को तैयार किया गया, लेकिन फिर विहिप के पास धन की कमी हो गई, वह मुकदमेबाजी में लग गया और काम धीमा हो गया। सोमपुरा याद करते हैं कि उस समय, साइट पर केवल 8-10 कारीगर होते थे। फिर नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर निर्माण के लिए पूरी जमीन दिए जाने के बाद परिवार ने डिजाइन तैयार की। सोमपुरा के बेटे निखिल और आशीष ने परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभाली और निखिल के सिविल इंजीनियर बेटे आशुतोष भी मंदिर वास्तुकला में दो साल के प्रशिक्षण के बाद उनके साथ जुड़ गए।

चंद्रकांत सोमपुरा
चंद्रकांत सोमपुरा - फोटो : Amar Ujala

जब मंदिर बना देखा तो शिल्पकार के आंसू भर आए
अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम जारी होने के बाद राम मंदिर के शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा अयोध्या पहुंचे। जब उन्होंने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई तो मंदिर निर्माण देखकर भावुक भी हो उठे। जैसे ही राममंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचे, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। दोनों हाथ जोड़कर करीब दो मिनट तक मंदिर को निहारते रहे। ट्रस्ट के पदाधिकारियों से कहा कि सदियों की कल्पना साकार हो रही है। साक्षी बनकर अभिभूत हूं। इतनी खुशी हो रही है कि बता नहीं सकता। राम जी की महती कृपा है मुझ पर। तभी उन्होंने मेरे मॉडल को स्वीकार किया।

देश के प्रख्यात शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा ने 34 साल पहले जब मंदिर का मॉडल बनाया था, तब मंदिर निर्माण केवल कल्पना ही था। अब राम मंदिर उसी मॉडल और डिजाइन पर निर्मित हो रहा है। उम्मीद है कि 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के दिन सोमपुरा परिवार उस क्षण का गवाह बनेगा जिसके लिए उसने दशकों पहले सपने देखे थे।

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