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दुनिया अयोध्या और राम के सांस्कृतिक सरोकारों में सराबोर, बैंकॉक में 13,000 फुट की ऊंचाई पर लहराया रामध्वज

Mon, 01 Jan 2024 07:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 01 Jan 2024 07:12 AM IST
सार

राम का राज्य आदर्श राज व्यवस्था का मंत्र देता हैं। ध्वंस के विरुद्ध सृजन की शक्ति का संदेश यहां से निकलता है। अयोध्या के सांस्कृतिक सरोकारों का विस्तार और दुनिया में बढ़ता प्रभाव ही संभवत: इस नगरी पर आक्रांताओं के हमले का बड़ा कारण रहा।

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Ayodhya Ram Mandir and Ramnagari attracting the world
Ayodhya - फोटो : Social Media

विस्तार

अयोध्या के इतिहास में सामाजिक समरसता के सूत्र छिपे हैं, जो दुनियाभर के लोगों को इस नगरी से जोड़ते हैं, प्रेरणा देते हैं। राम का राज्य आदर्श राज व्यवस्था का मंत्र देता हैं। ध्वंस के विरुद्ध सृजन की शक्ति का संदेश यहां से निकलता है। अयोध्या के सांस्कृतिक सरोकारों का विस्तार और दुनिया में बढ़ता प्रभाव ही संभवत: इस नगरी पर आक्रांताओं के हमले का बड़ा कारण रहा।

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आक्रांताओं को लगा होगा कि इस नगरी की कुछ इमारतों को ध्वस्त करके या उनका स्वरूप बदलकर भारतीय संस्कृति की शक्ति को खत्म कर देंगे। पर, अयोध्या ने दिखा दिया कि उसके सांस्कृतिक सरोकारों को मिटाया नहीं जा सकता। राजनीतिक दलों ने अपने-अपने कथित सिद्धांतों की आड़ में स्वार्थों के हथियारों पर धार देने की कोशिश भी की, पर अयोध्या की सांस्कृतिक महत्ता खत्म नहीं की जा सकी।
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त्याग जैसी बड़ी भावना...सबको रख सकते हैं एकजुट
वैदिक संस्कृति का मूल भाव त्याग है और अयोध्या भी इसी संस्कृति को विस्तार देती है। वृद्ध हो चुके राजा दशरथ का...एक चक्रवर्ती सम्राट का युवा हो चुके पुत्र को राज देने की घोषणा हो, पिता के वचन की रक्षा के लिए पुत्र राम का वैभव त्यागकर उल्लासपूर्वक वनगमन स्वीकार करना हो, सीता व भाई लक्ष्मण का साथ वन जाना हो, राजा बनने का अवसर होते हुए भरत का उसे अस्वीकार करना इसी का द्योतक है। इनमें राष्ट्रनीति, परिवारनीति व समाजनीति सबकुछ है, जो बताती है कि त्याग से सबको एकजुट रख सकते हैं।
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लोकमंगल की कामना
सर्वे भवन्तु सुखिनः और वसुधैव कुटुम्बकम् का उद्घोष करने वाली वैदिक संस्कृति का मूल लोकमंगल की कामना है। अयोध्या और इसके राजा राम लोकमंगल के कल्याण के लिए ही निरंतर कार्य करते दिखते हैं। राम की राजर्षि विश्वामित्र की यज्ञ रक्षा से लेकर रावण से युद्ध तक दुष्टों का संहार और पीड़ितों को अभय होने का वचन देने जैसी लीलाएं लोकमंगल कल्याण की भावना की अनिवार्यता समझाती हैं। विद्वान और लेखक यूपी विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित कहते हैं, भारत का मन राम में रमता है। राम काव्य मानो भारत के राष्ट्र जीवन में प्रवाहमान हैं। मिलने पर जय राम, विलग होने पर राम-राम। राम भारतीय ऋतु अर्थात ब्रह्माण्ड का संविधान है।

नेपाल से उपहार, श्रीलंका  कंबोडिया और थाईलैंड से आ रहे कई कलाकार
प्राण प्रतिष्ठा के लिए राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ से 3 हजार क्विंटल चावल, ससुराल कहे जाने वाले नेपाल के जनकपुर से वस्त्र, उपहारों के 1100 थाल, आभूषण, बर्तन, कपड़े, 51 प्रकार की मिठाइयां, चांदी के बर्तन, गुजरात के बड़ोदरा से 108 फुट लंबी धूपबत्ती, हैदराबाद से चांदी की पादुकाएं समेत बाहर से आ रहा सहयोग राम व अयोध्या से लोगों का लगाव ही तो बताता है। कंबोडिया, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, इंडोनेशिया जैसे देशों के कलाकारों की ओर से होने जा रही रामलीला भी इसी सांस्कृतिक विस्तार की बानगी है ।

इंडोनेशिया : 90% मुस्लिम पर रोज रामायण का मंचन
अवधी संस्कृति व भाषा के बड़े विद्वान डॉ. रामबहादुर मिश्र बताते हैं, अवध क्षेत्र में भारत व नेपाल के 32 जिले आते हैं। क्षेत्र में दो भगवान हुए। श्रीराम व बुद्ध। अधिकांश देशों में दोनों का अलग-अलग महत्व दिखता है। थाईलैंड का एक नाम महेंद्र अयोध्या है। राजा के नाम के आगे राम लगता है। कमोबेश हर राजा ने एक रामायण लिखी है। 

  • इंडोनेशिया में 90 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। पर, यहां प्रतिदिन समुद्र तट पर विशाल खुले प्रेक्षागृह में रामायण का मंचन होता है। इसे देखने वालों को भगवा उत्तरीय डालकर ही अंदर प्रवेश मिलता है। 
  • वियतनाम, कंबोडिया, मॉरीशस, वेस्टइंडीज, सूरीनाम, कोरिया, ईराक, मिस्र जैसे कई देशों में भी रामलीला का मंचन होता है।

बैंकॉक में 13,000 फुट की ऊंचाई पर लहराया रामध्वज 
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भक्त अपनी-अपनी तरह से खुशियां जाहिर कर रहे हैं। संगमनगरी प्रयागराज की स्काई डाइवर अनामिका शर्मा (23) ने रविवार को एक और उपलब्धि हासिल की। बैंकॉक में 13 हजार फुट की उंचाई से राम मंदिर के ध्वज के साथ हैरतअंगेज छलांग लगाकर अपनी आस्था और  खुशी जाहिर की है। यूएसपीए (यूनाइटेड स्टेट पैराशूट एसोसिएशन) की सी कैटेगरी की स्काई डाइविंग लाइसेंस प्राप्त कर चुकीं अनामिका ने एक पखवाड़े पहले ही रोडियो स्काई डाइव जंप कर इतिहास रचा था। संवाद

थाइलैंड में बजीं तालियां
अनामिका ने राम मंदिर के सम्मान में यह छलांग थाइलैंड के रेयांग शहर में लगाई है। थाईलैंड हनुमानजी को अपना रक्षक मानता है। अनामिका ने जैसे ही सनातनी और धार्मिक श्रीराम का ध्वज आकाश में फहराया तो थाइलैंड के स्थानीय नागरिकों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया।

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