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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ayodhya Ram Mandir 45 rules of Pran Pratistha will have to be followed for 8 days from 15 January

Ram Mandir: चौकी पर सोएंगे मुख्य यजमान, ब्रह्मचर्य का करना होगा पालन; आठ दिन तक पालन करेंगे होंगे 45 कठोर नियम

Sat, 06 Jan 2024 11:45 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 06 Jan 2024 11:45 AM IST
सार

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने प्राणप्रतिष्ठा के यजमान के लिए नियमों के बारे में काशी के विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ से सलाह मांगी थी। उन्होंने कोषाध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा है कि 15 जनवरी से मुख्य यजमान को सभी 45 नियमों का पालन करना होगा। 

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Ayodhya Ram Mandir 45 rules of Pran Pratistha will have to be followed for 8 days from 15 January
Ayodhya Ram Mandir Pran Pratishtha - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्राण प्रतिष्ठा समारोह पूरी तरह से सनातनी व वैदिक परंपराओं के अनुसार ही होगा। 22 जनवरी को 84 सेकंड के अभिजीत मुहूर्त में होने वाले समारोह के मुख्य यजमान एक दंपती होंगे। 
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दंपती को 15 जनवरी से ही उपवास, जप, तप, हवन, स्नान और दान समेत 45 नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। उन्हें लकड़ी की चौकी पर सोना होगा। ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा। आलोक कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट...
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रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा के यजमान के लिए नियमों पर काशी के विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ से सलाह मांगी थी। 
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उन्होंने कोषाध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा है कि मुख्य यजमान को आठ दिनों तक सभी 45 नियमों का पालन करना होगा। इसमें प्रायश्चित, गोदान, दशविध स्नान, प्रायश्चित क्षौर और पंचगव्यप्राशन भी शामिल है। इन नियमों के अनुसार अपनी जीवनचर्या बदलनी होगी।

ऐसे हैं सख्त नियम

  • नित्य प्रात: स्नान, बाहरी भोजन वर्जित, बीड़ी-सिगरेट का त्याग।
  • मन को विचलित करने वाले दृश्य पूरी तरह से वर्जित, खुद को शांत रखें, क्रोध न करें, अहंकार एवं मद से दूर रहना होगा, ब्राह्मणों को संतुष्ट रखना होगा।
  • सच बोलना। सच बोलने में अड़चन होने पर मौन रहना होगा।
  • आचार्य, ब्राह्मण और ऋत्विजों से झगड़ा, कठोर वचन व कटु भाषण का इस्तेमाल नहीं करेंगे। सद्विचार एवं सद्चिंतन करेंगे।
  • पुरुष यजमान सिला हुआ सूती वस्त्र नहीं पहनेंगे। पत्नी लहंगा, चोली जैसे सिले वस्त्र पहन सकेंगी। स्वेटर, ऊनी शाल, कंबल धारण कर सकेंगे।
  • नित्य का पूजन होने के पूर्व यजमान फलाहार कर सकते हैं। गरम व शीतल शुद्ध जल ले सकते हैं। बोतलबंद पानी व बर्फ वर्जित है।
  • रात्रि में आरती के बाद सात्विक भोजन कर सकते हैं। रात्रि में सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • हल्दी, राई, सरसों, उड़द, मूली, बैंगन, लहसुन, प्याज, मंदिरा, मांस, अंडा, तेल से बने पदार्थ, गुड़, भुजिया चावल, चना वर्जित है।
  • औषधि व तांबूल ले सकते हैं। खाने-पीने की चीजें भगवान को भोग लगाकर प्रसाद रूप में ही ग्रहण करें।
  • दोपहर में ब्राह्मणों को पहले आहार पर बैठाना चाहिए, उसके बाद यजमान आहार करें। रात्रि में भी इसी तरह करना होगा।
  • दिन में शयन वर्जित है। शयन लकड़ी की चौकी पर करना होगा। खटिया पर बैठना, सोना वर्जित है।
  • पुरुष को दर्भासन एवं कंबल तथा महिला के लिए कंबल, संपूर्ण कार्य होने के पूर्व रोजाना बिछौना पर बैठना वर्जित। रोज दाढ़ी एवं नख निकालना वर्जित
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