Ayodhya : राम मंदिर में स्थापित हुए नवग्रह, अचल विग्रह को जीवंत करने की प्रक्रिया शुरू, आज होंगे पांच अधिवास
टेंट में विराजमान रामलला के भी आम श्रद्धालुओं को शुक्रवार को अंतिम दर्शन हुए। इस अस्थायी मंदिर में शनिवार व रविवार को दर्शन बंद रहेंगे। सोमवार को रामलला नए मंदिर में प्रतिष्ठित हो जाएंगे।
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रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के सतत अनुष्ठान के क्रम में अचल विग्रह यानी मूर्ति की देह का शुद्धीकरण कर मंत्रों से प्राण डालने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। टेंट में विराजमान रामलला के भी आम श्रद्धालुओं को शुक्रवार को अंतिम दर्शन हुए। इस अस्थायी मंदिर में शनिवार व रविवार को दर्शन बंद रहेंगे। सोमवार को रामलला नए मंदिर में प्रतिष्ठित हो जाएंगे।
शुक्रवार को प्राण प्रतिष्ठा की सबसे लंबी पूजा हुई। 12 घंटे की इस पूजा में सबसे पहले नवग्रह की स्थापना हुई। फिर नौ कुंडों में अरणि मंथन से वैदिक परंपरा से अग्नि प्रज्वलित की गई। पं. अरुण दीक्षित के मुताबिक, कोई भी ग्रह अड़चन न डाले, इसलिए सबसे पहले उनके नाम से आहुतियां डाली गईं। बड़ी वेदी में भगवान राम की रजत मूर्ति की महापूजा भी हुई। हवन करीब दो घंटे चला। इसके बाद चार कोनों में योगिनी पूजा और क्षेत्रपाल पूजा की गई। यह भी यज्ञ की रक्षा करते हैं। आखिर में महादेव की रूद्र पूजा हुई।
भगवान राम के नए घर में वास्तुशांति की पूजा के साथ भगवान का गृहप्रवेश हुआ। इस सबके बीच, जो सबसे जरूरी संस्कार थे, वह थे अधिवासन। इसके लिए भगवान को आंखों पर बंधी पट्टी के अलावा सभी वस्त्र हटाकर अन्न में रखा गया। नख से शिख तक चावल से नहलाया गया। चरण में घी लगाया, साथ में केसर व औषधियां भी। इस दौरान अलग-अलग राज्यों से आए 121 पंडित मौजूद थे। उनके साथ प्रमुख आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित भी गर्भगृह में रहे। शाम सात बजे आरती व पुष्पांजलि से पूजा पूरी हुई।
रामलला के नए विग्रह की आंखें फिलहाल ढकी हुई हैं, जिन्हें 22 तारीख को ही खोला जाएगा। अभी रामलला सिर्फ मेवा खाएंगे। 22 तारीख को उन्हें छप्पन भोग लगाया जाएगा। शनिवार को रामलला विराजमान भी लकड़ी वाले मंदिर से नए भव्य मंदिर में आ जाएंगे। उनके लिए जगह पहले ही बना दी गई है। नए विग्रह का शनिवार को कमल के फूलों से अधिवास होगा और 81 कलशों के जल से मंदिर को शुद्ध किया जाएगा।
आज होंगे पांच अधिवास
समारोह के पांचवें दिन शनिवार को नित्य पूजन, हवन पारायण के साथ भगवान राम के पांच अधिवास शुरू होंगे। भगवान को शक्कर, फल, प्रसाद, पिंड और पुष्प में रखा जाएगा।
केंद्र के बाद 12 राज्यों में भी 22 जनवरी को छुट्टी
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार की तरफ से आधे दिन की छुट्टी घोषित किए जाने के बाद देश के 12 राज्यों में भी इसी तर्ज पर 22 जनवरी को आधे दिन का राजकीय अवकाश घोषित किया गया है।
- इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, उत्तराखंड, गुजरात, त्रिपुरा, असम, ओडिशा और हरियाणा शामिल हैं। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ व पुडुचेरी में भी छुट्टी रहेगी।
राममंदिर पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के जजों को निमंत्रण
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई)के अलावा सुप्रीम कोर्ट के चार पूर्व जजों को भी प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है।
- उल्लेखनीय है, वर्तमान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई, पूर्व सीजेआई एसए बोबडे, पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अशोक भूषण व पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
- यूपी सरकार की आमंत्रित सूची में पूर्व मुख्य न्यायाधीश, शीर्ष वकील, रामलला के वकील के परासरन, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल भी शामिल हैं।
22 तारीख तक प्रज्वलित रहेगी अग्नि
गर्भगृह में अरणिमंथन से अग्नि प्रज्वलित की गई। यजमान ने लकड़ी के बने यंत्र से अरणिमंथन कर अग्नि प्रज्वलित की। अग्नि को नौ कुंडों में बांटा गया। यह 22 तारीख तक प्रज्वलित रहेगी। 4-4 पुजारी गर्भगृह में हमेशा उपस्थित रहेंगे।
आज से विराजमान रामलला चल मूर्ति के रूप में रहेंगे
अयोध्या में 75 साल से रामलला की जिस मुख्य मूर्ति की पूजा हो रही थी, उसे शनिवार से चल मूर्ति के तौर पर मुख्य गर्भ गृह में रखा जाएगा। यही मूर्ति 1949 में जन्मभूमि परिसर में प्रकट हुई थी।