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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   200 year old Guru Sadan Bihari Temple, Shri Ram's eyes remain bent in the Guru Ghar.

आंखन देखी अयोध्या : 200 साल पुराना गुरुसदन बिहारी मंदिर, गुरु घर में झुकी रहती हैं श्रीराम की आंखें

Mon, 15 Jan 2024 05:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा उपमिता वाजपेयी, अयोध्या
उपमिता वाजपेयी, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 15 Jan 2024 05:44 AM IST
सार

यानी रघुपति ने सभी सखाओं को बुलाया और सिखाया कि मुनि के चरणों में लगो। श्रीराम ने कहा गुरु वशिष्ठ हमारे कुलभर के पूज्य हैं। इन्हीं की कृपा से रण में राक्षस मारे हैं।
 

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200 year old Guru Sadan Bihari Temple, Shri Ram's eyes remain bent in the Guru Ghar.
गुरुसदन बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुनि रघुपति सब सखा बोलाए। मुनि पद लागहु सकल सिखाए।

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गुर बसिष्ट कुलपूज्य हमारे। इन्ह की कृपां दनुज रन मारे।

यानी रघुपति ने सभी सखाओं को बुलाया और सिखाया कि मुनि के चरणों में लगो। श्रीराम ने कहा गुरु वशिष्ठ हमारे कुलभर के पूज्य हैं। इन्हीं की कृपा से रण में राक्षस मारे हैं।

रौनक से रोशन राम पथ पर तुलसी उद्यान के ठीक सामने है 200 साल पुराना मंदिर। नाम है गुरुसदन बिहारी, तीन कलश तिवारी मंदिर, श्री अयोध्याजी। यह अयोध्या का इकलौता मंदिर है, जहां भगवान राम के विग्रह में उनकी आंखें झुकी हुई हैं। वजह भी खास है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यह श्रीराम के गुरु वशिष्ठ का स्थान है। गुरु का घर है। इसलिए यहां श्रीराम की आंखें सम्मान में झुकी रहती हैं। यहां पूजा करते वक्त श्रीराम को आशीर्वाद दिया जाता है। ‘
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कुशल कौशलाकोशल कोशला, कुशलपालकबालकलालिका।’ कहा जाता है राम आप कुशल रहें, प्रसन्न रहें, मुदित रहें, आपकी रक्षा हो। यहां भगवान की स्तुति में गुरु का भाव है।  
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आंगन में सुरखी, चूना, उड़द दाल, मेथी और गुड़ के पानी में सने हुए देसी सीमेंट का ढेर हैं। इस मिश्रण से इन दिनों मंदिर का पुनरोद्धार चल रहा है। यह देसी पेस्ट दमदार से दमदार सीमेंट से दोगुना मजबूत होता है। सीमेंट का बना अगर 100 साल चलता है तो यह 250 साल से भी ज्यादा। शायद यही वजह है कि कई सौ साल पुराने मंदिर आज भी अयोध्या में धर्म-पुराण की गवाही दे रहे हैं।

भीतर नक्काशी है, राम-सीता प्रसंग वाली पेंटिंग के धुंधले और घिस चुके निशान भी। फिलहाल फैजाबाद आर्ट यूनिवर्सिटी के लोग यहां फिर से पेंटिंग का काम कर रहे हैं। लगभग एक साल लगेगा मंदिर का काम पूरा होने में। मंदिर में खूबसूरत सा राम दरबार है, जिन्हें अयोध्या की अबतक की सबसे ज्यादा कंपकंपानेवाली सर्दी में दुशाला पहनाई गई है। रामदरबार से थोड़ी ऊंचाई पर पंडित उमापति त्रिपाठी का चित्र लगा है, जिन्हें वशिष्ठ के स्वरूप का दर्जा मिला है। पुजारी कभी भी भगवान राम की उतरी हुई माला उन्हें नहीं पहनाते। 

इसके पीछे भी एक कहानी है। पंडित उमापति कनक महल में राम जी को अपनी जूठी माला पहना देते थे। वहां के लोग इस पर नाराज हो गए। उमापति ने कहा रघुवर तो मेरे शिष्य हैं और इसे साबित करने कोई भी परीक्षा दे सकता हूं। बकायदा सभा बुलाई गई। सभी लोग अपनी जूठी माला पहनाकर इस परीक्षा में हिस्सा लेने लगे, लेकिन जो भी पहनाता माला या तो गिर जाती या टूट जाती। लेकिन जब पंडित उमापति ने पहनाई तो भगवान राम का मुकुट झुक गया। और पंडित उमापति को गुरु वशिष्ठ का स्वरूप माना जाने लगा। वे जब भी मंदिर जाते तो रघुवर को आशीर्वाद देकर आते। मां सीता उनकी बहू हैं, इसलिए जब वे मंदिर के भीतर पैर रखते तो पुजारी सीता जी की तरफ पर्दा लगा देते। पंडित उमापति ने भगवान राम पर 75 ग्रंथ लिखे हैं। सरयू अष्टक उनमें सबसे मशहूर है। 


भगवान राम के इस प्राचीन से भी प्राचीन मंदिर में दूध निषेध माना गया है। उन्हें दही और इससे बने सामान का ही भोग लगता है। कढ़ी चावल उनका सबसे पसंदीदा है। इसके अलावा भोग की थाली में खड़ी उड़द की दाल और साग भी जरूर होती है। इस भोग की सारी जिम्मेदारी राजलक्ष्मी त्रिपाठी की है। वे मंदिर के महंत, पंडित उमापति की छठी पीढ़ी और अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी की पत्नी हैं। महंत की गद्दी और महापौर की कुर्सी पर बैठे गिरीश त्रिपाठी की दो तरह की मेल-मुलाकात होती हैं। पहली मंदिर के श्रृद्धालुओं वाली, जिसमें वे अपने महाराज जी से घरेलू परेशानियों-नौकरी पुण्य पाप का हल मांगते हैं। दूसरी महापौर वाली, जिसमें नाले, सफाई, जमीन, दुकान जैसी बातें सुलझाई जाती हैं। 20 जोड़े रोज उनसे गुरुमंत्र लेने आते हैं और कम से कम 100-150 लोग शहर की समस्याएं सुनाते हैं। रघुपति के गुरु का घर है, इसलिए यहां 21 बच्चों को वेदपाठ पढ़ानेवाला एक गुरुकुल भी चलता है।

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