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अमर उजाला से बोले मनोज सिन्हा- गाजीपुर से गाजियाबाद तक अखिलेश सरकार फेल

Sun, 29 Jan 2017 03:03 PM IST
शशिधर पाठक
शशिधर पाठक Updated Sun, 29 Jan 2017 03:03 PM IST
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uttar pradesh assembly election 2017 union minister manoj Sinha exclusive interview with amar ujala
फाइलः केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा - फोटो : twitter
केन्द्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा उ.प्र. और पूर्वांचल की राजनीति को बारीकी से समझते हैं। 1982 में बीएचयू के अध्यक्ष रहे सिन्हा टेक्नोक्रेट(बीटेक, एमटेक) हैं। मनोज सिन्हा ने उ.प्र. में विधानसभा चुनाव पर शशिधर पाठक से विस्तार से चर्चा की। पेश है प्रमुख अंश-
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प्रश्न : उ.प्र. विधानसभा चुनाव को किस तरह से देख रहे हैं। चुनाव को लेकर राजनीतिक दल और मतदाता कौन, कितने भ्रम में है?
उत्तर : मतदाता किसी तरह के भ्रम में नहीं है। वह राज्य में बदलाव का मन बना चुका है। भाजपा भी किसी भ्रम में नहीं है। हम राज्य में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने जा रहे हैं। बाकी कोई और भ्रम में है तो हम नहीं कह सकते।
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प्रश्न : इतने बड़े आत्म विश्वास का आधार क्या है?
उत्तर : पिछले दिनों से भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। हमें युवा, महिला, किसान सम्मेलनों में जिस तरह का जन समर्थन मिला है, उससे आश्वस्त हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कामकाज से प्रदेश की जनता और देश के लोगों में उत्साह बढ़ा है। भारत की छवि निखरी है और लोग इसे महसूस कर रहे हैं।
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प्रश्न : उ.प्र. में सपा सरकार सत्ता में है और सत्ता पाने की मुहिम में है। सरकार का नारा है 'विकास बोलता है। कांग्रेस के साथ गठबंधन भी।' कहीं आप अनदेखी तो नहीं कर रहे हैं?
उत्तर : पिछले चुनाव में लोगों ने सपा को बड़े उत्साह और उम्मीद से वोट दिया था। लोगों को लगा था कि विदेश से पढ़कर आए अखिलेश यादव अलग तरह की सरकार चलाएंगे। जातिगत राजनीति से अलग कुछ नया करेंगे, लेकिन उ.प्र. के लोग निराश हुए हैं।

प्रश्न : यानी अखिलेश उ.प्र. की सरकार नहीं चला पाए?
उत्तर : व्यक्ति नहीं, मुद्दों पर केन्द्रित बात करना चाहता हूं। इसलिए मुझे अपनी बात पूरी कर लेने दीजिए। सीधी सी बात है कि कानून का राज होगा तो निवेश आएगा और विकास होगा। अखिलेश के नेतृत्व वाली सरकार इसमें फेल रही है। मथुरा में जवाहर बाग की घटना, मुजफ्फरनगर दंगा, सहारनपुर में व्यभिचार, मुख्यमंत्री आवास से 200 मीटर की दूरी पर महिला से बलात्कार और उसकी हत्या, गाजीपुर से लेकर गाजियाबाद तक जमीन, प्लॉट, मकान पर समाजवादी पार्टी से जुड़े तत्वों के कब्जे। इन सबने एक रिकार्ड बना दिया है।

'विकास बोलता है', तो दिखता क्यों नहीं?

uttar pradesh assembly election 2017 union minister manoj Sinha exclusive interview with amar ujala
फाइलः मनोज सिन्हा - फोटो : अमर उजाला
प्रश्न : लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश तो साफ-सुथरी सरकार के चेहरे पर चुनाव मैदान में हैं?
उत्तर: यह केवल दिखाने के लिए है। आचार संहिता लागू होने और समाजवादी पार्टी की अंदरुनी लड़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने पहली चुनावी सभा अमेठी में की है। उ.प्र. सरकार के निवर्तमान मंत्री गायत्री प्रजापति के समर्थन में। इसी गायत्री प्रजापति को अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया था। इसलिए यहां उ.प्र. के मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार और साफ-सुथरी बनाई गई छवि पर कुछ कहने की जरूरत नहीं है।

प्रश्न : सपा का भी आरोप है कि मुजफ्फरनगर दंगे में जिन पर सवाल था भाजपा और केन्द्र की सरकार ने उन्हें बड़ा हीरो बना दिया?
उत्तर : इस सवाल पर बाद में आऊंगा। पहले कहना चाहते हैं। आप देखिए उ.प्र. में जिस तरह से सिपाही, लेखपाल, दरोगा की भर्तियां हुई हैं, यहां तक कि राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में एक क्षेत्र और किस्म के लोगों के चयन में धांधली हुई, अप्रत्याशित है। आजादी के बाद से अब उ.प्र. में ऐसा नहीं हुआ था। हम इसके लिए न्यायपालिका के आभारी हैं। लोकायुक्त जैसी संस्था का हलफनामा भी बड़ा सवाल है। सरकार ने नारा तो दे दिया कि विकास बोलता है, लेकिन यह विकास कहीं जमीन पर दिखता नहीं।

प्रश्न : मुजफ्फरनगर दंगे पर भाजपा पर लग रहे आरोप भी तो सवाल हैं?
उत्तर : उ.प्र. में समाजवादी पार्टी की सरकार है। सरकार ने जांच कराई है। उसे दंगे की जांच रिपोर्ट पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। दोषियों के नाम बताना चाहिए और उन पर कानून का शिकंजा कसना चाहिए।

प्रश्न : सपा ने कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया है?
उत्तर : यह तो अवसरवादी गठबंधन है। भाजपा के बढ़ते जनाधार और प्रधानमंत्री मोदी जी की छवि से घबराकर किया गया है। कुछ स्वार्थी राजनीतिक ताकतें इसमें जुड़ना चाहती थी, लेकिन स्वार्थों के आपसी टकराव के कारण नहीं जुड़ सकीं। वैसे भी उ.प्र. में कांग्रेस खत्म हो चुकी है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि गठबंधन का राजनीतिक स्वार्थपूर्ति में कोई फायदा मिल पाएगा।

प्रश्न : ऐसे में भाजपा का सीधा मुकाबला किस दल से होगा। बसपा से या फिर समाजवादी-कांग्रेस गठबंधन?
उत्तर : उ.प्र. में भाजपा का किसी से मुकाबला नहीं है। बसपा और सपा-गठबंधन में मुकाबला है। ये दोनों राज्य में दूसरे नंबर की पार्टी बनने के लिए लड़ रहे हैं। यह चुनाव एक तरफा और भाजपा के पक्ष में है।
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