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राज्यसभा चुनाव: छोटी सी बगावत भी कई राज्यों में बिगाड़ेगी कांग्रेस का खेल

Mon, 16 Mar 2020 03:51 AM IST
संजीव कुमार झा हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 16 Mar 2020 03:51 AM IST
सार

  •  मध्यप्रदेश के बाद गुजरात में गड़बड़ाया पार्टी समीकरण
  •  राजस्थान और हरियाणा में गहलोत-हुड्डा विरोधी वोट पर भाजपा की नजर

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Rajya sabha election, Even a small rebellion will spoil the Congress game in many states

विस्तार

नेताओं की बगावत के कारण चौतरफा संकट का सामना कर रही कांग्रेस के लिए राज्यसभा चुनाव लिटमस टेस्ट साबित होने जा रहे हैं।  चुनावी गहमागहमी के दौरान ही मध्यप्रदेश के बाद अब गुजरात में भी विधायकों की बगावत ने पार्टी का समीकरण गड़बड़ा कर रख दिया है।

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कांग्रेस में अंतर्विरोध का लाभ उठाने में जुटी भाजपा की निगाहें राजस्थान और हरियाणा में भी सीएम अशोक गहलोत और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विरोधी विधायकों के मतों पर टिकी हुई हैं। झारखंड में भी कांग्रेस के इकलौते उम्मीदवार के लिए जरूरी आंकड़े पूरे नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में विधायकों की मामूली बगावत भी इन राज्यों में कांग्रेस का खेल पूरी तरह बिगाड़ देगी।
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दरअसल 17 राज्यों की 55 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस ने पूरा जोर लगाया हुआ है। लेकिन राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस का समीकरण गड़बड़ा दिया। इससे जहां पार्टी की एक राज्यसभा सीट कम हुई, वहीं राज्य सरकार का भविष्य भी दांव पर लग गया है।
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रविवार को गुजरात में भी विधायकों के इस्तीफे ने कांग्रेस की दूसरी सीट जीतने की संभावनाओं पर ग्रहण लगा दिया है। इस सूबे में पार्टी को अपने दोनों उम्मीदवार जिताने के लिए 74 विधायकों की जरूरत है। पहले पार्टी को उम्मीद थी कि अपने 73 और निर्दलीय जिग्नेश मेवाणी के सहारे वह दोनों सीट निकाल लेगी। लेकिन अब चार विधायकों के इस्तीफे ने पार्टी के रणनीतिकारों को उलझा दिया है।

हरियाणा में पहले ही एक मत से पीछे

हरियाणा में एक राज्यसभा सीट निकालने के लिए कांग्रेस को 31 विधायकों का मत जुटाना होगा। फिलहाल पार्टी के पास यहां 30 विधायक हैं यानी एक मत से पहले ही वह पीछे है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि कुमारी सैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला की जगह भूपेंद्र हुड्डा के अपने पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को उम्मीदवार बनाने से फूट पैदा हुई है। इससे कुछ विधायक क्रास वोटिंग कर सकते हैं। जाहिर है क्रास वोटिंग होने पर दीपेंद्र की राह मुश्किल हो जाएगी।
 

राजस्थान में भी हरियाणा जैसा समीकरण

हरियाणा और राजस्थान में एक जैसा ही समीकरण है। चर्चा है कि डिप्टी सीएम सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक सीएम अशोक गहलोत के करीबी नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाने से खुश नहीं है। ऐसे में यहां भी भाजपा को पायलट गुट के विधायकों की क्रास वोटिंग की उम्मीद है। इसी कारण भाजपा ने राजस्थान में अपना दूसरा उम्मीदवार भी उतार कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। 

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