2019 का बिगुल है मोदी का नया सपना न्यू इंडिया
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जीत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पैदल मार्च दिल्ली केअशोक मार्ग पर और जश्न भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय में। वजह साफ है कि आज से ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने पार्टी के 2019 के लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा दिया है। इसीलिए पार्टी मुख्यालय परिसर में जोश और उत्साह से भरे हजारों कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को न्यू इंडिया यानी नया हिंदुस्तान बनाने का न सिर्फ नया सपना दिखाया बल्कि 2022 तक का अपना सियासी एंजेडा भी साफ कर दिया।
देश के युवाओं केलिए मोदी का न्यू इंडिया का सपना क्लीन इंडिया (स्वच्छ भारत), डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, कैशलेस इंडिया से आगे की छलांग है, जिसके जरिए मोदी अब भाजपा को आने वाले सभी विधानसभा चुनावों और अगले लोकसभा चुनावों में पार्टी की जीत रास्ता तैयार करना चाहते हैं।
आम तौर पर राज्यों की जीत का जश्न संबंधित राज्य की राजधानी और प्रदेश मुख्यालय में मनाने का ही चलन हर पार्टी में ही है। विजय जुलूस भी राज्यों में ही निकलते रहे हैं। दिल्ली स्थित मुख्यालयों में चुनाव नतीजों के दिन जरूर उत्साही कार्यकर्ता आतिशबाजी और ढोल बजाकर अपनी खुशी जाहिर करते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों केचुनावों को मीडिया और विपक्ष ने केंद्र की ढाई साल पुरानी मोदी सरकार के लिए सेमी फाइनल जैसा करार दिया था। खासकर उत्तर प्रदेश को विपक्ष नरेंद्र मोदी केलिए सियासी वाटर लू बनाने में जुटा था।
राहुल अखिलेश की जोड़ी और मायावती की बेफिक्र चाल के सियासी चक्रव्यूह को भेदकर मोदी की अगुआई में भाजपा ने जो ऐतिहासिक जीत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दर्ज की, उसे आज केजश्न के जरिए भाजपा ने 2019 केआम चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार रहने केआ्हवान में बदल दिया।
हालाकि इसी साल नवंबर दिसंबर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव हैं। फिर मई 2018 में कर्नाटक और नवंबर में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव भी होने हैं। लेकिन मोदी और शाह की जोड़ी ने भाजपा कार्यकर्ताओं 2019 केआम चुनावों का नया एजेंडा देकर इन चुनावों के लिए उन्हें अपनेआप तैयार होने की जिम्मेदारी दे दी है। अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने न्यू इंडिया का जो नारा दिया है यह आने वाले सभी चुनावों केलिए भाजपा का सियासी एजेंडा होगा। क्योंकि अब जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक को छोड़कर सभी भाजपा शासित राज्य हैं जिनमें गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो पिछले 15 साल से भाजपा का शासन है।
इसलिए इन राज्यों में पार्टी को सत्ता विरोधी रुझान से बचाने की भी चुनौती है। यहां मोदी और शाह परिवर्तन का वो नारा नहीं दे सकते जो उन्होंने अब तक कांग्रेस और अन्य गैर भाजपा दलों द्वारा शासित राज्यों में देकर सफलता पाई है। इसलिए अब सारे चुनाव भाजपा नया हिंदुस्तान बनाने के नाम पर लड़ेगी और जनता खासकर युवाओं को न्यू इंडिया के सपने से जोड़कर नरेंद्र मोदी उन्हें अपने साथ जोड़े रखने की मुहिम में जुट गए हैं।