जया तो एक बहाना हैं, अमर-आजम का झगड़ा पुराना है
मुलायम मुंह खोलें तो राज पता चले
अमर सिंह और आजम के झगड़े की असलियत केवल मुलायम सिंह को पता है, लेकिन नेता जी के नाम से मशहूर मुलायम सिंह यादव कभी साथ रहे अपने विरोधियों को लेकर मुंह नहीं खोलते। यहां तक कि जब बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस के टिकट पर सांसद थे और मुलायम सिंह यादव को बुरा-भला कह रहे थे, तब भी मुलायम सिंह यादव ने बेनी को कभी कुछ नहीं कहा। बाद में बेनी को समाजवादी पार्टी में वापस भी ले आए। राज्यसभा की सदस्यता भी दिलाई।इसी तरह से 2009 के चुनाव में रामपुर से ही आजम खान के समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी जयाप्रदा के खिलाफ खुली बगावत करने पर भी मुलायम सिंह चुप रहे। आजम के विरोध के बावजूद यह चुनाव जयाप्रदा जीत गईं और इसके बाद उन्हें अमर सिंह के दबाव और मुलायम सिंह की सहमति से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था।
आजम ने अपने हिसाब से संवाद बोले, मुलायम चुप रहे। 2010 में अमर सिंह ने भी समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता, महासचिव और संसदीय बोर्ड से इस्तीफा दे दिया। बाद में मुलायम सिंह के खिलाफ खूब बोले, लेकिन नेताजी ने लक्ष्मणरेखा लांघने में न केवल परहेज किया, बल्कि अमर सिंह को दोबारा समाजवादी पार्टी ज्वाइन कराई, राज्यसभा की सदस्यता भी दी।
आजम ने बोले जहरीले बोल, लेकिन नहीं बताई वजह
आजम खान ने कभी भी अमर सिंह के साथ अपने नाराजगी की वजह को विस्तार से नहीं बताया। हालांकि आजम खान ने अमर सिंह के साथ झगड़े को जमकर सार्वजनिक रूप दिया। उन्हें सत्ता का दलाल तक कह डाला। जया प्रदा को लेकर 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद से आजम खान की भाषा कभी संयत नहीं रही।
आजम खान ने जया प्रदा को हमेशा नाचने गाने वाली ही कहा। आजम खान ने जयप्रदा पर कई बार जहरीला, अपमानजनक कटाक्ष किया। जयप्रदा ने भी इस पर पलटवार किया। उन्होंने आजम खान को पदमावत फिल्म में अलाऊद्दीन खिलजी के किरदार का भी खिताब दिया। जया प्रदा के साथ अमर सिंह हमेशा खड़े रहे।
उन्होंने आजम खां को राक्षस, चोर, कुकुरमुत्ता तक कह डाला। यहां तक कि आजम खान के आपत्तिजनक बयान पर अमर सिंह का कहना है कि वह खुली जीप में बंदूक और राइफल लेकर रामपुर तक पहुंच गए थे। यदि आजम खान सामने आते तो अमर सिंह या आजम खान में से कोई एक ही बच पाता।
जयप्रदा, अमर और आजम खान
जया प्रदा अमर सिंह को अपना गॉड फादर और राजनीतिक गुरू मानती हैं। 2010 में उन्होंने अमर सिंह के साथ समाजवादी पार्टी छोड़ दी थी। राष्ट्रीय लोकदल से समझौते में मिली सीट पर वह बिजनौर से चुनाव लड़ी थी और हार गईं। अमर सिंह भाजपा में आए तो जया प्रदा भी आ गई। अमर सिंह जया प्रदा को रामपुर से टिकट दिलवाने में सफल रहे और वह वहां से चुनाव लड़ रही हैं।
यह भी एक सच्चाई है कि जया प्रदा ने 1994 में फिल्मों से राजनीति का रुख करने पर तेलगू देशम पार्टी का दामन थामा था। 2000 में उन्हें अमर सिंह ही समाजवादी पार्टी में लेकर आए थे। 2004 में समाजवादी पार्टी ने जया प्रदा को रामपुर से उम्मीदवार बनाया और अमर सिंह की इच्छा का ख्याल रखकर आजम खान ने जया प्रदा को रामपुर से चुनाव जीताने में ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। वह चुनाव में सफल भी हुईं।
क्या हुआ था आजम खान की पर्दा वाली गाड़ी में?
कभी एक समय था कि मुलायम सिंह भी जया प्रदा की बहुत इज्जत करते थे। जया प्रदा सैफई महोत्सव में प्रभावी तरीके से मंच पर रहती थीं। लेकिन अमर सिंह ने संकेत भर दिया है। अमर सिंह का कहना है कि उनके और आजम खान के बीच में तकरार की वजह जयप्रदा हैं।
चुनाव का समय था और आजम खान ने अपनी पर्दा वाली गाड़ी में जयप्रदा को बिठाया था। इसके बाद क्या हुआ, यह जया प्रदा चाहें तो बताएं। अमर सिंह कुछ नहीं बोलेंगे। अमर सिंह यह भी कहते हैं कि इसके बाद से उनके और आजम खान में ठन गई।
जब मोदी सरकार के विदेश राज्यमंत्री मंत्री एमजे अकबर पर मी टू अभियान के तहत आरोप लग रहा था, तब अमर सिंह ने कहा था कि यदि जया प्रदा मुंह खोल दें तो आजम खान को जेल जाना पड़ सकता है। फिलहाल यह जुबानी जंग चुनावी अदावत में अभी जारी है।