Telegram Ban: टेलीग्राम को पहले ही किया था आगाह, नहीं माने तो लगा बैन; NTA ने बताई पूरी कहानी
NEET री-एग्जाम से पहले Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर नई जानकारी सामने आई है। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह का कहना है कि सरकार ने Telegram को पहले ही कुछ फीचर्स के दुरुपयोग को लेकर आगाह किया था, लेकिन कंपनी ने जरूरी बदलाव नहीं किए। वहीं, इस फैसले ने परीक्षा की निष्पक्षता और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच नई बहस छेड़ दी है।

NEET री-एग्जाम से ठीक पहले Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने बड़ा बयान दिया है। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह का कहना है कि सरकार ने Telegram को पहले ही उसके कुछ फीचर्स के दुरुपयोग के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन कंपनी ने समय रहते जरूरी बदलाव नहीं किए। इसके बाद सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े।
सरकार ने Telegram की सेवाओं को 22 जून तक पूरे देश में ब्लॉक कर दिया है। साथ ही भारतीय यूजर्स के लिए एप के मैसेज एडिट फीचर को भी 30 जून तक बंद करने का निर्देश दिया गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?
- अभिषेक सिंह के मुताबिक, सरकार का मुख्य उद्देश्य NEET री-एग्जाम से पहले फैलाए जा रहे फर्जी पेपर लीक के दावों पर रोक लगाना है। ऐसे दावे छात्रों के बीच डर और भ्रम पैदा कर रहे थे।
- उन्होंने बताया कि Telegram के वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च स्तर की बैठकों में बुलाकर दो प्रमुख समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया गया था। पहली, एडिट किए गए मैसेज के टाइमस्टैम्प को स्पष्ट रूप से दिखाने की जरूरत और दूसरी, ग्रुप्स के नामों पर सख्त नियंत्रण की कमी। लेकिन Telegram ने उस समय अपने सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया।

कैसे फैलाया जाता था फर्जी पेपर लीक का भ्रम?
- NTA के अनुसार, कुछ लोग Telegram के ग्रुप और चैनल सिस्टम की एक तकनीकी खामी का फायदा उठा रहे थे। इस तरीके में कोई व्यक्ति परीक्षा से कई दिन पहले एक सार्वजनिक Telegram चैनल पर कोई सामान्य PDF अपलोड कर देता था और उसका नाम "NEET Question Paper Leaked" जैसा भड़काऊ रख देता था। परीक्षा होने के बाद वही व्यक्ति Telegram के एडिट फीचर का इस्तेमाल कर उस फाइल को असली प्रश्नपत्र से बदल देता था।
- चैनल पर पोस्ट के साथ "Edited" का टैग तो दिखाई देता था, लेकिन उससे जुड़े ग्रुप में पुराना टाइमस्टैम्प बना रहता था। इससे ऐसा लगता था कि असली प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही उपलब्ध था। इसी वजह से छात्रों और अभिभावकों के बीच घबराहट फैल जाती थी।
Telegram ने क्या जवाब दिया?
- Telegram के संस्थापक पावेल डुरोव ने हाल ही में X पर कहा था कि कंपनी एडिट किए गए मैसेज को अधिक स्पष्ट रूप से दिखाने के लिए बदलाव कर रही है ताकि इस तरह की धोखाधड़ी रोकी जा सके। हालांकि, अभिषेक सिंह का कहना है कि फिलहाल एप में ऐसा कोई बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।
- उन्होंने सवाल उठाया कि Telegram अपने मेटाडाटा सिस्टम में ऐसा बदलाव क्यों नहीं करता जिससे एडिट होने के बाद जुड़े हुए ग्रुप्स में भी सही समय दिखाई दे।
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