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आखिर इस दिन ही क्यों की जाती है पीपल के पेड़ की पूजा

Sun, 12 Nov 2017 12:09 PM IST
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 12 Nov 2017 12:09 PM IST
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Why is the worship of Peepal tree on Saturday

शनिवार का दिन भगवान शनि का होता है। जिस किसी व्यक्ति की कुंडली में शनिदोष होता है वे लोग शनि मंदिर जाकर शनिदेव को तेल चढ़ाते हैं और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाते हैं। माना जाता है कि पीपल की पूजा करने से शनि महाराज प्रसन्न होते हैं और उन्हें शनि दोष के कुप्रभाव से मुक्ति मिल जाती है। लेकिन पीपल के वृक्ष की ही पूजा क्यों होती है, कभी आपने सोचा है। इसके पीछे बड़ा ही रोचक कारण है।


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Why is the worship of Peepal tree on Saturday

एक समय स्वर्ग पर असुरों का  राज था। कैटभ नाम का राक्षस पीपल वृक्ष का रूप धारण करके यज्ञ को नष्ट कर देता था। जब भी कोई ब्राह्मण पीपल के वृक्षों की टहनियां तोड़ने वृक्षों के पास जाता तो यह राक्षस उसे खा जाता। ऋषिगण समझ ही नहीं पा रहे थे कि ब्राह्मण कुमार कैसे गायब होते चले जा रहे हैं। ऋषिगण सूर्यपुत्र शनि देव के पास सहायता मांगने गए। 

Why is the worship of Peepal tree on Saturday

शनिदेव ब्राह्मण बनकर पीपल के वृक्ष के पास गए। कैटभ ने शनि महाराज को पकड़ लिया। इसके बाद शनि और कैटभ में युद्घ हुआ। शनि महाराज ने कैटभ का वध कर दिया। ऋषियों ने शनि की पूजा अर्चना की। शनि महाराज ने ऋषियों को कहा कि आप सभी भयमुक्त होकर शनिवार के दिन पीपल की पूजा करें इससे शनि की पीड़ा से मुक्त हो जाएगा।

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Why is the worship of Peepal tree on Saturday

दूसरी कथा के अनुसार भगवान शिव के अवतार थे ऋषि पिप्लाद। बाल्यावस्था में ही इनके माता-पिता की मृत्यु हो गई। बड़े होने इन्हें पता चला कि शनि की दशा के कारण ही इनके माता-पिता को मृत्यु का सामना करना पड़ा। इससे क्रोधित होकर पिप्लाद तपस्या करने बैठ गए। ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके उनसे ब्रह्मदंड मांगा और शनि देव की खोज में निकल पड़े। इन्होंने शनि देव को पीपल के वृक्ष पर बैठा देख तो उनके ऊपर ब्रह्मदंड से प्रहार किया। इससे शनि के दोनों पैर टूट गये।

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Why is the worship of Peepal tree on Saturday
शनि देव दुखी होकर भगवान शिव को पुकारने लगे। भगवान शिव ने आकर पिप्पलाद का क्रोध शांत किया और शनि की रक्षा की। इस दिन से ही शनि पिप्पलाद से भय खाने लगे। पिप्लाद का जन्म पीपल के वृक्ष के नीचे हुआ था और पीपल के पत्तों को खाकर इन्होंने तप किया था इसलिए ही पीपल की पूजा करने से शनि का अशुभ प्रभाव दूर होता है।
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