केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई सोमवार से खोल दिए गए हैं। यह हिन्दू धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केन्द्र माना जाता है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मान्यता के अनुसार, केदारनाथ धाम को भगवान शिव का आवास माना जाता है। कहते हैं इसका निर्माण पांडवों ने करवाया था। इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा भी सुनने को मिलती है जो इस प्रकार है-
2 of 6
महाभारत
- फोटो : सोशल मीडिया
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांचों पाण्डव भगवान श्री कृष्ण के साथ युद्ध की समीक्षा कर रहे थे। कृष्ण ने पाण्डवों से कहा कि युद्ध में भले ही जीत तुम्हारी हुई है, लेकिन तुम लोग गुरू और अपने बंधु-बांधवों को मारने के कारण पाप के भागी बन गये हो। इन पापों के कारण मुक्ति मिलना असंभव है। इस पर पाण्डवों ने पाप से मुक्ति पाने का उपाय पूछा।
3 of 6
भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
कृष्ण ने कहा कि इन पापों से सिर्फ महादेव ही मुक्ति दिला सकते हैं, अतः महादेव की शरण में जाओ। महादेव को जब इस बात की जानकारी मिली कि पाण्डव उनके पास आ रहे हैं तो वह सतर्क हो गये। पाण्डवों के सामने आने से बचने के लिए बार-बार स्थान परिवर्तन करने लगे क्योंकि महादेव पाण्डवों द्वारा राज्य पाने हेतु बंधु-बांधवों का वध करने के कारण उनसे नाराज थे।
4 of 6
केदारनाथ में गुफा
- फोटो : अमर उजाला
पाण्डव भी मन में ठान चुके थे कि हर हाल में उन्हें महादेव को पाना है और उनसे अपनी मुक्ति का मार्ग जानना है। महादेव का पीछा करते हुए पाण्डव केदरानाथ पहुंचे। महादेव ने देखा कि पाण्डव केदरानाथ आ गये हैं तो उनसे बचने के लिए उपाय ढूंढने लगे, तभी उनकी दृष्टि पशुओं के झुण्ड पर गयी और वह अपनी पहचान छुपाने के लिए बैल बनकर झुण्ड में शामिल हो गये।
5 of 6
भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
पाण्डवों के लिए पशुओं के झुण्ड में से महादेव को पहचानना कठिन हो गया। महाबली भीम तब दो पहाड़ों के बीच पांव रखकर खड़े हो गये। बाकि सभी भाईयों ने पशुओं को भीम के पैरों के बीच से भगाना शुरू कर दिया। सभी पशु भीम के पैरों के नीचे से गुजरकर भाग गये लेकिन महादेव को पैरों के बीच से निकलकर जाना अनुचित लगा और वह वहीं पर खड़े रह गये और पाण्डवों ने शिव को पहचान लिया।