नवरात्र का आज नवां दिन है लेकिन अष्टमी तिथि होने के कारण आज देवी के आठवें रूप महागौरी की पूजा हो रही है। इस दिन महागौरी की आराधना से सोम चक्र जागृत हो जाता है और इस चक्र से संबंधित सभी शक्तियां भक्तों को प्राप्त हो जाती है। महागौरी की उत्पत्ति की कथा मां पार्वती से ही जुड़ता है। कथा अनुसार पार्वती के रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बड़ी कठोर तपस्या की थी। इस कठोर तप के कारण उनकी देह क्षीण और वर्ण काला पड़ गया।
नवरात्रि का नौवां दिन, जानें पूजा की खास बातें
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ऐसे करें महागौरी की पूजा
श्वेत हस्ति समारूढ़ा, श्वेताम्बर धरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्याद् महादेव प्रमोददा।।
मां का शास्त्रीय विधि से पूजन करने वाले सभी रोगों से मुक्त हो जाते हैं। भगवती जगदंबा का पूजन कर रात्रि का जागरण करते हुए भजन-कीर्तन करना चाहिए। अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए या फिर 2 कन्याओं की पूजा करें। कन्याओं की आयु 2 साल से ऊपर और 10 साल से अधिक न हो। भोजन कराने के बाद कन्याओं को दक्षिणा देनी चाहिए।
अष्टमी पूजन का महत्व
अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा और आराधना ठीक उसी प्रकार कल्याणकारी है, जिस प्रकार अंधेरे में घिरे हुए संसार के लिए भगवान सूर्य की एक किरण। नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व नवमी की कल्याणप्रद, शुभबेला श्रद्धालु भक्तजनों को मनोवांछित फल प्रदान करती है। इनकी आराधना से शरीर में उत्पन्न नाना प्रकार के रोग, शोक, व्याधि आदि का अंत हो जाता है। इनका शक्ति विग्रह भक्तों को तुरंत और अमोघ फल देता है। इनकी उपासना से भक्त के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और मार्ग से भटका हुआ भी सन्मार्ग पर आ जाता है। इनकी कृपा से साधक सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है। उसे अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।
अष्टमी के दिन जरूर करें यह काम