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हरियाणा की बेटी ने मां के सपनों को किया पूरा, 23 साल की उम्र में पाया वो मुकाम कि देखती रह गई दुनिया

Tue, 31 Dec 2019 12:09 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Tue, 31 Dec 2019 12:09 PM IST
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women empowerment success story of bsf assistant commandant saumya
- फोटो : social media

भारत में बेटियों ने वो कारनामे करके दिखाए हैं कि समाज उन पर नाज करे। ऐसी ही सफलता की कहानी है सेना के परिवार की बेटी की। जिसको उसके सपनों की उड़ान दी मां ने। ये कहानी है हरियाणा के सोनीपत जिले में सेक्टर-12 की रहने वाली सौम्या की, जिसने बीएसएफ में प्रदेश में पहली और देश में तीसरी महिला सहायक कमांडेट पद प्राप्त किया है।


 
women empowerment success story of bsf assistant commandant saumya
- फोटो : social media

ये सफलता पाने वाली लड़की का नाम है सौम्या, जो कि मात्र 23 साल की है। सौम्या ने संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से आयोजित परीक्षा में पहले ही प्रयास में ये सफलता हासिल की है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान पाया है।


 
women empowerment success story of bsf assistant commandant saumya
- फोटो : social media

मध्यप्रदेश के ग्वालियर के टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी में आयोजित दीक्षांत समारोह में सौम्या को स्वार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह के बाद घर लौटीं सौम्या ने बताया कि उसे जल्द ही देश की सीमा पर अधिकारी के तौर पर नियुक्ति मिलेगी। फिलहाल वह ग्वालियर स्थित बीएसएफ अकादमी में ट्रेनिंग के लिए गईं हैं।


 
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women empowerment success story of bsf assistant commandant saumya
- फोटो : social media

सौम्या ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान भी उन्हें पहले बेस्ट ट्रेनी के लिए स्वार्ड ऑफ आनर व बेस्ट इन इंडोर सब्जेक्ट्स के लिए डीजी ट्राफी से बीएसएफ अकादमी के निदेशक यूसी सारंगी द्वारा सम्मानित किया गया। सौम्या बचपन से ही सेना व आर्म्ड फोर्स में जाने की इच्छुक थी। उन्होंने वर्ष 2016 में दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय मुरथल से कंप्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग में बीटेक किया है।


 
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women empowerment success story of bsf assistant commandant saumya
- फोटो : social media

सौम्या के पिता कुलदीप सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भिगान में प्राचार्य के पद पर तैनात हैं और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हैं। उनकी माता मंजू चौहान भी सोनीपत के एक निजी स्कूल में अध्यापिका हैं। उनके ताऊ रिटायर्ड कैप्टन प्रेम सिंह चौहान को भी वीरता के लिए राष्ट्रपति द्वारा वीर चक्र दिया जा चुका है। सौम्या के परिवार के अधिकतर लोग सेना में हैं और उसने भी सेना में जाने की प्रेरणा उन्हीं से ली है।

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