लक्ष्मी कुमारी
महिलाओं की आदत होती है कि वे एक साथ कई काम करना चाहती हैं, ताकि कुछ देर बैठकर आराम कर सकें। लेकिन यह संभव नहीं हो पाता। एक काम खत्म होने के बाद दूसरा सामने आ जाता है और फिर तीसरा। इस कारण वे एक साथ कई काम करने लगती हैं, लेकिन एक साथ कई काम करने की यह आदत कई बार उन्हें परेशानी में भी डाल देती है।
सुबह के छह बजे थे। बच्चे सोए हुए थे, पति भी गहरी नींद में थे। नींद तो वैसे मिसेज वर्मा को भी आ रही थी, लेकिन उन्हें उठना ही था। नहीं तो नाश्ता और ऑफिस के लिए लंच नहीं बन पाएगा। धोने के लिए मशीन में कपड़े भी डालने थे। बच्चे की यूनिफॉर्म पर इस्त्री करनी थी। मिसेज वर्मा के लिए सुबह छह-साढ़े छह से लेकर आठ बजे तक घर एक युद्ध क्षेत्र बना रहता है। इस युद्ध क्षेत्र में विभिन्न कामों के साथ प्रतिदिन वह अकेली लड़ती हैं, जिनमें उन्हें जीतना होता है, क्योंकि हारने का कोई विकल्प नहीं है।
वैसे मिसेज वर्मा अकेली नहीं हैं, जिन्हें एक समय में कई-कई काम एक साथ करने पड़ते हैं। शहरी मध्य वर्ग की कामकाजी महिलाएं रोजाना ही एक साथ कई काम करती हैं, जिसको मल्टीटास्किंग कहा जाता है। आप किसी भी महिला से पूछ लीजिए, जवाब मिलेगा, “यह तो मेरा रोज का काम है। इससे बचने का कोई विकल्प नहीं है।”
पुरुष भी मल्टीटास्किंग होते हैं, लेकिन महिलाओं पर समय से ऑफिस पहुंचने के साथ ही पति और बच्चों को सही समय पर ऑफिस तथा स्कूल भेजने का अतिरिक्त दबाव होता है। यह दबाव एक समय के बाद बढ़ता जाता है और धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक सेहत को भी प्रभावित करने लगता है।
आज की तेज-रफ्तार दुनिया में एक समय पर कई-कई काम करना सामान्य हो गया है, खासकर उन महिलाओं के लिए, जो कई जिम्मेदारियों को संभालती हैं। चाहे वे कामकाजी महिलाएं हों या गृहिणियां। घरेलू कार्यों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने का दबाव अक्सर महिलाओं को मल्टीटास्किंग की ओर ले जाता है। पहली नजर में यह कई-कई कार्यों को एक साथ संभालने का एक बेहतर तरीका लगता है, लेकिन शोध बताते हैं कि मल्टीटास्किंग के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। यदि आप भी मल्टीटास्किंग हैं तो इसके अच्छे-बुरे प्रभावों और उन्हें व्यवस्थित करने के तरीकों को जान लेना जरूरी है।
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बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर
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क्या यह एक विशेषता है?
एक साथ कई काम करना अक्सर एक विशेषता मानी जाती है, हालांकि वैज्ञानिक अध्ययन इस मिथक को खारिज करते हैं। अध्ययन बताते हैं कि मानव मस्तिष्क को एक साथ कई कार्य करने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है। यदि हम एक साथ कई कार्य करते हैं तो वह वास्तव में टास्क-स्विचिंग है, यानी एक काम को करते-करते दूसरे को शुरू कर देना और कोई तीसरा काम भी साथ में करते रहना। इससे आपके मस्तिष्क को भी स्विच करना पड़ता है, जिसका आपके कौशल और कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव मस्तिष्क की समग्र क्षमता को नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए मल्टीटास्किंग को केवल विशेषता नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कार्यों के बीच इस निरंतर स्विचिंग से कार्यक्षमता कम हो सकती है और तनाव बढ़ सकता है।
बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर
एक साथ कई कार्य करना तनाव बढ़ा सकता है, क्योंकि मस्तिष्क टास्क-स्विच करने के दौरान टास्क के साथ कार्य करते रहने के लिए संघर्ष करता है। तनाव जब बढ़कर दीर्घकालिक हो जाता है तो कोर्टिसोल नाम का हार्मोन रिलीज करता है, जो अधिक थकान, उच्च रक्तचाप और कमजोर प्रतिरक्षा को जन्म दे सकता है। एक साथ दिमाग को कई कार्यों में लगाने वाली महिलाओं को यह बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है। वहीं इससे उत्पन्न तनाव और मानसिक थकान नींद के पैटर्न को बाधित कर सकते हैं, जिससे आपको अपने मन-मस्तिष्क को शांत करने में कठिनाई हो सकती है।
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कैसे करें एक साथ कई काम
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निजी और पेशेवर जीवन पर असर
ऐसा करना आपकी स्मृति, ध्यान और रोजमर्रा के कार्यों को बाधित करता है। इससे सूचना को एकत्रित कर ध्यान केंद्रित करने और संसाधित करने की मस्तिष्क की क्षमता कम हो जाती है। नतीजा यह होता है कि जो काम कल तक आप आसानी से और सही से कर लेती थीं, उसमें बार-बार गलतियां होने लगती हैं। इन गलतियों से तरह-तरह की समस्याएं पैदा होने लगती हैं, जिनको आप प्रभावी ढंग से हल भी नहीं कर पातीं। कई कार्यों को एक साथ करने का निरंतर दबाव चिंता और अवसाद बढ़ाने लगता है।
इससे आपके मन में निराशा और चिंता की भावनाएं जन्म ले सकती हैं। जो महिलाएं मांग-आपूर्ति संबंधी कार्यक्षेत्र में हैं या जो घरेलू कामकाज करती हैं, वे शारीरिक और भावनात्मक रूप से अधिक थकावट का शिकार होती हैं, क्योंकि उन्हें इन दोनों ही रूपों में सही सहयोग नहीं मिल पाता। इसका व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन, दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
कैसे करें एक साथ कई काम
पेशे से दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा दत्ता कहती हैं,
“एक मां होने के नाते थोड़ा मुश्किल है घर और ऑफिस को एक साथ मैनेज करना, लेकिन कहते हैं न ‘जब सबका हो साथ तो डरने की क्या बात।’ फिर भी ढेर सारी परेशानियों का सामना करती हूं, लेकिन मैं इन सभी कामों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लेती हूं। किस काम को कितना समय देना है, यह भी तय कर लेती हूं। दूसरे, मैं अपने घर के सदस्यों से भी मदद लेती हूं। मेरे पति और बेटी, दोनों मेरे कामों में पूरा सहयोग करते हैं। इससे मेरी बेटी आत्मनिर्भर होना सीख रही है। साथ ही मैं अपने लिए समय भी निकाल लेती हूं, जो मेरी फिजिकल और मेंटल हेल्थ, दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”
माना कि मल्टीटास्किंग जरूरी है, खासकर महिलाओं के लिए, लेकिन आपको इसे करने के सही तरीके पता होने चाहिए, वरना आपको परेशानी हो सकती है।
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शारीरिक गतिविधियां और आराम
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समय प्रबंधन और सिंगल-टास्किंग
कार्यों को प्राथमिकता देना और प्रभावी समय प्रबंधन मल्टीटास्किंग की आवश्यकता को कम कर सकता है। इसके लिए आप एक दैनिक शेड्यूल बना सकती हैं, जिसमें प्रत्येक कार्य के लिए विशिष्ट समय निर्धारित हो। इस से ध्यान केंद्रित होता है और आप बेहतर तरीके से कार्य कर पाती हैं। सिंगल-टास्किंग या एक समय में एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करना आप की कार्य दक्षता को बढ़ा सकता है और कार्य की गुणवत्ता में सुधार करता है।
शारीरिक गतिविधियां और आराम
माइंडफुलनेस अभ्यास, जैसे कि ध्यान और गहरी सांस लेने की तकनीक कार्य पर केंद्रित रहने में मदद करती है। ये नियमित शारीरिक गतिविधियां मल्टीटास्किंग से जुड़े शारीरिक और मानसिक तनाव का मुकाबला करने में मदद करती हैं। व्यायाम एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज करता है, जो प्राकृतिक मूड लिफ्टर होते हैं। योग को जीवन में शामिल करना शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक शांति को बढ़ावा दे सकता है। इसलिए मल्टीटास्किंग के दौरान या बाद में इसे दिनचर्या में अवश्य शामिल करें।
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इजी मल्टीटास्किंग है सही विकल्प
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सीमाओं का निर्धारण
काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच स्पष्ट सीमाएं स्थापित करना महत्वपूर्ण है। आखिर किसी भी कार्य की एक सीमा तो होनी ही चाहिए। अक्सर महिलाएं सब कुछ खुद ही करने की जिम्मेदारी महसूस करती हैं, जिससे तनाव और थकावट बढ़ सकती है। कार्यों का वितरण, चाहे ऑफिस हो या घर का, आवश्यकता पड़ने पर मदद मांगना गलत नहीं है। मदद मांगना बोझ को कम करता है। इसमें परिवार के सदस्यों के साथ घरेलू जिम्मेदारियों को साझा करना या विशिष्ट कार्यों के लिए पेशेवर मदद लेना शामिल है। इसलिए हो सके तो कार्य को बांटे और मदद भी लें।
मल्टीटास्किंग होना पूरी तरह गलत नहीं है, हालांकि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, दोनों पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है, विशेष रूप से उन महिलाओं पर, जो कई भूमिकाएं निभाती हैं। इन प्रभावों को समझकर और कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए सही तरीके अपनाने होंगे, जिससे आप अपने स्वास्थ्य और जीवन को बेहतर बना सकती हैं। प्राथमिकता, माइंडफुलनेस, शारीरिक गतिविधि, कार्य का वितरण, सीमाएं निर्धारित करना और स्वस्थ जीवन-शैली को अपनाना मल्टीटास्किंग के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने की कुंजी है।
इजी मल्टीटास्किंग है सही विकल्प
दिल्ली के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में हृदय रोग विभाग के निदेशक, डॉ. मोहित दयाल गुप्ता बताते हैं, एक समय में सिर्फ एक काम पर ध्यान केंद्रित करने की तुलना में एक साथ दो या ज्यादा काम करना मुश्किल है, लेकिन दो प्रतिशत से भी कम महिलाएं इस मल्टीटास्किंग को कुशलता से करने में सक्षम होती हैं। एक साथ कई कार्य करने से मस्तिष्क और स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ते हैं। यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है, क्रोनिक स्ट्रेस और थकान सिंड्रोम को बढ़ता है, अवसाद की स्थिति पैदा करता है और स्मृति पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए आपको ध्यान भटकाने वाली चीजों को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर एक-एक करके पूरा करें। वहीं अव्यवस्थित घर या कार्यस्थल तनाव को बढ़ाता है और आपको एक साथ कई कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए अपने स्थान को व्यवस्थित और साफ-सुथरा रखें। योग एवं ध्यान करें। यह मन को शांति और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है। ध्यान से मस्तिष्क को फिर से एकाग्रचित रखने में मदद मिलती है। आप सरल मल्टीटास्किंग करें, यानी किसी समस्या को सुलझाते समय टहलने जैसे सरल कार्यों को एक साथ करना आसान है और इससे कोई नुकसान भी नहीं होता है।
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