बाघ ने पति को मारा तो बन गई 'बाघ विधवा', अब तूफान ने छीन लिया रोजगार
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पश्चिम बंगाल के सुंदरबन की बहुत सी महिलाओं की ये कहानी आम है। पति को जब बाघ ने मार डाला तो ये विधवाएं बाघ विधवा के नाम से जानी जाने लगी। अब इन विधवाओं की जिंदगी में तूफान मुसीबत बनकर आया है। सुंदरबन के जंगलों के आसपास की बस्ती में जिंदगी आसान नही हैं। यहां पर हमेशा जंगली जानवरों खासतौर पर बाघ का खतरा मंडराता रहता है। यहां पर ऐसी महिलाओं की जिनके पति को बाघ ने मारा है अच्छी खासी तादाद है। जिसकी वजह से इन विधवाओं को 'बाघ विधवा' के नाम से जाना जाता है।
ऐसी ही कहानी है बाघ विधवा मंजुला की, जिसे दो दिन बाद बड़ी मुश्किल के कुछ खाने को नसीब हुआ था वो भी मुठ्ठीभर मुरमुरे और गुड़। अम्फान तूफान में अपनी जिंदगी के गुजर-बसर का एकमात्र सहारा मछलियों का तालाब बाढ़ के पानी से भर गया था। जिसकी वजह से अब उसकी कमाई का ये जरिया भी खो चुका है।
मंजुला ने बताया कि पहले भी तूफान ने ही उनकी जिंदगी को बदल दिया था। चक्रवात आइला की वजह से खेत बर्बाद हो गए तो मजबूरन पति को मछली पकड़ने का काम शुरू करना पड़ा। इसी दौरान बाघ ने हमला कर उनकी जान ले ली। काफी संघर्ष के बाद एक एनजीओ की मदद से मछली पालन के लिए एक तालाब के इस्तेमाल की अनुमति मिली थी। अब अम्फान तूफान उसको भी ले गया। गोसाबा इलाके के सतजेलिया प्रखंड की 100 से ज्यादा ‘बाघ विधवाओं’ ने बीते 15 वर्षों में अपने पतियों को बाघ की वजह से खो दिया और इन सबकी कहानी कमोबेश एक जैसी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सुंदरबन इलाके में 2010 से 2017 के बीच बाघ के हमलों में कम से कम 52 लोगों की जान गई है। शीबा सरदार (40) सतजेलिया की रहने वाली एक अन्य बाघ विधवा हैं। उसे चक्रवात या इंसान-बाघ के संघर्ष से ज्यादा भूख का डर है। वह मुर्गी पालन का काम करती थी। तूफान में 100 मुर्गियां और 80 चूजे बह गए। वह बताती है कि सुंदरबन में जब भी कोई आपदा आती है तो हमें फिर से नई शुरुआत करनी पड़ती है।

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