यूं तो महिलाएं दुनिया के हर क्षेत्र में ख़ुद को साबित कर रही हैं और अपनी क़ामयाबी के झंडे गाड़ रही हैं।लेकिन अभी भी बहुत सारे मोर्चे ऐसे हैं, जिनसे उन्हें दूर रखा गया है। कल तक नेवी में किसी महिला का पायलट होना एक दूर की कौड़ी थी लेकिन अब ये सच्चाई है और इसे साबित किया है बिहार के मुजफ्फरपुर की शिवांगी सिंह ने।
शिवांगी सिंह: भारतीय नौसेना में पहली महिला पायलट
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इस सवाल पर शिवांगी कहती हैं, "मैं 10 साल की थी जब हमारे गाँव में एक नेता हेलिकॉप्टर से आए थे सब उन्हें देखने जा रहे थे मैं भी अपने नाना जी के साथ गई और तब मैंने हेलिकॉप्टर को उड़ते हुए देखा और सोचा कि मैं भी पायलट बनूँगी।" शिवांगी मुजफ्फरपुर से पढ़ी हैं। बचपन से ही शिवांगी आसमान में उड़ना चाहती थीं, लेकिन नौसेना के बारे में उन्हें बहुत कुछ नहीं पता था।
शिवांगी बताती हैं, "जब फोर्थ ईयर में यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम के लिए नेवी आई थी, तो उनकी यूनिफार्म देखकर मैं बहुत ज्यादा अट्रैक्ट हो गईं। फिर मुझे पता लगा कि बतौर पायलट नेवी की वूमेन एंट्री शुरू हुई है। तभी मैंने सोच लिया कि मैं इस क्षेत्र में जाऊंगी।" उन्होंने बताया कि वह मणिपाल इंस्टिट्यूट से एमटेक की पढ़ाई करते हुए एसएसबी की परीक्षा दी लेकिन वो उसमें असफल रहीं।
उन्होंने मालवीय नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एमटेक के कोर्स में दाखिला लिया और 2018 में एक बार फिर उन्होंने एसएसबी का एग्जाम दिया। जिसमें वो सफल रहीं। शिवांगी ने पिछले छह महीने कोच्चि में इंडियन नेवल एयर स्क्वॉड्रन 550 के साथ डोर्नियर 228 एयरक्राफ्ट को उड़ाना सीखा है।
फिलहाल वो नौसेना में डोर्नियर 228 उड़ाएंगी, ये एयरक्राफ्ट नौसेना में पेट्रोलिंग के काम आता है। लेकिन नौसेना में महिलाओं को अब भी जहाज पर जाने की मनाही है। इस सवाल पर शिवांगी कहती हैं, "अभी भले ही महिलाएं नौसेना में जहाज पर नहीं जा सकतीं, लेकिन आने वाले समय में ये भी मौके आएंगे जिन्हें मैं हासिल करना चाहूंगी।" शिवांगी नौसेना में ट्रेनिंग के अनुभवों के बारे में बताती हैं, "जब हमारी सोलो स्टार्ट हुई यानी जब हमें जहाज अकेले ले जाना होता है, उस वक्त मुझे बहुत डर लगा कि पता नहीं मैं इसे अकेले ले जा पाऊंगी या नहीं। लेकिन टेक ऑफ करने के बाद सारा डर चला गया। वो एक अलग ही अनुभव होता है जब आप ऊपर से देखते हो पूरी दुनिया छोटी दिखती है।"

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