इंदिरा गांधी न केवल भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, बल्कि वह एक महान नेता भी थीं। दूरदर्शिता, बुद्धिमता और विचारों के कारण उन्हें आज भी याद किया जाता है। इंदिरा गांधी का व्यक्तित्व पिता जवाहर लाल नेहरू की बेटी के रूप में कम और एक प्रधानमंत्री, आयरन लेडी और कांग्रेस की विरासत को संभालने वाली महिला के रूप में ज्यादा जाना जाता है। इंदिरा के इस शक्तिशाली व्यक्तित्व की नींव उनके पिता जवाहर लाल नेहरू ने ही रखी थी। अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में जवाहर लाल नेहरू ने अपनी बेटी को निजी सहायक के रूप में चुन कर राजनीति के गुर सिखाए थे। आइए जानते हैं इंदिरा गांधी के पीए से पीएम बनने तक का सफर:
इंदिरा ने अपने पिता से सीखे थे राजनीति के गुर, नेहरू की पीए से देश के पीएम तक ऐसा रहा सफर
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जब जवाहर लाल नेहरू ने देश के प्रधानमंत्री का पदभार संभाला था तो उस समय इंदिरा नेहरू एक उज्ज्वल चरित्र और बुद्धि वाली युवा महिला थीं। उनके पिता ने इंदिरा को अपने निजी सहायक के रूप में चुनकर उन्हें सबसे कुशल नेतृत्व में शासन करने की कला सिखाई थी।
इंदिरा गांधी का कार्यकाल भले ही आज उनके इमरजेंसी के दौर को लगाए जाने के लिए याद किया जाता है लेकिन देश की पहली महिला प्रधानमंत्री ने देश हित में कई सारे फैसले लिए। पाकिस्तान के साथ युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण भी शामिल था।
इंदिरा गांधी अपने अंतर्राष्ट्रीय सहायकों से मैत्रीपूर्ण संबंधों को बनाकर रखती थीं। अमेरिका से अच्छे संबंधों के न होने पर भी संयुक्त राज्य अमेरिका की अध्यक्ष लिंडा जानसन के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखे, जो अक्सर उनसे मिलने जाती थीं और उनके द्वारा आयोजित रात्रिभोज में सम्मिलित होती थीं।
अपने पिता और संपूर्ण राष्ट्र को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष करते देख इंदिरा ने एक अत्यंत दृढ़ चरित्र विकसित किया। कम उम्र से ही उन्होंने ब्रिटिश सामानों का बहिष्कार करना सीख लिया था। क्योंकि उन्होंने अनुभव किया कि उन सामानों को स्वीकार करने से ब्रिटिश अर्थव्यवस्था ताकतवर होती है। वह अपने स्वयं के खिलौने, जो इंग्लैंड में बने थे उन्हें जलाने के लिए जानी जाती हैं।

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