बात 2009 की है। महिला वर्ल्ड कप में भारत और ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला चल रहा था। बैंटिंग करने के लिए टीम की नई और युवा खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर की बारी आठवें या नौंवे नंबर पर आनी थी लेकिन कप्तान अंजुम चोपड़ा ने अचानक उन्हें पहले भेजने का फ़ैसला किया। हरमन ने 8 गेंदों में 19 रन ठोके जिसमें एक छक्का भी शामिल था। वो सिक्सर इतना जोरदार था कि मैच के बाद हरमन को डोप टेस्ट के लिए बुलाया गया कि एक नई खिलाड़ी ऐसा शॉट कैसे लगा सकती है। वही हरमनप्रीत आज टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की कप्तान हैं, और मैदान पर चौके-छक्के लगाना उनकी पहचान बन चुकी है। हरमन का सपना महिला टी-20 वर्ल्ड कप जीतना है जो 21 फरवरी से शुरु हो रहा है जहां भारत का मुकाबला मेजबान ऑस्ट्रेलिया से है। टी-20 में 100 मैच खेलने वाली वो भारत की पहली खिलाड़ी हैं।
हरमनप्रीत: छक्का लगाने पर जिन्हें डोप टेस्ट कराना पड़ा
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आठ मार्च 1989 को पंजाब के मोगा में जन्मीं हरमन की बात करें तो बचपन से ही उन्हें क्रिकेट का शौक था। हरमन के पिता हरमिंदर सिंह भुल्लर भी क्रिकेट खेलते थे और वो अपने पिता को चौके-छक्के लगाते देखती थीं। बस वहीं से उन्हें बाउंड्री लगाने का चस्का लग गया। मोगा में लड़कियां खेल के मैदान पर कम ही दिखतीं और वो लड़कों के साथ ही क्रिकेट खेलतीं। जब नजदीकी स्कूल के एक कोच कमलदीप सिंह सोढ़ी ने मोगा में हरमन को लड़कों के साथ खेलते हुए देखा और उन्हें गेंदबाजों की धुनाई करते देखा तो वो दसवीं के बाद हरमन को अपने स्कूल ले गए। और वहां से शुरु हुई कोचिंग और क्रिकेट का नया सफर। छोटे कस्बे में लड़की का क्रिकेट खेलना रिश्तेदारों का नागवार गुजरता था। लेकिन बीबीसी से एक साल पहले हुई बातचीत में हरमन के पिता ने बताया था कि हरमनप्रीत की उपलब्धि ने लोगों का मुंह बंद कर दिया। पंजाब और रेलवे के लिए खेलने के बाद 19 साल की उम्र में 2009 में हरमन ने वनडे में पाकिस्तान के ख़िलाफ डेब्यू किया।आज भले ही लोग हरमन को उनकी आतिशी बैटिंग के लिए जानते हों लेकिन जब वो टीम में आई थीं तो दुबली पतली हरमन को मीडियम पेस गेंदबाजी के लिए टीम में जगह मिली थी।
मुंबई में वेस्ट्रन रेलवे में काम करते हुए हरमन ने अपनी बल्लेबाज़ी और फिटनेस पर खूब काम किया। जल्द ही वो अपने पसंदीदा क्रिकेट खिलाड़ी वीरेंदर सहवाग की तरह भारतीय बैटिंग की रीढ़ बन गईं। देखते-देखते 2016 में हरमन को टी-20 टीम की कप्तानी की ज़िम्मेदारी दे दी गई। बतौर कप्तान और खिलाड़ी हरमन की ख़ूबी रही है कि वो रिस्क लेने से नहीं डरतीं- चाहे नए खिलाड़ियों को मौका देना हो या खुद की बैटिंग हो। आपको 2017 वनडे वर्ल्ड कप का सेमीफ़ाइनल याद होगा जहां भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से था जो मजबूत टीम थी। हरमनप्रीत ने 115 गेंदों में नाबाद 171 रन बनाए थे जिसमें सात छक्के और 20 चौके शामिल थे। लोगों ने उनकी तुलना कपिल देव से की और हरमन रातों रात स्टार बन गईं। और ये तब जब हरमन चोटिल हो गई थीं और उनकी उंगली, कलाई और कंधे पर दिक्कत थी।
क्रिकेट के अलावा हरमन ने वो किया जो कम ही महिला क्रिकेट खिलाड़ी कर पाई थीं। कई बड़े ब्रैंड ने उन्हें अपना एम्बेसडर बनाया। हमेशा पुरुष खिलाड़ियों को लेने वाली सीएट कंपनी ने पहली बार 2018 में किसी महिला क्रिकेटर को अपना चेहरा बनाया।
2018 में आईसीसी ने हरमन को टी-20 टीम का कप्तान चुना।चाहे पुरुष हो या महिला, हरमन भारत की पहली क्रिकेट खिलाड़ी हैं जिन्हें ऑस्ट्रेलिया में बिग बैश लीग के लिए साइन किया गया। 2017 में इंग्लैंड में सुपर लीग में चुनी जाने वाली भी वो पहली भारतीय हैं। 2018 के टी-20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ हरमन ने शतक लगाया था जो टी-20 मैच में किसी भारतीय महिला की पहली सेंचुरी थी। हालांकि हरमन को लेकर विवाद भी हो चुके हैं। चाहे मिताली राज से अनबन की बात हो या वो घटना जब फर्जी डिग्री के आरोप में उन्हें पंजाब पुलिस में डीएसीपी के पद से हटा दिया गया हालांकि हरमन इन आरोपों से इंकार करती आई हैं।

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