भारत की इन महिलाओं ने देश की सेना में शामिल होकर न केवल देश का नाम रोशन किया बल्कि महिलाओं के लिए भी एक उदाहरण पेश किया कि अगर इंसान चाहे तो राह की हर मुश्किल को पार कर अपनी मंजिल पा सकता है। ऐसी ही भारतीय सेना में शामिल होने वाली महिलाओं की कहानी, जिन्होंने सर्वोच्च सम्मान हासिल कर अपना और परिवार का नाम रोश किया।
इन महिलाओं ने सेना में हासिल किया पहली बार ये मुकाम, मेडल जीत रोशन किया देश का नाम
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पंजाबी परिवार में जन्मी और विभाजन के बाद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में आकर बसीं पुनीता अरोड़ा ने सशस्त्र सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया। वो भारत की पहली महिला हैं जिनको ये पद मिला है। इसके अलावा पुनीता अरोड़ा को भारतीय नौ सेना में वाइस एडमिरल का पद भी मिल चुका है। पुनीता अरोड़ा 2004 में आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज इस्टीट्यूट की संचालन करने वाली पहली महिला भी हैं।
भारतीय वायु सेना में पहली महिला एयर मार्शल का पद पाने का गौरव पद्मावती बंदोपाध्याय को मिला। पद्मावती बंदोपाध्याय को 1971 के भारत-पाक युद्ध में अकल्पनीय योगदान के लिए विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा गया था। पद्मावती ने भारतीय वायु सेना में 1968 में शामिल हुईं थीं। इन्होंने पहली एविएशन मेडिसिन स्पेशलिस्ट का दर्जा भी हासिल किया था।
फरवरी 2011 में देश की पहली महिला अफसर होने का सम्मान हासिल किया जिन्होंने अपने शौर्य के लिए सेना मेडल मिला। 26 फरवरी 2010 को अफगानिस्तान के काबुल में आतंकवादियों के भारतीय दूतावास पर हुए हमले में मिताली ने कई घायलों और सेना के कर्मियों को बचाया था। भारत की ये बहादुर बेटी सेना में वर्ष 2000 में शामिल हुई थी। इनके शौर्य से प्रभावित होकर देश के संवेदशील जगहों पर भी तैनात किया गया था।
पिछले साल आर्मी की सबसे पुरानी रेजिमेंट असम राइफल्स की महिला टुकड़ी ने गणतंत्र दिवस पर परेड किया था। इस रेजिमेंट में पहली बार महिलाओं की भर्ती 2015 में शुरू की गई थी और अप्रैल 2016 में 124 महिलाओं का बैच पास हुआ था। गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार शामिल हुई इस टुकड़ी का नेतृत्व मेजर खूशबू ने किया था।

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