Ram Mandir Pran Pratishtha: अयोध्या के राम मंदिर में रामलला विराज चुके हैं। श्रीराम के प्रथम दर्शन हो गए हैं। इससे पहले मंदिर के गर्भगृह में मोदी पहुंचे और उन्होंने प्राण-प्रतिष्ठा पूजा के लिए संकल्प लिया। पीएम ने ही रामलला के आंख से पट्टी खोली और हाथ में कमल का फूल लेकर पूजन किया। रामलला को फूलों के हार से सुसज्जित किया गया है। रामलला पीतांबर से सुशोभित हैं। उन्होंने हाथों में सोने के धनुष-बाण धारण किया है। साथ ही सिर पर स्वर्ण मुकुट भी धारण किया है। श्री राम की मूर्ति अभिभूत कर देने वाली है। उनके चारों और कुछ प्रतीक बनाए गए है जिनसे इनको ऊर्जा प्राप्त होगी। आइए जानते है उन खास चिह्नों के बारे में।
Pran Pratishtha: गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई सम्पन्न, यहां देखें खूबसूरत तस्वीरें
भगवान सूर्य नारायण का प्रतीक
श्री राम लला के मस्तक के ठीक ऊपर भगवान सूर्य नारायण का प्रतीक है। सूर्य जगत की आत्मा है और श्री राम सूर्यवंशी है इसलिए उनके मस्तक के ऊपर आशीर्वाद के रूप में सूर्य नारायण को रखा गया है।
ॐ और स्वस्तिक
मूर्ति के दाएं ओर ॐ और स्वस्तिक का चिह्न है। शिवपुराण विद्येश्वर संहिता के अनुसार शिव के पांच मुख है और ॐ उनके मुख से निकली पहली ध्वनि है। शब्द सिद्धि के लिए ॐ बेहद ज़रूरी है इसलिए मूर्तिकार ने ॐ के प्रतीक को बनाया। इसके बाद स्वास्तिक को भी जगह दी जिसके बिना कोई शुभ कार्य नहीं हो सकता। स्वास्तिक को हिन्दू धर्म में गणेश जी का प्रतीक माना गया है इसलिए विघ्नहर्ता के रूप में स्वास्तिक विराजमान हुआ है।
चक्र और गदा
इसके बाद विग्रह के बायीं ओर देखे तो चक्र और गदा है। इसका सीधा सम्बन्ध विष्णु से है। दरअसल विष्णु को देवताओं का नायक कहा गया है और देवासुर संग्राम में विष्णु ही देवताओं की मदद करते है। श्री राम उन्हीं विष्णु के अवतार हैं और वो चक्र गदा को धारण करते हैं। इसलिए आसुरी शक्तियों का नाश करने के लिए इस विग्रह को चक्र गदा से आभामंडित किया गया है।
श्री विष्णु के दशावतार
अगर और ध्यान से देखे तो दाएं और बाएं दोनों ओर श्री विष्णु के 10 अवतारों के प्रतीकों को उकेरा गया है। मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि अवतार को दोनों ओर जगह दी गई है।