हेलमेट की दास्तां, कैसे बना बल्लेबाजों के लिए खास!
बल्लेबाज फिल ह्यूज की मौत हेलमेट पहने होने के बावजूद सिर में चोट लगने हो गई। बल्लेबाजी के दौरान उनके सिर पर लगी चोट के लिए पुराने हेलमेट के इस्तेमाल का जिम्मेदार माना गया। हेलमेट बनाने वाली कंपनी ने कहा कि उन्होंने नया वाला हेलमेट नहीं पहना था। लेकिन आज से 3 दशक पहले तक क्रिकेटर हेलमेट पहनकर बल्लेबाजी नहीं करते थे।
हेलमेट की दास्तां, कैसे बना बल्लेबाजों के लिए खास!
फिल ह्यूज की मौत के लिए पुराने हेलमेट के इस्तेमाल को जिम्मेदार माना जा रहा हो लेकिन 70 के दशक तक कोई भी बल्लेबाज हेलमेट का प्रयोग ही नहीं करता था। यह दौर वह था जब वेस्टइंडीज के खूंखार कहे जाने वाले गेंदबाजों की तूती बोलती थी और बल्लेबाजों क्रीज पर उनका सामना बेहद जीवटता और बहादुरी के साथ करते थे। लेकिन अब हेलमेट आज के बल्लेबाजों की जरूरत बन चुके हैं हम आपको बताते हैं कि हेलमेट की शुरुआत के बारे में।
हेलमेट की दास्तां, कैसे बना बल्लेबाजों के लिए खास!
भारत के महानतम बल्लेबाज सुनील गावस्कर के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने करियर में कभी भी हेलमेट नहीं पहना। हालांकि उन्होंने 1986 में इंग्लैंड के खिलाफ एक वनडे मैच में प्रायोगिक तौर पर सिर को सुरक्षा देने वाला कैप (हेडगियर) पहना। लेकिन इसे हेलमेट नहीं कहा जा सकता।
हेलमेट की दास्तां, कैसे बना बल्लेबाजों के लिए खास!
'लिटिल मास्टर' सुनील गावस्कर की लंबाई बहुत अच्छी नहीं थी लेकिन वह क्रीज पर जियोल गार्नर, माइकल होल्डिंग और एंडी राबर्ट्स जैसे लंबे-लंबे कैरेबियाई तेज गेंदबाजों का डटकर सामना करने में सक्षम थे। उन्होंने उनके खिलाफ कई बड़ी पारियां भी खेली। लेकिन उन्होंने हेलमेट कभी नहीं लगाए। हालांकि वह गोल टोपी लगाकर जरूर बल्लेबाजी करते थे।
हेलमेट की दास्तां, कैसे बना बल्लेबाजों के लिए खास!
1978 में ली गई इस तस्वीर में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर इयान डेविस ने वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट के दौरान इस तरह का हेलमेट पहना। साथ ही उन्होंने ग्लब्स, पैड और बॉक्स के साथ हेलमेट पहन रखा है। इसके अलावा उन्होंने सीने, जांघ और कोहनी की सुरक्षा के लिए पैडिंग भी कर रखी है।