अफगानिस्तान का पठान बना मुंबई का डॉन, जानिए कौन
हाजी मस्तान का खासमखास, पठानों का मसीहा, जरूरतमंदों का मददगार, मायानगरी का दूसरा सबसे बड़ा डॉन। जानिए कौन?
अफगानिस्तान का पठान बना मुंबई का डॉन, जानिए कौन
तारीख 19, फरवरी का महीना, साल 1911... इधर देश ब्रिटिश हुकूमत के चंगुल से छूटने को छटपटा रहा था, उधर अफगानिस्तान में भारत के भविष्य का माफिया जन्म ले चुका था। जिसे दुनिया ने करीम लाला के नाम से जाना।
अफगानिस्तान का पठान बना मुंबई का डॉन, जानिए कौन
करीब तीन दशक बाद अफगानिस्तान के कुनार प्रांत का पठान मुंबई के बंदरगाह पर कुली की नौकरी करने पहुंचा। जहां उसकी मुलाकात हुई मस्तान हैदर मिर्जा और वरदराजन मुदलियार से। मिर्जा और मुदलियार पहले ही समंदर की लहरों पर अंजाम दिए जाने वाले अवैध इशारों को बखूबी परखने में माहिर हो गए थे, अब उनका तीसरा साथी भी उनके साथ जरायम के रास्ते पर चल पड़ा।
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तीनों की तिकड़ी ने मायानगरी में शराब और जुंए के अनगिनत अड्डे खोले, समंदर के रास्ते चरस और सोने की तस्करी को अंजाम दिया। अपने अवैध धंधों से इतनी दौलत इकट्ठा की, कि कानून के सिपहसालारों और सियासत के पैरोकारों को भी खरीदने लगे।
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मस्तान हैदर मिर्जा या दूसरे किसी भी माफिया के सामने करीम लाला की हैसियत कम नहीं आंकी गई। पुस्तैनी पठानी लिबास में रहने वाले करीम लाला ने मुंबई में इस कदर अपना कब्जा किया कि हर कोने में अपने आदमी फैला दिए।