मजदूरी करके कमाए 500 रुपए, उससे खड़ा किया अरबों का कारोबार
पान पराग पान मसाला के संस्थापक मनसुख भाई कोठारी का शुक्रवार को कानपुर स्थित आवास पर निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे और काफी समय से बीमार थे। उनका अंतिम संस्कार शनिवार सुबह किया जाएगा। 25 जुलाई 1925 को गुजरात के सुरेंद्र नगर जिले के नरैली गांव में जन्मे कोठारी 16 साल की उम्र में कानपुर आए और सिर्फ 500 रुपये की पूंजी के साथ कारोबार की शुरुआत की। (ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर)
मजदूरी करके कमाए 500 रुपए, उससे खड़ा किया अरबों का कारोबार
बाबूजी के नाम से मशहूर मनसुख भाई कोठारी ने कानपुर में पान पराग की नींव रखने से पहले मजदूरी भी की थी। बाद में 500 रुपये की पूंजी के साथ कारोबार की शुरुआत की और धीरे-धीरे अरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया।
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पान का विकल्प देने की नई सोच के साथ उन्होंने 18 अगस्त 1973 में पान पराग पान मसाला की नींव रखी थी। 1983 में कोठारी प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई। उन्हानें 1985 में डिब्बे में बिकने वाले पान मसाला को पाउच में पेश करके क्रांति ला दी थी।
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बाबूजी को 1987 में पान पराग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया था। तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने उन्हें राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार भी दिया था। मौजूदा समय में पान मसाला के अलावा रियल इस्टेट, मिनरल वाटर, विंड एनर्जी, ऑयल इंडस्ट्री के अलावा नोएडा में कोठारी इंटरनेशनल स्कूल भी है।
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पान पराग के उस विज्ञापन को आज तक कोई नहीं भूल पाया है जो शम्मी कपूर और अशोक कुमार पर फिल्माया गया था। इस विज्ञापन का एक वाक्य ‘बारातियों का स्वागत पान पराग से कीजिएगा’ हर व्यक्ति की जुबान पर रहता था। इस विज्ञापन ने पान पराग ब्रांड को घर-घर तक न केवल पहचान दिलाई बल्कि इसे दुनिया भर में मशहूर कर दिया। 1983 से 87 तक पान पराग टीवी पर सबसे बड़ा एकल विज्ञापनदाता था।