खरीदारी का शौक रखने वालों को बाजारों के बारे में जानकारी जुटाना पसंद होता है। उनका खुद का शहर हो या वह किसी अन्य शहर व प्रदेश में गए हों, वहां कि स्थानीय मार्केट को जरूर घूमना चाहते हैं। किस बाजार में कौन सा सामान अच्छा मिलता है, कहां सामान सस्ता मिलता है और शहर की कौन सी मार्केट किस लिए मशहूर है, इन सभी बातों की खोजबीन कर लोग अपना कैरी बैग तैयार कर पहुंच जाते हैं खरीदारी के लिए। भारत की कई ऐसे शहर हैं, जो अपनी बाजारों के कारण प्रसिद्ध हैं। जैसे लोग चमड़े का सामान लेना चाहते हैं तो कानपुर के बारे में जरूर विचार कर सकते हैं। वैसे ही चिकनकारी के लिए लखनऊ प्रसिद्ध है। पूरे देश में आपको चमड़ा या चिकनकारी के कपड़े मिल जाएंगे लेकिन अगर आप कानपुर और लखनऊ आएंगे तो यहां कि प्रसिद्ध चीजें जरूर खरीदना चाहते हैं लेकिन भारत में कई ऐसे बाजार हैं, जो सामान से ज्यादा वहां के माहौल के कारण मशहूर हैं। क्या आप किसी ऐसी बाजार में गए हैं, जहां सिर्फ महिलाएं ही दुकान पर बैठती हैं? या ऐसी जगह घूमी है, जहां बाजार जमीन पर नहीं बल्कि पानी में हैं? अगर नहीं तो बता दें कि भारत में ऐसी अजीबो गरीब बाजार भी हैं। अगली स्लाइड्स में जानिए भारत की अजब गजब बाजारों के बारे में।
Unique Markets: ये हैं भारत के अजीबो गरीब बाजार, कहीं सिर्फ महिला दुकानदार तो कहीं झील में बिकता है सामान
मणिपुर की इमा कीथेल बाजार
मणिपुर घूमने के लिए बेहतरीन जगह है लेकिन यहां कि एक बाजार काफी मशहूर है। अगर आप मणिपुर जाएं तो इसकी राजधानी इंफाल में स्थित इमा कीथेल जरूर घूमें। इस बाजार में आपको सिर्फ महिला दुकानदार ही नजर आएंगी। यहां मौजूद सभी दुकानों को केवल महिलाएं ही चलाती हैं। इमा कीथेल का मतलब होता है 'मां का बाजार'। यह दुनिया की सबसे बड़ी महिला बाजार है।
कन्नौज की अत्तर मार्केट
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में अत्तर बाजार है। इस बाजार में सिर्फ इत्र यानी परफ्यूम मिलता है। यहां पर 650 से ज्यादा वैरायटी के परफ्यूम बिकते हैं। इस बाजार का इतिहास काफी पुराना है। राजा हर्षवर्धन के दौर से यहां अत्तर बाजार लगता आ रहा है।
कश्मीर की डल झील बाजार
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। हर साल लोग इसी स्वर्ग को देखने जाते हैं। यहां पर्व से ढकी चोटियां, खूबसूरत पहाड़, लकड़ी के बने घर, झीलें और हाउस बोट का लुत्फ लेने लोग पहुंचते हैं लेकिन अगर आप यहां कि बाजार भी घूमना चाहते हैं तो डल झील बाजार जा सकते हैं। इस बाजार की खास बात है कि यहां जमीन पर नहीं बल्कि डल झील पर सब्जी की बाजार लगती है। लोग नावों पर सब्जियां बेचते और खरीदते हैं।
असम का जॉनबील मार्केट
एक जमाना था, जब रुपयों का आविष्कार नहीं हुआ था। उन दिनों बार्टर सिस्टम का चलन था। लोग अपनी जरूरत का सामान लेते थे और उसके बदले उनके पास जो सामान होता था वह दे देते थे। जैसे अगर आपके पास चावल अधिक है तो आप किसी से गेंहू लेकर उसे पैसों की जगह चावल दे सकते थे। लेकिन अगर कहें कि आज भी यह सिस्टम भारत में चला आ रहा है तो आप शायद यकीन न करें। असम में जॉनबील मार्केट है, जहां आज भी वस्तु विनिमय प्रणाली मौजूद है। 15वीं शताब्दी में इस बाजार की शुरुआत हुई थी, तब से इसी प्रणाली में बाजार का संचालन हो रहा है।

कमेंट
कमेंट X