आपकी खुशियों और आपके दुखों के जिम्मेदार खुद आप हैं। दरअसल, आप किसी घटना या किसी बात को जिस तरह से समझते और देखते हैं, आपका दिमाग उसी के अनुसार हार्मोन्स रिलीज करता है। मतलब अगर आप किसी घटना में अपने लिए खुशियां और उम्मीदें देखते हैं, तो आपका दिमाग 'हैप्पी हार्मोन्स' रिलीज करता है। वहीं, अगर आप उस घटना को निराशा और नाउम्मीदी के नजरिये से देखते हैं, तो दिमाग 'स्ट्रेस हार्मोन्स' को रिलीज करता है। इसलिए चीजों और घटनाओं को देखने का नजरिया और कुछ आदतों को बदलकर आप खुशी महसूस कर सकते हैं।
अगर आप दिनभर में 30 मिनट भी प्रकृति के साथ बिताते हैं, तो इससे न सिर्फ आपका दिमाग शांत और प्रसन्न रहेगा, बलि्क थोड़ी देर टहलने-खेलने से आपका शरीर भी स्वस्थ रहेगा। दरअसल, जब किसी शारीरिक क्रिया द्वारा आप अपने शरीर से पसीना निकालते हैं, तो आपका शरीर एंटीबॉडीज रिलीज करता है। एंटीबॉडीज ऐसे प्रोटीन हैं, जो शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करते हैं। इसी के साथ आपका दिमाग एंडॉर्फिन्स नाम का केमिकल रिलीज करता है, जो मूड सही रखने और आपको अच्छा महसूस करने में मदद करते हैं।
अगर आप भरपूर नींद लेते हैं, तो आपका दिमाग ज्यादा अच्छी तरह काम करता है और आप सही निर्णय ले पाते हैं। संगीत आपकी खुशियों के ताले की सबसे आसान चाबी है। थोड़ा समय निकालिए और अपना मनपसंद संगीत सुनते हुए थोड़ा थिरकिए, थोड़ा गुनगुनाइए। अच्छा संगीत आपके दिमाग का तनाव निकाल देगा और आप काफी राहत महसूस करेंगे। संगीत के इसी प्रभाव के कारण वैज्ञानिक म्यूजिक थैरेपी को कई बीमारियों के इलाज के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
लिखने का भी खुशियों से कनेक्शन है। दरअसल, जब आप अपने विचारों को कहीं अभिव्यक्त कर देते हैं, तो आपका दिमाग उस विचार को भूलने वाली कैटेगरी में डाल देता है। इसलिए अपने दिमाग में उमड़ती-घुमड़ती बातों को कागज पर लिखिए। थोड़े दिनों बाद जब आप अपनी इन्हीं बातों को पढ़ेगें तो आपको अंदर से खुशी भी होगी और आपके चेहरे पर मुस्कुराहट भी आाएगी।