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Preeclampsia: गर्भावस्था की इस समस्या से मां-शिशु दोनों को खतरा, ज्यादातर महिलाओं में देखी जा रही है ये दिक्कत

Sun, 18 Jun 2023 07:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 18 Jun 2023 07:31 PM IST
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What Is Preeclampsia and its complications, pregnancy problem issues that affect child development
गर्भावस्था मं होने वाली समस्याएं - फोटो : istock

गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए सबसे खास समय होता है, हालांकि ये जितना खास होता है उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। इस दौरान गर्भवती को सेहत का विशेष ख्याल रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि आपकी सेहत का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि महिला को खान-पान, योग-व्यायाम करते रहने की सलाह दी जाती है।



क्या आप जानती हैं, गर्भावस्था का यह समय आपमें कई समस्याओं के जोखिमों को बढ़ाने वाला भी हो सकता है? जिसको लेकर निरंतर सावधानी बरतते रहना जरूरी है।

गर्भकाल में बहुत सी महिलाएं डायबिटीज की  शिकार हो जाती है, इसे गर्भकालीन मधुमेह के रूप में जाना जाता है। इसी तरह से कुछ स्थितियां आपमें हाई ब्लड प्रेशर के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं, इसे मेडिकल की भाषा में प्रीक्लेम्पसिया के रूप में जाना जाता है। आइए इस समस्या के बारे में जानते हैं।

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गर्भावस्था और प्रीक्लेम्पसिया की समस्या - फोटो : istock

प्रीक्लेम्पसिया क्या है?

प्रीक्लेम्पसिया एक गंभीर स्थिति है जो गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद या प्रसव के बाद हो सकती है, जिसे पोस्टपार्टम प्रीक्लेम्पसिया भी कहा जाता है। उच्च रक्तचाप के अलावा इसमें पेशाब में प्रोटीन का उच्च स्तर हो सकता है जो किडनी डैमेज (प्रोटीनुरिया) या अंगों की क्षति का कारण बनती है।

प्रीक्लेम्पसिया से एक्लम्पसिया होने का भी खतरा रहता है, यह भी एक गंभीर स्थिति है जिसमें मां और बच्चे दोनों के लिए समस्याएं हो सकती हैं, दुर्लभ मामलों में यह मृत्यु का कारण बन सकता है। मां-बच्चे दोनों की देखभाल के लिए इस समस्या के बारे में जानना और उपचार प्राप्त करना आवश्यक है।

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प्रीक्लेम्पसिया के लक्षणों को जानिए - फोटो : iStock

कैसे करें इसके लक्षणों की पहचान?

प्रीक्लेम्पसिया मुख्यरूप से हाई ब्लड प्रेशर, प्रोटीन्यूरिया या किडनी और अन्य अंगों के क्षति का कारण बन सकती है। प्रीक्लेम्पसिया के लक्षण अक्सर गर्भावस्था के दौरान होने वाली जांच में स्पष्ट हो पाते हैं, हालांकि कुछ सामान्य सी दिक्कतों के आधार पर भी समस्या का पता लगाया जा सकता है। 

  • पेशाब में अतिरिक्त प्रोटीन या किडनी की समस्याओं के अन्य लक्षण।
  • रक्त में प्लेटलेट के स्तर में कमी (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया)।
  • लिवर एंजाइम में वृद्धि जो लिवर की समस्याओं का संकेत हो सकती है।
  • गंभीर सिरदर्द- दृष्टि में परिवर्तन, धुंधली दृष्टि या प्रकाश संवेदनशीलता।
  • फेफड़ों में तरल पदार्थ के कारण सांस की तकलीफ।
  • ऊपरी पेट में दर्द, आमतौर पर दाहिनी ओर पसलियों के नीचे।
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प्रीक्लेम्पसिया के जोखिम - फोटो : istock

क्यों होती है ये समस्या?

प्रीक्लेम्पसिया के कई कारण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्लेसेंटा में शुरू होता है, वह अंग जो गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को पोषण देता है। गर्भावस्था की शुरुआत में, नई रक्त वाहिकाएं विकसित होती हैं और प्लेसेंटा को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति करने में मदद करती हैं।  

प्रीक्लेम्पसिया से पीड़ित महिलाओं में, ये रक्त वाहिकाएं ठीक से विकसित या काम नहीं करती हैं। गर्भवती के रक्तचाप में अनियमितता के कारण प्लेसेंटा से रक्त का संचार कम या प्रभावित हो सकता है, जो बच्चे की सेहत के लिए ठीक नहीं है।

क्रोनिक हाई ब्लड प्रेशर, गर्भावस्था से पहले मधुमेह की समस्या, किडनी रोग या ऑटोइम्यून विकारों के कारण ये दिक्कतें हो सकती हैं।

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गर्भावस्था की समस्याओं के दुष्प्रभाव - फोटो : Pixabay

बच्चे की सेहत पर असर और बचाव के तरीके

प्रीक्लेम्पसिया चूंकि रक्त को नाल तक ले जाने वाली धमनियों को प्रभावित करता है, ऐसे में यदि भ्रूण को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता है, तो इससे विकास प्रभावित होने के साथ कई रोगों का खतरा हो सकता है। यह समस्या समय से पहले जन्म के कारणों में से भी एक है।

डॉक्टर कहते हैं, इस समस्या से बचाव के लिए जरूरी है कि आप लाइफस्टाइल और आहार को ठीक रखें। यही दो उपाय करके आप जोखिमों को काफी कम कर सकती हैं। स्वस्थ शिशु के लिए प्रीक्लेम्पसिया से बचाव के उपायों के बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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