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डायबिटीज: क्या प्री-डायबिटीज का मतलब डायबिटीज होना पक्का है? जानिए कैसे दूर कर सकते हैं ये खतरा

Sat, 17 Oct 2026 03:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 17 Oct 2026 03:05 PM IST
सार

Pre-Diabetes Risk: प्री-डायबिटीज में ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन यह टाइप-2 डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचता। इसमें अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। समय पर जांच, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और जरूरत के अनुसार वजन घटाने से डायबिटीज का खतरा कम किया जा सकता है। 

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What Is Prediabetes and How Can You Prevent type 2 Diabetes risk
डायबिटीज की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। हाई शुगर वाली ये बीमारी समय के साथ आंखों, किडनी, लिवर को भी नुकसान पहुंचा सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कम उम्र से ही शुगर को कंट्रोल में रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।



डायबिटीज का नाम आते ही सबसे ज्यादा चर्चा टाइप-2 और डाइप-1 बीमारी की होती है, अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने टाइप-3 सी डायबिटीज के बारे में बताया है। इसके अलावा आपने प्री-डायबिटीज के बारे में भी खूब सुना होगा। 

प्री-डायबिटीज ऐसी स्थिति है, जिसमें खून में शुगर का स्तर सामान्य से ज्यादा तो रहता है लेकिन अभी ये टाइप-2 डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचा होता है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या जिन लोगों को प्री-डायबिटीज की दिक्कत है, उन्हें भविष्य में डायबिटीज होना पक्का है?

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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freepik.com

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार करने के साथ वजन को कंट्रोल में रखने से डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है। प्री-डायबिटीज को डायबिटीज की बीमारी का अलार्म तो माना जाता है, पर इसका मतलब ये नहीं है कि आपको डायबिटीज होगा ही।

पहले प्री-डायबिटीज को समझ लीजिए

जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो खून में ग्लूकोज यानी शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। जब शुगर बढ़ा तो रहे पर इतना हाई न रहे कि वह टाइप-2 डायबिटीज तक पहुंच जाए तो इस स्थिति को प्री-डायबिटीज कहा जाता है। 
 

  • इंसुलिन जरूरी हार्मोन है जो खून में मौजूद शुगर को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है।
  • अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी के अनुसार, प्री-डायबिटीज पर अगर ध्यान न दिया जाए तो इससे टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। सही समय पर जरूरी कदम उठाकर डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com

प्री-डायबिटीज की पहचान क्या है?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्री-डायबिटीज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं नजर आते। हालांकि अगर आपको ज्यादा प्यास लगने, थकान या बार-बार पेशाब लगने जैसी दिक्कतें हो रही हैं तो समय रहते शुगर की जांच करा लेना चाहिए। कुछ अन्य स्थितियां भी हैं तो आपको प्री-डायबिटीज को लेकर अलर्ट हो जाना चाहिए।
 

  • परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज रहो हो।
  • आपका वजन ज्यादा हो या शारीरिक गतिविधि कम करते हों।
  • गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की दिक्कत रही हो।
  • फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c जैसी जांच से शुगर की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलती है। आमतौर पर HbA1c का 5.7-6.4% के बीच होना प्री-डायबिटीज की सीमा में आता है। 
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डायबिटीज के खतरा - फोटो : Adobe Stock

प्री-डायबिटीज है तो डायबिटीज से कैसे बचें?

अगर आपको प्री-डायबिटीज है तो जीवनशैली में हल्के-फुल्के बदलाव करके भी डायबिटीज होने के खतरे को कम कर सकते हैं। आपके लिए भूखे रहने या चावल-रोटी पूरी तरह छोड़ देना जरूरी नहीं है। बस भोजन को संतुलित रखें और इसकी मात्रा पर ध्यान रखें।
 

  • थाली में हरी सब्जियां, दालें और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें।
  • मीठे पेय, पैकेट वाले जूस और ज्यादा चीनी वाली चीजें कम खाएं।
  • साबुत अनाज और फाइबर वाली चीजों को डाइट में प्राथमिकता दें।
  • जरूरत से ज्यादा खाने और बार-बार बिना स्नैकिंग करने से बचें।


शारीरिक गतिविधि शरीर को इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करती है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट तेज चाल से चलने जैसी मध्यम गतिविधि आपके शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने में मदद कर सकती है। शरीर का वजन 5-7% तक घटाने से भी डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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