मां बनना हर महिला के लिए एक सुखद एहसास लेकर आता है। हांलाकि दुनिया में बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जो मातृत्व सुख से वंचित रह जाती हैं लेकिन अब विज्ञान की तरक्की से यह संभव है। वैसे तो एक स्वस्थ महिला के लिए मां बनना मुश्किल नहीं है लेकिन आजकल की गलत जीवनशैली या हार्मोन की गड़बड़ी की वजह से दिक्कतें आती हैं।
इन तीन कारणों से महिलाएं नहीं बन पाती मां, विज्ञान की तरक्की ने दिलाया संतान सुख
महिलाओं में गर्भधारण न करने का कारण फैलोपियन ट्यूब यानी गर्भनलियो का बंद होना, यूट्रस संबंधी समस्याएं जैसे छोटा गर्भाशय, गांठ, रसौली/कैंसर या टीबी, एग का नहीं बनना, पीसीओडी (पॉलिसिस्टिक ओवरी डीजीजेज), ल्यूकोरिया, डायबीटीज, अनीमिया, मोटापा आदि है।
हांलाकि इन समस्याओं के अलावा भी मां बनने में दिक्कतें आती हैं। जिनमें कुछ महिलाओं में ट्यूब न होने की समस्या होती है तो कुछ में ट्यूब में रुकावट या संक्रमण से जुड़ी समस्या होती हैं।
महिला के शरीर में दो ट्यूब होती हैं| हर महीने ओवरी से अंडा फैलोपियन ट्यूब में आता है इस दौरान सम्बन्ध बनने पर शुक्राणु अंडे में प्रवेश कर जाता है जिससे भ्रूण बनने की प्राथमिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है इसके बाद भ्रूण गर्भाशय में चला जाता है और जन्म तक यही विकसित होता है।
फैलोपियन ट्यूब में अगर ब्लॉकेज हो तो इसे दवाओं के माध्यम से ठीक किया जाता है लेकिन कई मामलो में दवा बेअसर होती है ऐसे में कैन्यूलाइजेशन तकनीक के तहत एक पतले तार के जरिए ब्लॉकेज हटाया जाता है। अगर ट्यूब में ब्लॉकेज ज्यादा हो तो प्रभावित हिस्से को हटाकर बाकी हिस्से को टांकें लगाकर जोड़ा जाता है। ट्यूब खुलने के बाद भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना कम ही रहती है ऐसे में इसे खुलवाये बिना आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) की मदद से गर्भधारण किया जा सकता है । इसमें महिला की ओवरी से एग बाहर निकालकर लैब में पुरुष के स्पर्म से फर्टिलाइज किया जाता है । 2-3 दिन बाद इसे महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इस प्रकार ट्यूब में होने वाली प्रक्रिया को लैब में किया जाता है इसके बाद सारी प्रक्रिया सामान्य गर्भधारण जैसी ही है |

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