हम में से ज्यादातर लोग मानते हैं कि शरीर में किसी बीमारी का सबसे पहला लक्षण दर्द होना है। स्ट्रोक से लेकर हार्ट अटैक जैसी समस्या में दर्द को कॉमन लक्षण माना जाता है। पर हर बार बीमारियां दर्द के संकेत के साथ आएं, ये जरूरी नहीं है। कई बीमारियां ऐसी भी होती हैं जो लंबे समय तक बिना दर्द या स्पष्ट लक्षणों के भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
सेहत की बात: बिना दर्द के भी शरीर में पल रही होती हैं ये गंभीर बीमारियां, आपमें भी तो नहीं है खतरा?
कुछ गंभीर बीमारियां शुरुआती दौर में बिना दर्द या स्पष्ट लक्षणों के बढ़ सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और क्रॉनिक किडनी डिजीज ऐसी ही समस्याएं हैं। नियमित जांच, संतुलित खानपान से इनके जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, साइलेंट बीमारियां हमारी सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा होती है, क्योंकि इनकी समय पर पहचान नहीं हो पाती है। इसलिए सिर्फ दर्द के आधार पर शरीर की समस्याओं का पता नहीं लगाना चाहिए। नियमित हेल्थ चेकअप यहीं सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।
हाई ब्लड प्रेशर में भी नहीं होता है ज्यादा दर्द
हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि बहुत से लोगों को बीपी बढ़ने के बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहने पर हृदय, मस्तिष्क, आंखों और किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
- ब्लड प्रेशर का पता लगाने के लिए नियमित जांच जरूरी है। केवल सिरदर्द या चक्कर आने के आधार पर ही इसका पता नहीं लगाया जा सकता।
- जिन लोगों को पहले से ब्लड प्रेशर की दिक्कत है या फिर इसका खतरा है, उन्हें आहार में नमक कम रखने, नियमित व्यायाम और वेट को कंट्रोल में रखने पर ध्यान देना चाहिए।
डायबिटीज में भी शुरू में नहीं होता दर्द
डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। टाइप-2 डायबिटीज की शुरुआत धीरे-धीरे होती है और शुरुआती दौर में लक्षण स्पष्ट नहीं होते। हालांकि अगर ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहे तो इससे आंखों, नसों, हृदय और किडनी को खतरा हो सकता है।
- आपको डायबिटीज है या नहीं इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर की सलाह से फास्टिंग ब्लड शुगर या HbA1c टेस्ट कराएं।
- संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को कंट्रोल रखने से शुगर की बीमारी में भी मदद मिल सकती है।
फैटी लिवर की समस्या
फैटी लिवर रोग में लिवर की कोशिकाओं में फैट जमा होने लगती है। इस बीमारी में भी शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। कुछ लोगों में ये बीमारी बढ़कर साइलेंटली लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस का कारण बन सकती है।
- जिन लोगों में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है उनमें फैटी लिवर रोग का जोखिम ज्यादा देखा जाता रहा है।
- संतुलित आहार, नियमित व्यायाम करें और जरूरत के अनुसार वजन कम करके लिवर की इस समस्या से बचाव किया जा सकता है।
किडनी की बीमारी
क्रॉनिक किडनी डिजीज के कारण किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। इस बीमारी के शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। बीमारी बढ़ने के साथ थकान, पैरों में सूजन और पेशाब में बदलाव हो सकते हैं। किडनी की बीमारी में भी शुरुआत में अक्सर पेट में दर्द नहीं होता है।
- किडनी की समस्याओं के पहचान के लिए डॉक्टर क्रिएटिनिन और पेशाब में एल्ब्यूमिन की जांच कराने की सलाह देते हैं।
- डॉक्टर कहते हैं, किडनी की बीमारियों से बचे रहने के लिए ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को कंट्रोल में रखें तथा बिना सलाह के लंबे समय तक पेनकिलर न लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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