देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में अब काफी हद तक कमी आई है। बीते 24 घंटे में संक्रमण के 58,419 नए मामले आए हैं, जबकि इस दौरान 1,500 से अधिक मरीजों की मौत हुई है। चूंकि संक्रमण के मामले तो अभी आ ही रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है और कई राज्यों में इससे निपटने को लेकर तैयारियां भी चल रही हैं। बीते शनिवार को दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने चेतावनी दी कि अगर कोरोना से बचने के उपायों का पालन नहीं किया गया और भीड़-भाड़ नहीं रोकी गई तो अगले छह से आठ हफ्ते में देश में तीसरी लहर आ सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण नहीं हो जाता है, तब तक मास्क पहनने, सुरक्षित शारीरिक दूरी जैसे नियमों का पालन करते रहना चाहिए। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं इस बारे में...
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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना की तीसरी लहर कब तक आएगी और इसे कैसे रोक सकते हैं?
Sun, 20 Jun 2021 09:35 AM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 20 Jun 2021 09:35 AM IST
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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तीसरी लहर कब तक आएगी और इसे कैसे रोक सकते हैं?
- दिल्ली स्थित गंगाराम अस्पताल के डॉ. (लेफ्टिनेंट जनरल) वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'वायरस म्यूटेट हो रहा है, इसलिए माना जा रहा है कि तीसरी लहर आ सकती है। इंग्लैंड में अचानक से केस फिर से आने लगे हैं और वहां लॉकडाउन लगा रहे हैं। उसी तरह अगर हमारे यहां ओपनिंग हो रही है, तो केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि खुद के बिहेवियर में बदलाव लाना होगा। इससे अगर तीसरी लहर आती भी है, तो हम उसे रोक सकते हैं, एक तो अपने बिहेवियर से और दूसरा वैक्सीन से। वैक्सीन को लेकर भी डरने की जरूरत नहीं है, हमें इसमें महारत हासिल है। हर साल करोड़ों बच्चों को हम वैक्सीन देते हैं। इसके अलावा सरकार काफी तैयारी कर रही है, ये जो कोर्स की शुरुआत की गई है, उससे ऐसे लोग तैयार होंगे, जो तुरंत लोगों की मदद करेंगे। इन सबसे हम तीसरी लहर आएगी भी तो उसे मात दे सकते हैं। इसलिए लोगों को सरकार का साथ देना होगा।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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अगर तीसरी लहर आती है, बच्चों पर कितना असर होगा?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'एम्स का सर्वे आया है, जिसमें पाया गया है कि पहली और दूसरी लहर में बच्चे संक्रमित तो हुए, लेकिन बीमारी गंभीर नहीं हुई। इससे सीख मिलती है कि बच्चे संक्रमित होंगे, लेकिन उनमें लक्षण नहीं होंगे। 50-60 प्रतिशत तक नहीं होंगे, अगर कोई संक्रमित हुए भी तो हल्की खांसी-जुकाम की तरह। सही है तैयारी करिए, लेकिन भयभीत होने की जरूरत नहीं है।'
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बहुत लोग मानने लगे हैं कि कोरोना खत्म हो गया है, क्या कहेंगे?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'कोरोना खत्म नहीं हुआ है, केस हर रोज आ रहे हैं। जब तक पूरी दुनिया से कोरोना नहीं खत्म हो जाता है, तब तक ये नहीं मान सकते हैं कि संक्रमण नहीं होगा। इसलिए मास्क लगाएं और वैक्सीन भी लगवाएं। अभी तो ये भी हो सकता है कि जिस तरह से निमोनिया की वैक्सीन लगती है, उसी तरह कोरोना की भी वैक्सीन दोबारा लेनी पड़ सके। इसलिए नियमों का पालन करें। इसे दुनिया से खत्म होना जरूरी है।'
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क्रैश कोर्स की शुरुआत की गई है, इसे कैसे देखते हैं?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'सरकार की ओर से यह बहुत ही अच्छी पहल है। अभी हमारे पास डॉक्टर और नर्स के बीच ऐसे लोग नहीं हैं, जो मरीजों की मदद करें। इस कोर्स के जरिये छह तरह की स्किल सिखाई जाएंगी। जैसे कि, अगर एंबुलेंस से मरीज को उतारना है या लाना-ले जाना है, उन्हें शिफ्ट करना, सैंपल लेना, जिस तरह से टीवी पर ऐड आदि में देखते हैं, वो नर्स या डॉक्टर तो नहीं करते हैं। इस तरह के स्किल वाले लोगों की जरूरत है। इसी तरह ऑक्सीजन सिलेंडर खोलना है या लगाना है। अगर कहीं 500 मरीज हैं, तो डॉक्टर और नर्स को और भी काम होते हैं, जैसे दवा आदि देनी है। अब इस तरह के लोगों को स्किल सिखाई जाएगी। कोर्स तीन हफ्ते का होगा और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। करीब एक लाख लोगों को तैयार किया जाएगा और अस्पतालों में भेजा जाएगा। इस तरह भविष्य में कभी तीसरी लहर आदि में बहुत मदद मिलेगी और रोजगार भी मिलेगा।'