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एक्सक्लूसिव: लड़कियों की पोशाक का दुष्कर्म से कोई संबंध नहीं -सुतापा सान्याल

Sat, 28 Dec 2019 03:42 PM IST
Rama Solanki रमा सोलंकी
Updated Sat, 28 Dec 2019 03:42 PM IST
सार

  • अर्थशास्त्र की लेक्चरर से आईपीएस अधिकारी बनने तक का सफर।
  • 1984 बैच में सुतापा सान्याल अकेली महिला आईपीएस थीं
  • उत्तर प्रदेश में महिला सम्मान प्रकोष्ठ की डीजी रहीं

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There is no connection between rape and the dress of a girl: Sutapa Sanyal
शक्ति: सुतापा सान्याल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश की पहली महिला महानिदेशक (आईपीएस) जिन्होंने बतौर महिला सम्मान प्रकोष्ठ की डीजी का कार्यभार संभाला। 1984 बैच की अकेली महिला आईपीएस होने के सम्मान। अर्थशास्त्र की लेक्चरर से आईपीएस अधिकारी बनने तक का सफर। जानिए अमर उजाला से खास बातचीत में सुतापा सान्याल ने महिलाओं के लिए क्या कहा।

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1984 बैच में सुतापा सान्याल अकेली महिला आईपीएस थीं

There is no connection between rape and the dress of a girl: Sutapa Sanyal
शक्ति: सुतापा सान्याल - फोटो : Amar Ujala

महिला सुरक्षा के सिस्टम में कहां गड़बड़ी है और जस्टिस डिलेवरी सिस्टम को कैसे दुरुस्त किया जाना चाहिए जिससे ये अपराध कम हों ? 
महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के उपायों पर सुतापा सान्याल ने कहा कि सभी सिस्टम को एक साथ मिलकर काम करना होगा। जस्टिस डिलेवरी सिस्टम ऐसा होना चाहिए कि किसी को भी अपराध करने की हिम्मत न हो।

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ऐसा काम करना चाहिए जिसमें लोगों की अधिक से अधिक मदद का मौका मिले -सुतापा सान्याल

There is no connection between rape and the dress of a girl: Sutapa Sanyal
शक्ति: सुतापा सान्याल - फोटो : Amar Ujala

आपने बच्चियों की सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान के लिए पुलिस अधिकारी रहते हुए काम किया है, बदलाव कैसे आएगा?
सुतापा सान्याल: बच्चियों की सुरक्षा बहुत जरूरी हैं और महिलाओं का सम्मान समाज की जिम्मेदारी भी है। यह हमारी जिम्मेदारी है और अगर हम इसको अपनी प्राथमिकता में रखेंगे तो बदलाव कैसे नहीं आएगा। बदलाव की उम्मीद हमेशा खुद से करनी चाहिए फिर इसकी शुरुआत बाहर करनी चाहिए,केवल दूसरों से ही इसकी उम्मीद न करें खुद भी आगे बढ़कर काम शुरू करें।

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सामाजिक परिवर्तन एक दिन में नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे होता है -सुतापा सान्याल

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शक्ति: सुतापा सान्याल - फोटो : Amar ujala

जब भी किसी महिला के साथ दुष्कर्म होता है तो उसके पहनावे को लेकर बात होने लगती है, महिलाओं के पहनावे से दुष्कर्म का क्या ताल्लुक?
वरिष्ठ आईपीएस अफसर और पूर्व पुलिस महानिदेशक सुतापा सान्याल ने कहा कि लड़कियों के पहनावे के तौर-तरीके से रेप का कोई ताल्लुक नहीं है। रेप करने वाले की सोच में गड़बड़ी होती है।

अर्थशास्त्र की लेक्चरर से आईपीएस अधिकारी बनने तक का सफर कैसे तय किया?
सुतापा सान्याल : मेरा लक्ष्य हमेशा से स्पष्ट था कुछ ऐसा करना है जो समाज के लिए कुछ किया जा सके, और लोगों की मदद की जा सके, और मेरी डेस्टिनी मुझे आईपीएस की तरफ लेकर आ गई, और मेरे साथ हमेशा ऐसा रहा है जो काम मुझे दिया गया है वो मैंने बेहतरीन तरीकें से पूरा किया है और मुझे हमेशा वो काम मिला भी है जो मैं करना चाहती थी।

महिला सशक्तिकरण घर से शुरू हो -सुतापा सान्याल

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शक्ति: सुतापा सान्याल - फोटो : Amar Ujala

पुलिस के साथ समाज की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और ये कैसे हो सकता है?
सुतापा सान्याल ने कहा कि महिलाओं के प्रति पुलिस और समाज दोनों को संवेदनशील बनाना होगा। क्योंकि सिस्टम सबसे मिलकर बनता है। उसमे समाज और पुलिस सबकी भूमिका होती है। जब सब तरफ से काम होगा तो ये तस्वीर जरूर बदलेगी।

कुछ शब्द जो हमेशा सुनने को मिलते है 'लड़कियों की तरह क्यों रो रहे हे ' 'चूड़ियां पहन रखी है क्या ' क्या ये सब मानस पर असर डालते है?
सुतापा सान्याल: बिलकुल, और बहुत अंदर तक असर करते है, ये जो हमारा माइंडसेट है इसको बदलने की जरूरत है, और लड़कों और लड़कियों को एक जैसा पालन पोषण देने की जरूरत है। घर से ही शुरुआत करनी होगी। हालांकि इस बात पर भी बहुत ध्यान दिया जाना चाहिए कि लड़कियों को तो हम सशक्त बना रहे हैं पर क्या लड़कों को भी महिलाओं के सम्मान के लिए प्रेरित कर रहे हैं, उनकी परवरिश में भी इस संस्कार को डाल रहे है। बचपन में ही माइंडसेट बदलें तो जब बच्चा बड़ा होगा तो यह समस्या कभी नहीं आएगी।

महिलाओं को सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान भी मिले -सुतापा सान्याल

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शक्ति: सुतापा सान्याल - फोटो : Amar ujala

आप कानून के डर को लेकर क्या सोचती हैं, कानून मजबूत है पर इसका डर भी होना चाहिए?
सुतापा सान्याल: कानून का डर बहुत जरूरी है ताकि क्राइम करने से पहले अपराधी  सोचें कि इसमें उसको सजा मिलेंगी और केस रजिस्टर भी होगा, संगीन और मजबूत धाराएं लगेंगी और सजा भी होगी तो अपराधी को क्राइम करने की हिम्मत ही पैदा नहीं होगी। सजा की प्रक्रिया लम्बें समय तक नहीं खींचनी चाहिए इससे भी असंतोष आता है।

शक्ति के मंच पर सभी महिलाओं के लिए आपका सन्देश?
सुतापा सान्याल : महिलाओं में शक्ति है बस जरूरत है पहचानने की, और ये बदलाव घर से शुरू हो। महिलाएं अपने अंदर से अपने आपको मजबूत करने का बदलाव शुरू करे और खुद को पहचाने। औरत तो खुद शक्ति स्वरूपा है।

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