बॉलीवुड उस वक्त बदलाव के दौर से गुजर रहा था। कई एक्टर्स अपनी किस्मत अजमाने मुंबई पहुंच रहे थे। उन दिनों फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' के लिए ख्वाजा अहमद अब्बास को 7 एक्टर्स की जरूरत थी। जब अमिताभ बच्चन को इस फिल्म के बारे में पता चला तो वो कोलकाता में अपनी 1600 रुपए महीने की नौकरी छोड़कर मुंबई आ गये थे। अब्बास ने अमिताभ को दो किरदारों की च्वाइस दी थी- एक पंजाबी और दूसरा मुस्लिम। अमिताभ ने मुस्लिम किरदार अनवर अली चुना, क्योंकि इस किरदार में अभिनय की कई परतें थीं। 50 साल पहले 15 फरवरी 1969 को अमिताभ वो फिल्म साइन की थी।
सदी के महानायक का खिताब यूं नहीं मिल जाता इसके पीछे सालों की मेहनत होती। इस रास्ते पर चलने वाले न जाने कितने मुसाफिर बीच सफर में रुक जाते। अमिताभ ने जब इस रास्ते पर चलना शुरू किया तो कहीं नहीं रुके वो चले और चलते रहे। आज भी वो अपना सफर तय कर रहे हैं। ऐसा नहीं की उनके रोड़े नहीं थे लेकिन अमिताभ इन सभी को पार करना जानते थे। हालतों का पछाड़ने का हुनर अमिताभ से बेहतर कोई और नहीं जान सकता।
अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद मे हुआ था। उस दौर में अंग्रेजों के खिलाफ देश में व्यापक आंदोलन चल रहा था। इसके चलते उनके हरिवंश राय बच्चन ने उनका नाम इंकलाब रखा। बाद में कवि सुमित्रानंदन पंत ने उन्हें अमिताभ नाम दिया।
अमिताभ की एंट्री बॉलीवुड में भले ही 1969 को हो गई थी लेकिन उन्हें एक हिट फिल्म देने के लिए 12 फ्लॉप फिल्मों का मुंह देखना पड़ा था। 1973 में जंजीर फिल्म के जरिए वे दर्शकों के दिल में उतर गए। इस फिल्म ने उन्हें बॉलीवुड का एंग्री यंगमैन बना दिया। और यहीं से शुरू हुआ सुपरस्टार बनने का सफर।
एक ऐसा भी समय था जब पूरा देश अमिताभ की जिंदगी की दुआएं कर रहा था। 1982 को फिल्म 'कुली' के एक सीन की बेंगलुरु में शूटिंग के दौरान एक्टर पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ के मुंह पर पड़ते ही वह स्टील की टेबल पर गिरे और लुढ़कते हुए दूसरी ओर जा गिरे। सीन काफी रियल लगा, इसपर उन्हें तालियां मिली. अमिताभ भी मुस्कुराए, लेकिन तभी उनके पेट में हल्का दर्द शुरू हुआ. कुछ देर बाद अमिताभ ने बताया कि टेबल का कोना उनके पेट में बुरी तरह चुभा है।