अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी 1958 को उत्तरप्रदेश के मेरठ में हुआ था। अरुण गोविल को रामानंद सागर की रामायण में राम के किरदार के लिए जाना जाता है। अरुण गोविल ने कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है। उन्होंने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत 1977 में आई फिल्म पहेली से की। अरुण गोविल के जन्मदिन पर आइए आपको बताते हैं कैसे मिला उन्हें राम का अमर किरदार और आजकल अरुण कहां गायब हैं।
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Arun Govil
- फोटो : Social Media
1987 में 25 जनवरी को रामायण की शुरुआत हुई थी। घर पर बच्चे रामायण देखने के लिए टीवी लाने की जिद करते थे। मोहल्ले में एक-दो घरों में टीवी हुआ करता था। रामायण के चलते ही टीवी की बिक्री में भी तेजी आई थी। गांव में तो लोग रामायण के समय टीवी पर फूल माला चढ़ाकर देखते थे। साथ में अगरबत्ती भी जलाते थे। राम बन ऐसी पहचान पाने वाले अरुण गोविल इतने पॉपुलर कैसे हुए आइए आपको बताते हैं।
सहारनपुर में पले बढ़े अरुण के पिता उन्हें सरकारी नौकरी करते हुए देखना चाहते ते लेकिन अरुण कुछ ऐसा करना चाहते थे कि दुनिया उन्हें याद रखे। देखिए हुआ भी कुछ ऐसा ही। राम बन अरुण गोविल ने जितनी लोकप्रियता बटोरी उस जमाने में शायद ही किसी को मिली हो।
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अरुण गोविल
- फोटो : Twitter
17 साल की उम्र में ही अरुण मुंबई आ गए। प्ले और एक्टिंग के बलबूते उन्हें पहली फिल्म पहेली में काम करने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने तीन और फिल्में साइन कीं। इसके बाद अरुण गोविल रामानंद सागर से मिले। रामानंद उन दिनों विक्रम बेताल बनाने की सोच रहे थे। शो के लिए एक्टर की जरूरत थी ऐसे में अरुण गोविल को विक्रमादित्य के रोल के लिए कास्ट कर लिया गया।इलेक्ट्रॉनिक ऐरा में ‘विक्रम और बेताल’ पहला शो था, जिसमें टीवी पर स्पेशल इफेक्ट्स नजर आए थे।
विक्रम बेताल हिट हुआ तो रामानंद सागर हिंदू पौराणिक कथा 'रामायण' 1987 में दूरदर्शन पर धारावाहिक 'रामायण' लेकर आए। इसमें विक्रमादित्य की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल को उन्होंने 'रामायण' में राम के केंद्रीय पात्र के रूप में चुना। लेकिन अरुण गोविल को इसके लिए सिगरेट छोड़नी पड़ी। रामानंद सागर का मानना था कि भगवान राम में किसी तरह के अवगुण नहीं थे ऐसे में उनका किरदार निभाने वाला शख्स भी ऐसा ही होना चाहिए।