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Success Story: दो बार विफल रहीं मगर अनीशा ने नहीं मानी हार, तीसरे प्रयास में 94वीं रैंक लेकर बनीं आईएफएस
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: देवेश शर्मा
Updated Mon, 14 Feb 2022 05:51 PM IST
सार
Success Story IFS officer Anisha Tomar: सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली तोमर ने पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी यानी यूआईईटी से इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीटेक पूरी की है। फाइनल ईयर में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देने का मानस बनाया और अपने तीसरे प्रयास में 2019 के बैच में ऑल इंडिया 94वीं रैंक हासिल कीं।
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IFS Anisha Tomar
- फोटो : सोशल मीडिया
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Anisha Tomar AIR 94 in UPSC CSE 2019 Success Story: संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा को क्वालीफाई करने का सपना हर युवा देखता है। भले ही वह आईटी सेक्टर में काम करने लगा हो या डॉक्टर बन गए हों। कई युवाओं ने अपने पेशे और प्रोफेशनल करियर को छोड़कर सिविल सेवा ज्वॉइन की है। हालांकि, इनका सफर इतना आसान नहीं होता है। इसकी तैयारी करने वाले छात्रों को अपने आपको पूरी तरह से पढ़ाई के प्रति और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होना पड़ता है। अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सकारात्मक सोच और मजबूत इच्छाशक्ति दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण पायदान हैं। अनीशा तोमर इन दोनों पहलू पर खरी उतरकर आईएफएस बनीं हैं।
उन्होंने, युवाओं को यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाने के लिए कई टिप्स दिए हैं। इंजीनियरिंग से यूपीएससी सिविल सेवा के टॉप 100 में जगह बनाने वाली अनीशा तोमर की कहानी भी किसी प्रेरक प्रसंग से कम नहीं है। सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली तोमर ने पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी यानी यूआईईटी से इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीटेक पूरी की है। फाइनल ईयर में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देने का मानस बनाया और अपने तीसरे प्रयास में 2019 के बैच में ऑल इंडिया 94वीं रैंक हासिल कीं। प्रशिक्षण के बाद भारतीय विदेश सेवा विभाग ज्वॉइन कर लिया। आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी और क्या हैं युवाओं के लिए उनके सफलता के मंत्र ...
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IFS Anisha Tomar
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अनीशा ने ब्लॉगिंग वेबसाइट कोरा पर सवालों के जवाब और एक साक्षात्कार में अपने यूपीएससी के सफर की कहानी साझाा की है। बकौल अनीशा, यूपीएससी की परीक्षा मेरे लिए एक परीक्षा नहीं थी, यह जिंदगी में एक बड़े बदलाव का अनुभव था। यह सफर बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा। इसकी शुरुआत 2016 में उसी दिन हुई थी जब मैनें परीक्षा देने का फैसला कर लिया था। वह कहती हैं कि एक शांत समुद्र में नौका चलाकर आप कभी कुशल नाविक नहीं बन सकते। लहरों का सामना करने वाला ही कुशल नाविक कहलाता है। लेकिन 2017 का मेरा पहला प्रयास सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में फेल होने पर ही खत्म हो गया था।
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दूसरे प्रयास में मेन्स में मात्र छह अंक से चूकीं
इसके बाद, एक और प्रयास करने की ठानीं और अनीशा ने यूपीएससी पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन सामग्री तैयार की। फिर उसने एक समय सारिणी बनाई और परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। 2018 में दूसरे प्रयास के दौरान वह प्री क्लीयर करके मुख्य परीक्षा तक पहुंच गई। इस दौरान हाइपरटेंशन समेत कई बीमारियों ने मुझे जकड़ लिया था। मेरे दो महीने का समय बेकार हो गया, लेकिन एक आशा थी। अनीशा कहती हैं कि एक बार तो लगने लगा था कि अब तो सफलता मिल ही गई, लेकिन मुख्य परीक्षा के नतीजों ने फिर एक बार वास्तविकता दिखा दी। मैं मुख्य परीक्षा के कट ऑफ स्कोर से महज छह अंक पीछे रह गई थी।
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ब्रेक लेकर छुटि्टयां मनाईं, लौटकर पढ़ाई में जुटीं
दूसरी बार में प्री क्लीयर होने और मेन्स तक पहुंचने से आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था और लगा कि रणनीति अब काम कर रही है, तो फिर 2019 तीसरा प्रयास करने का फैसला किया। प्री क्लीयर करने के बाद एक छोटा ब्रेक लेकर छुटि्टयां मनाईं, लेकिन लौटकर फिर जी-जान से मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुट गई। अपने पर सकारात्मकता के साथ विश्वास रखा और हार नहीं मानते हुए दोबारा से कड़ी मेहनत की। अनीशा ने अपनी रणनीति के अनुसार धैर्य से काम लेना जारी रखा और आखिरकार अपने तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया 94 रैंक पाई।
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ऑप्शनल सब्जेक्ट और एस्से राइटिंग पर किया फोकस
अनीशा का कहना है कि अगर आप यूपीएससी में सफलता पाना चाहते हैं तो आपको लगातार धैर्य के साथ लंबे समय तक मेहनत करनी होगी। उनका मानना है कि आपको अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। अनीशा के अनुसार हर विफलता से सीख लेनी चाहिए और गलतियों से सीखकर बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो पार्ट ज्यादा अहम है उसका अभ्यास ज्यादा करना चाहिए। जो समय खराब करें उसे किनारे कर देना चाहिए। मैंने अपने समय में ऑप्शनल सब्जेक्ट और एस्से राइटिंग पर फोकस किया था। जनरल स्टडीज को पहले ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी, लेकिन बाद में तैयारी की। पिछले टॉपर्स की राइटिंग स्किल्स का अभ्यास किया और अपनी लेखन शैली में बदलाव किया।
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