फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त

पैरों से नाकाम लेकिन ऑटो चालकों का मसीहा है निर्मल, मोदी कर चुके हैं तारीफ

Mon, 09 Jan 2017 05:34 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jan 2017 05:34 PM IST
विज्ञापन
Nirmal Kumar Of G-Auto's Success Story
- फोटो : YourStory
बचपन से ही पोलियो के शिकार रहे निर्मल कुमार की कहानी कोई आम कहानी नहीं है। संघर्षों से भरी उनकी जिंदगी सभी के लिए प्रेरणा है। कैसे सभी से अलग होना उन्होंने अपने लिए कमजोरी नहीं बनने दिया और कैसे बने एक बड़ी कंपनी के मालिक, जानिए
Nirmal Kumar Of G-Auto's Success Story
बिहार के सीवान जिले के एक छोटे से गांव में जन्में निर्मल जब तीन साल के थे तभी पोलियो जैसी बीमारी ने उन्हें जकड़ लिया। माता-पिता ने डॉक्टर्स से लेकर नीम-हकीमों से इलाज करवाया, मगर सब बेअसर रहा।
Nirmal Kumar Of G-Auto's Success Story
बावजूद इसके निर्मल और उनके माता-पिता ने हार नहीं मानी। यह जानते हुए कि वह बाकि बच्चों से अलग हैं, उन्होंने पढ़ने की अपनी लगन को कम नहीं होने दिया। निर्मल ने खूब मेहनत से बारहवीं तक पढ़ाई की और हर क्लास में अव्वल आए। डॉक्टर बनने के सपने के साथ वह पटना चले गए ताकि वहां रहकर मेडिकल की तैयारी कर सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Nirmal Kumar Of G-Auto's Success Story
लेकिन पटना में जिंदगी आसान नहीं थी। घर में माता-पिता का साथ था, लेकिन पटना में उन्हें सबकुछ खुद करना पड़ता था। पटना में वह 14 से 15 किलोमीटर तक का सफर पैदल ही तय किया करते थे। उन्होंने मेडिकल के लिए जीतोड़ मेहनत की लेकिन मेडिकल में दाखिला नहीं मिल सका। निर्मल ने तब हैदराबाद के आचार्य एन.जी.रंगा कृषि विश्वविद्यालय से बीटेक(कृषि विज्ञान) करने की सोची। वह इतने होनहार छात्र थे कि इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय प्रतिभा छात्रवृत्ति भी मिली थी और हर महीने भारत सरकार की ओर से 800 रूपये की छात्रवृत्ति मिलने लगी। लेकिन यह राशि जरूरतों के हिसाब से कम थी इसलिए वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे।
विज्ञापन
Nirmal Kumar Of G-Auto's Success Story
बिहार के ज्यादातर बच्चों की तरह वह भी आईएएस या आईपीएस बनने के सपने देखने लगे। लेकिन उन्होंने इस सपने को किसी और कारण से छोड़ दिया। हुआ यूं कि एक दिन एक कॉलेज सीनियर ने उन्हें आईआईएम के बारे में बताया और कहा कि वहां के बच्चों की सलाना आय 50 लाख तक होती है। तभी उन्होंने सोचा कि वह भी आईआईएम में दाखिला लेंगे।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Education News in Hindi related to careers and job vacancy news, exam results, exams notifications in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Education and more Hindi News.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed