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स्वीडन: जहां मेलजोल बढ़ाने का जरिया है ‘फीका’, जानिए क्यों है यह खास

Thu, 07 May 2020 03:03 PM IST
Priyamvada Sahay प्रियंवदा सहाय
Updated Thu, 07 May 2020 03:03 PM IST
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swedish fika recipes food time coffee break seoul history significance importance
फीका स्वीडिश समाज में मेलजोल बढाने का महत्वपूर्ण जरिया है

भारत में जैसे फ़ुर्सत के क्षण चाय पर चर्चा करने की परंपरा रही है ठीक इसी तरह स्वीडन में ‘फीका’ की परंपरा है। लेकिन आप इस नाम पर नहीं जाइए भले ही यह सुनने में फीका है, लेकिन होता स्वाद से भरपूर और दिलचस्प है।

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यहां के लोग दफ्तर में काम से थोड़ा समय फीका के लिए जरूर निकाल लेते हैं। यह स्वीडिश समाज में मेलजोल बढाने का महत्वपूर्ण जरिया है। फीका यानी कॉफी, केक, बुले या कुछ मीठा के साथ अपने सहकर्मियों व दोस्तों के बीच हल्की फुल्की चर्चा।
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भारत में होने वाली चाय पर चर्चा और स्वीडन के फीका में अंतर यह है कि यह दोस्तों के साथ किसी कैफे, रेस्तरां में होने के अलावा दफ्तरों में सहयोगियों के साथ भी लगभग रोजाना होता है। लेकिन दफ्तरों में होने वाले फीका का उद्देश्य कंपनी से संबंधित बातें करना या फिर कोई मीटिंग करना नहीं बल्कि आपसी मेलजोल बढ़ाने और सहकर्मियों को नज़दीक से जानने का मौका होता है। वहीं टीम को मज़बूत बनाने का यह जरिया भी है। जहां कंपनी से लेकर समसामयिक तक सभी मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। 
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स्वीडन में फीका की परंपरा सालों पुरानी है। फीका का सीधा मतलब कॉफी से जुड़ा हुआ है, जिसे यहां कि कंपनियां बदस्तूर जारी रखना चाहती हैं। इसकी वजह से कार्यालयों में सहयोगी एक दूसरे से काम के साथ दूसरी बातों को सांझा करते और रूबरू होते हैं।

अमूमन दफ्तरों में दो दफा फीका का चलन है। एक सुबह नौ से दस के बीच और दूसरा दोपहर तीन बजे के आसपास। यानी रोजाना दफ्तर में दो बार कम से कम आधे घंटे का फीका ब्रेक लेना काफी सामान्य होता है।

इसके अलावा दिन के खाने के लिए एक ब्रेक। इन ब्रेक के लेने पर बॉस आपसे नाराज नहीं होंगे ना हीं आपकी छवि बिगड़ेगी बल्कि फीका में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित जरूर किया जाएगा। माना जाता है कि फीका ब्रेक से कर्मचारियों में काम करने का जोश दिनभर बना रहता है।  

स्वीडन में अधिकतर लोग कॉफी पीना पसंद करते हैं, इसलिए फीका में कॉफी का विशेष महत्व है। इसके साथ केक या कोई मीठा स्नैक्स फीका का खास मेन्यू होता है। जिसका स्वाद लेते हुए सहकर्मी देश दुनिया की बातें, सिनेमा, समाज, यात्रा जैसे सामान्य टॉपिक पर अपनी बातें रखते हैं।

इस तरह फीका की वजह से सहकर्मी के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध, काम करने के लिए बेहतर माहौल, कर्मचारियों को ऊर्जावान बनाने, उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। वैसे तो फीका के लिए कैफे या दफ्तर के कैंटीन से स्नैक्स खरीदने वाले ज्यादातर लोग होते हैं लेकिन कई ऐसे स्वीडिश भी मिलेंगे जो फीका के लिए घर से मीठे का इंतजाम करके लाते हैं।

स्वीडिश समाज में फीका का महत्व....

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नए दोस्तों के बनाने में भी फीका का बड़ा योगदान माना जाता है - फोटो : Social Media (सांकेतिक)

फीका में दफ्तर के कर्मचारी और बॉस दोनों के साथ में कॉफी पीना यहां के लिए कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी। ज्यादातर स्वीडिश फीका के लिए रोज कम से कम एक बार समय निकालना जरूरी मानते हैं।

इस वजह से दोस्तों और सहयोगियों से रोजाना बातचीत करने का अवसर बना रहता है। वहीं नए दोस्तों के बनाने में भी फीका का बड़ा योगदान माना जाता है। हालांकि फीका घर पर, परिवार के लोगों और दोस्तों के साथ भी इसी तरह से किया जाता है। कहा जाता है कि अगर आप किसी को ज्यादा बेहतर तरीके से जानना चाहते हैं या पहचान बढ़ाना चाहते हैं तो फीका के लिए जरूर जाएं।

एक ओर स्वीडिश जहां अपने खानपान और स्वास्थ्य देखभाल को लेकर काफी सजग माने जाते हैं तो वहीं कॉफी और मीठे खाद्य पदार्थों की खपत के मामले में भी वे काफी आगे हैं। इसकी एक खास वजह यहां का फीका कल्चर है।

यहां केक के अलावा फीका पर मीठे बन को खाना भी लोग काफी पसंद करते हैं। बन जिसे बुले भी कहते हैं। दालचीनी और इलायची के स्वाद वाले बुले को यहां का पसंदीदा स्वीट स्नैक्स भी माना जा सकता है। यहां के सभी कैफे व रेस्तरां में यह बड़ी आसानी से मिल जाता है।

अब आप सोचेंगे कि कॉफी या चाय के साथ मीठा कैसे खाया जा सकता है। भारत में जहां चाय के साथ नमकीन खाने का चलन है, वहीं इसके उलट गर्मपेय पदार्थों के साथ यहां मीठा खाने का चलन। इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह हो सकता है कि भारत में ज्यादातर लोग मीठी चाय पीते हैं।

बिना चीनी वाली चाय के शौकीन अब भी काफी कम है। लेकिन स्वीडन में मीठी चाय -कॉफी पीने वाले बहुत कम लोग हैं। मुमकिन है कि इसी वजह से उन्हें कॉफी के साथ केक या बुले खाना पसंद आता हो। कुछ स्वीडिश फीका के लिए कॉफी या केक का होना जरूरी नहीं समझते हैं। इसकी जगह चाय, कोई दूसरा पेय पदार्थ और मनपसंद स्नैक्स को भी लिया जा सकता है। 
 

  • डिजिटल फीका

स्वीडिश समाज में फीका का महत्व आप इसी से समझिए कि कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए भले ही अधिकांश लोग घर से ही दफ्कर के कामकाज निपटा रहे हैं, लेकिन फीका अब भी उनके रोजमर्रा का खास हिस्सा है।

यही वजह है कि सहकर्मी डिजिटल फीका कर रहे हैं। यानी लोग तय समय पर काम से फीका ब्रेक लेकर कंप्यूटर के जरिए एक दूसरे से मिलते और बातें करते हैं। यह समय उनके काम से ब्रेक लेना का होता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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