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जानिए, क्यों आम बजट से अलग पेश किया जाता रहा रेल बजट?
Wed, 21 Sep 2016 08:36 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 21 Sep 2016 08:36 PM IST
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रेल
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बजट को लेकर चली आ रही करीब 92 सालों की परंपरा अब खत्म हो जाएगी। अब रेल बजट को आम बजट से अलग पेश नहीं किया जाएगा। यानी अब आम और रेल बजट एक ही बजट में पेश किए जाएंगे।
फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया, 'बजट पेश करने की तारीख पर फैसला विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।' जाहिर है आज के फैसले के बाद लोगों के मन में ये सवाल जरूर उठा होगा की अब तक ऐसा क्यों होता रहा कि दोनों बजट को अलग-अलग पेश किया जाता रहा।
आएं जानें वो कारण जिस वजह से रेल बजट अलग से होता रहा पेश
रेलवे के मैनेजमेंट में बदलाव:
1921 में ईस्ट इंडिया रेलवे कमेटी के चेयरमैन सर विलियम एक्वर्थ रेलवे को एक बेहतर मैनेजमेंट सिस्टम में लाए थे। इसके बाद उन्होंने 1924 में इसे आम बजट से अलग पेश करने का फैसला किया तब से लेकर पिछले बजट वह अलग ही पेश होता रहा है।
70 फीसदी हिस्सेदारी के कारण बदला गया फार्मेट:
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Train
रेल बजट की हिस्सेदारी 1924 के आम बजट में करीब 70 फीसदी थी। इतनी बड़ी हिस्सेदारी को देखकर ही इसे आम बजट से अलग करने का विलियम के प्रस्ताव को स्वीकार लिया गया।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में:
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Train with overloaded passenger
आम बजट में इतनी बड़ी हिस्सेदारी के पीछे मुख्य कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 75 फीसदी रेलवे की भागीदारी थी। इसके अलावा माल ढुलाई में 90 फीसदी तक का योगदान होता था।
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44 प्रतिशत कर्मचारी:
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Loco
रेलवे देश की सबसे बड़ी न्योक्ता है। वर्ष 2009 में अखिल भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा एसोसिएशन की रिपोर्ट में रेलवे के कर्मचारी कुल केंद्रीय कर्मचारियों का 44 फीसदी हैं।
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बढ़ रहा है रेवेन्यू :
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सुरेश्ा
भारतीय रेलवे ने वर्ष 2013-14 में 23 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू अर्जित किया। जिसमें से करीब 2.5 बिलियन डॉलर का उसे प्रॉफिट हुआ। रेलवे का क्षेत्र दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है।
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