इंसान की सोच ने रोबोट बनाया। अब रोबोट खुद सोचेंगे। उनके यहां गुस्सा भी होगा, प्यार भी। निर्माण भी होगा और संहार भी। एक नई दुनिया बसने वाली है। उस नई दुनिया में इंसान की सत्ता होगी या रोबोट की?
एक नई दुनिया बसने वाली है... इंसान की सत्ता होगी या रोबोट की?
पिछले साल, जापान में तोशिबा कंपनी ने मित्सुकोशी डिपार्टमेंटल स्टोर में ग्राहक सेवा के लिए 'एको चिहिरा' नाम का एक रोबोट खड़ा किया, जो हूबहू इंसानों की तरह दिखता है। इससे वहां सनसनी पैदा हो गई थी कि वह इतना जीवंत दिखता था कि ग्राहक उसे इंसान समझ बैठते थे। इससे पहले फ्रांसीसी रोबोटिक्स कंपनी एल्डेबेरन रोबोटिक्स ने पेपर नाम का एक और रोबोट बनाया, जो मानवों के साथ रहने के लिए डिजाइन किया गया। यह पहला ह्यूम्नोइड भावनात्मक रोबोट था। पेपर किसी की भावनात्मक स्थिति की पहचान कर सकता है और उसका उत्तर भी दे सकता है।
उदाहरण के लिए यदि वह आपको उदास देखता है, तो वह आपकी भावनाओं को देखकर, अपनी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता से कुछ हद तक आपको भावनात्मक सांत्वना देता है। जबकि हम जानते हैं कि यह एक रोबोट है, जो हमारी भावनाओं को शारीरिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से समझकर उन पर प्रतिक्रिया करता है। ये प्रतिक्रिया सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की हो सकती है। आजकल कुछ ऐसे रोबोट्स को हेल्थ सेक्टर में प्रयोग किया जा रहा है, जहां उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे मरीजों को अनुरोधों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया ही देंगे। चीजें बहुत ही तेजी से बदलती जा रही हैं। चूंकि, पेपर जैसे रोबोट मात्र 1600 डॉलर से भी सस्ते में लोगों को मिल रहे हैं, जिन्हें हम जल्द ही अपने घरों में रख सकते हैं। ये संभावित रूप से हमारे दफ्तरों में हमारी मदद भी कर सकते हैं।
शुरुआत में, इन्हें एक रोमांच के रूप में देखा जाता है। हर कोई इनके साथ बातचीत करना चाहता है, जिससे हमें अच्छा महसूस होता है और यह घर या दफ्तर के ज्यादातर काम कर सकता है। हालांकि, जैसा कि हम इन रोबोट्स के साथ बंधन में रहते हैं। क्या हम हमारे रिश्तों को कुछ और अधिक गंभीर या शायद दोस्ती में भी बदल सकते हैं? 1950 में, एलन ट्यूरिंग ने ‘ट्यूरिंग टेस्ट’ की शुरुआत की, जिसमें इंसान के समान मशीन के बुद्धि व्यवहार का परीक्षण किया गया। एलन ट्यूरिंग ने प्रस्तावित किया कि मानव मूल्यांकनकर्ता (ट्यूरिंग टेस्ट) एक मानव और एक मशीन के बीच प्राकृतिक भाषा की बातचीत को दर्शाएगा, जो मानवीय प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इसमें मूल्यांकनकर्ता को पता होगा कि बातचीत में दो भागीदारों में से एक मशीन है और बातचीत केवल एक भागीदार केवल एक चैनल जैसे कंप्यूटर कीबोर्ड और स्क्रीन तक ही सीमित होगा, ताकि परिणाम मशीन की क्षमता पर निर्भर न हो। यदि मूल्यांकनकर्ता मशीन के माध्यम से मानव के लिए भरोसेमंद है, तो मशीन ने परीक्षण पास किया है। यह परीक्षण प्रश्नों के सही उत्तर देने की क्षमता की जांच नहीं करता है, केवल इंसान के समान कितनी बारीकी से उत्तर देता है, इसपर निर्भर करता है।