आज भारत समेत विश्व के अधिकांश देशों में लोकतांत्रिक शासन प्रणाली है। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था से पहले राजतंत्र की व्यवस्था थी, जिसमें राजा लोग अपने वर्चस्व को कायम रखने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहते थे। कुछ लोग शांति बनाए रखते हुए हुकूमत करना चाहते थे, तो वहीं कुछ लोग इसके लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर देते थे। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे क्रूर शासक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे लोगों के द्वारा शांति और इंसानियत के दुश्मन की संज्ञा दी जाती है।
दुनिया का वो क्रूर शासक, जिसने हजारों जिंदा लोगों को चुनवा कर बनवा दी थी मीनार
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हम चौदहवीं शताब्दी के शासक तैमूर लंग के बारे में बात कर रहे हैं। 1369 ई. में समरकंद के अमीर के रूप में अपने पिता के सिंहासन पर बैठने के बाद तैमूर विश्व -विजय के लिए निकल पड़ा। कई देशों को विजित करते हुए तैमूर ने 1398 ई. में भारत में आक्रमण किया और दिल्ली तक बढ़ आया। इतिहास की मानें तो वह दिल्ली में केवल 15 दिनों तक रुका था। सैनिकों के साथ उसने जमकर लूटपाट की और सारा माल लेकर अपने वतन वापस लौट गया।
भारत पहले से ही अपनी समृद्धि और वैभव के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय था। इस वजह से यह देश हमेशा आक्रमणकारियों के निशाने पर रहा। तैमूर लंग ने भी भारत के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। इसलिए यहां की दौलत लुटने के लिए उसने आक्रमण की योजना बनाई। भारत में तैमूर लंग ने दौलत तो काफी लूटी लेकिन साथ ही अंत में जब वह दिल्ली से वापस समरकंद के लिए रवाना हो रहा था, तो जाते-जाते अनेक जवान और बंदी बनाई गई औरतों और शिल्पियों को भी अपने साथ ले गया।
वैसे तैमूर लंग ने गेज खां की पद्धति को अपना रखी थी, लेकिन क्रूरता और निष्ठुरता के मामले में वो चंगेज खां से भी एक कदम आगे निकल गया था। इतिहास में तैमूर लंग को एक खूनी योद्धा की संज्ञा दी गई है। तैमूर जब भी जंग के लिए मैदान में उतरता तो बड़ी गिनती मे लाशे बिछा देता था। कहते हैं, एक जगह उसने दो हजार जिंदा आदमियों की एक मीनार बनवाई और उन्हें ईंट और गारे में चुनवा दिया।
तैमूर से तैमूर लंग बनने की कहानी
तैमूर लंग का नाम पहले केवल तैमूर था। नाम के पीछे लंग जुड़ने की कहानी उसके जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार युवावस्था में तैमूर के शरीर का दाहिना हिस्सा बुरी तरह घायल हो गया था। इतिहासकारों की माने तो तैमूर की यह हालत एक हादसे के कारण हुई थी। तैमूर भाड़े के मजदूर के तौर पर खुराशान में पड़ने वाले खानों में काम करता था। इसी खान में एक हादसे के दौरान वह जख्मी हो गया था।