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वो खतरनाक महिला शूटर, जिससे डरती थी हिटलर की फौज

Tue, 01 Sep 2020 10:15 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 01 Sep 2020 10:15 PM IST
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world deadliest female shooter Lyudmila Pavlichenko who terrorized Hitler Nazi army
Lyudmila Pavlichenko - फोटो : सोशल मीडिया

ये कहानी उस लड़की की है, जिसे इतिहास की सबसे खतरनाक निशानेबाज का दर्जा हासिल है और जिसने हिटलर की नाजी फौज की नाक में दम कर दिया था। सिर्फ 25 साल की उम्र में ल्यूडमिला ने 309 लोगों को अपना शिकार बनाया था, जिनमें से ज्यादातर हिटलर के सैनिक थे। ये उन दिनों की बात है, जब द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था और ल्यूडमिला पवलिचेंको 1942 में वॉशिंगटन पहुंचीं।



हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि सोवियत संघ ने ल्यूडमिला को प्रोपेगैंडा के तहत इस्तेमाल किया। यहां तक की उन्हें सोवियत हाई कमान की ओर से अमेरिका भेजा गया। उन्हें भेजने का मकसद वेस्टर्न यूरोपियन फ्रंट पर अमेरिका का समर्थन हासिल करना था। जोसफ स्टालिन चाहते थे कि मित्र देशों की सेना यूरोप पर आक्रमण करे और वे इसके लिए उतावले भी थे।

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Lyudmila Pavlichenko - फोटो : सोशल मीडिया

अमेरिका यात्रा
स्टालिन चाहते थे कि जर्मनों पर अपनी सेना को बांटने का दबाव बनाया जाए, जिससे सोवियत सेना पर उनकी ओर से आ रहा दबाव कम हो जाए। स्टालिन की ये मंशा तीन साल बाद तक पूरी नहीं हुई। इसी मिशन को दिमाग में रखकर पवलिचेंको ने व्हॉइट हाउस में कदम रखा। ऐसा करने वाली वो पहली सोवियत थीं, जिसे राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने रिसीव किया। ल्यूडमिला पवलिचेंको ने राष्ट्रपति रूजवेल्ट की पत्नी एलेनोर रूजवेल्ट के साथ पूरे देश की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अमेरिकियों से महिला होते हुए युद्ध में शामिल होने के अपने अनुभव साझा किए।

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Lyudmila Pavlichenko - फोटो : सोशल मीडिया

शूटिंग क्लब से रेड आर्मी तक का सफर
14 साल की कच्ची उम्र में ल्यूडमिला पवलिचेंको कीव का पाला हथियारों से पड़ा। वो अपने परिवार के साथ यूक्रेन में अपने पैत्रिक गांव से कीव आकर बस गई थीं। हेनरी साकैडा की किताब 'हीरोइन्स ऑफ द सोवियत यूनियन' के मुताबिक पवलिचेंको एक हथियारों की फैक्ट्री में काम करती थीं। उन्होंने फैसला किया कि वो ओसोआवियाजिम शूटिंग एसोसिएशन में दाखिला लेंगी, जहां उन्हें हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जाएगी। अमेरिकी यात्रा के दौरान पवलिचेंको ने बताया, "जब मेरे पड़ोस में रहने वाला एक लड़का शूटिंग करके शेखी बघार रहा था, तभी मैंने ठान लिया कि एक लड़की भी ऐसा कर सकती है। इसके लिए मैंने कड़ा अभ्यास किया।"

कुछ दिन में ही पवलिचेंको ने हथियार चलाने में महारत हासिल कर ली। 22 जून, 1941 में जर्मनी ने जर्मन-सोवियत के बीच की आक्रमण ना करने की संधि को तोड़ दिया और ऑपरेशन बारबरोसा शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत जर्मनी ने सोवियत संघ पर आक्रमण कर दिया।

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Lyudmila Pavlichenko - फोटो : सोशल मीडिया

मिलिट्री ट्रेनिंग
ल्यूडमिला पवलिचेंको ने अपने देश की रक्षा के लिए कीव के विश्वविद्यालय में चल रही इतिहास की पढ़ाई छोड़कर आर्मी में जाने का फैसला किया। आर्मी में पहले तो उन्हें लेने से इनकार कर दिया गया। लेकिन जब उन्होंने निशानेबाजी में अपना हुनर दिखाया, तो आर्मी वालों ने उन्हें रेड आर्मी के साथ ऑडिशन का मौका दिया। 'स्नाइपर इन एक्शन' नाम की निशानेबाजों पर अपनी किताब में चार्ल्स स्ट्रोंज ने पवलिचेंको के हवाले से लिखा, "मैंने कीव के एक स्कूल में बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी, जहां मैंने रिजनल टूर्नामेंट में बैज जीता था।"

ऑडिशन में पवलिचेंको को एक राइफल दी गई और दो उन रोमन सैनिकों पर निशाना लगाने के लिए कहा गया, जो जर्मनी के लिए काम कर रहे थे। पवलिचेंको ने बड़ी आसानी से निशाना लगा दिया। इससे उन्हें 25वीं में चपायेव फूसीलियर्स डिवीजन में एंट्री मिल गई।

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Lyudmila Pavlichenko - फोटो : सोशल मीडिया

'मरे हुए नाजी नुकसान नहीं पहुंचाते'
सेना में रहते हुए उन्होंने ग्रीस और मोलदोवा की लड़ाइयों में हिस्सा लिया। पवलिचेंको ने जल्द ही सेना में खास छवि बना ली। युद्ध के पहले 75 दिनों में ही उन्होंने 187 नाजी सैनिकों को मार गिराया। आज के यूक्रेन के दक्षिण में बसे ओडेसा के युद्ध में खुद को साबित करने के बाद उन्हें सेवास्टोपोल के युद्ध को लड़ने के लिए क्राइमिया भेज दिया गया। (30 अक्टूबर, 1941 से 4 जुलाई 1942)

सेवास्टोपोल के युद्ध में उन्हें कई चोटें आईं, लेकिन उन्होंने तब तक मैदान नहीं छोड़ा, जब तक नाजी आर्मी ने उनकी पोजीशन को बम से उड़ा नहीं दिया और उन्हें चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। कई उपलब्धियों के चलते उन्हें लेफ्टिनेंट पद पर पदोन्नति मिली और उन्होंने दूसरे निशानेबाजों को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद ही उन्हें वॉशिंगटन भेजा गया। अमेरिका की यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था, "जिंदा रहने वाला हर जर्मन महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों को मार देगा। इसलिए एक नाजी को मारने पर मैं कई जानें बचाती हूं।"

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