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जब मिलने लगे ये 3 चेतावनियां, समझ जाएं, पेट्रोल-डीजल होने वाला है महंगा
बीबीसी, हिंदी
Updated Thu, 31 May 2018 08:18 AM IST
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ये पेंडुलम की तरह चल रहा है लेकिन दूसरे उतार-चढ़ाव के बनिस्बत ये ही कुछ ही घंटों में किसी इकोनॉमी के अरबों डॉलर डुबो सकता है। पिछले साल की तुलना में तेल की क़ीमत 50 फीसदी तक बढ़ गई हैं। लेकिन इस मई में जब तेल 80 डॉलर प्रति बैरल की कीमत को पार कर गया तो ये नवंबर, 2014 के बाद की सबसे ऊंची कीमत थी। ये खतरे की घंटी जैसा था।
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तेल की कीमतों पर नजर रखने वाले जानकार अब ये कहने लगे हैं कि सस्ते तेल के दिन लदने अब शुरू हो गए हैं। ईरान पर अमरीकी प्रतिबंधों के संभावित असर को कीमतों में आई छलांग की एक बड़ी वजह के तौर पर देखा जा रहा है। गोल्डमैन सैक्स बैंक ने हाल ही में कहा था कि तेल की मांग आने वाले समय में बढ़ेगी।
तेल का बाजार
और अमरीकी बैंक मॉर्गन स्टैनली जैसी वित्तीय संस्थाएं पहले ही क़ीमत बढ़ने की भविष्यवाणी कर चुके हैं. अब दोनों बातें सामने होती हुई दिख रही हैं। हालांकि ये हमेशा से होता आया है कि तेल का बाजार अनिश्चितताओं भरा रहता है और इसमें कीमतों के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
सऊदी अरब और रूस जैसे तेल बेचने वाले देश मिले-जुले इशारे देते रहे हैं। सेंट पीट्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में इस साल तेल के उत्पादन में कटौती पर सहमति बनी थी। हालांकि जानकार लोगों ने इस घोषणा को ज्यादा अहमियत नहीं दी। बीबीसी ने उन तीन कारणों की पड़ताल की है जो ये बताते हैं कि सस्ता तेल अब बीते जमाने की बात है।
तेल का बाजार
और अमरीकी बैंक मॉर्गन स्टैनली जैसी वित्तीय संस्थाएं पहले ही क़ीमत बढ़ने की भविष्यवाणी कर चुके हैं. अब दोनों बातें सामने होती हुई दिख रही हैं। हालांकि ये हमेशा से होता आया है कि तेल का बाजार अनिश्चितताओं भरा रहता है और इसमें कीमतों के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
सऊदी अरब और रूस जैसे तेल बेचने वाले देश मिले-जुले इशारे देते रहे हैं। सेंट पीट्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में इस साल तेल के उत्पादन में कटौती पर सहमति बनी थी। हालांकि जानकार लोगों ने इस घोषणा को ज्यादा अहमियत नहीं दी। बीबीसी ने उन तीन कारणों की पड़ताल की है जो ये बताते हैं कि सस्ता तेल अब बीते जमाने की बात है।
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पहला कारण: तेल की आपूर्ति में कटौती
दुनिया को तेल बेचने वाले देश आपूर्ति में कटौती की एक योजना पर सख्ती से अमल कर रहे हैं। इसके लिए 17 महीने की मियाद तय की गई है। उनका इरादा तेल के उत्पादन को 1.8 मिलियन बैरल प्रति दिन के पैमाने तक ले जाने का है। दरअसल, वो चाहते हैं कि दुनिया में तेल की मांग बढ़े और साथ ही कीमतें भी।
सऊदी अरब की अगुवाई में हो रही इस कवायद की ट्रंप प्रशासन ने आलोचना की है. अमरीका का कहना है कि इससे क़ीमतों में बनावटी इजाफा किया जा रहा है। हालांकि सऊदी अरब इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि तेल बचाकर रखने वाले देशों के भंडार भी खत्म होने वाले हैं।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी सेंटर के रिसर्चर एंटनी हाल्फ कहते हैं, "बड़े तेल भंडार जिनकी वजह से तेल की कीमतें काबू में थीं, अब ख़त्म हो चले हैं।"सऊदी अरब-रूस के बीच जिस योजना पर आपूर्ति बनी है, वो इस साल के आखिर तक जारी रहने की संभावना है। उम्मीद है कि इसके नतीजे अगले साल तक ऐसे ही रहेंगे।
दुनिया को तेल बेचने वाले देश आपूर्ति में कटौती की एक योजना पर सख्ती से अमल कर रहे हैं। इसके लिए 17 महीने की मियाद तय की गई है। उनका इरादा तेल के उत्पादन को 1.8 मिलियन बैरल प्रति दिन के पैमाने तक ले जाने का है। दरअसल, वो चाहते हैं कि दुनिया में तेल की मांग बढ़े और साथ ही कीमतें भी।
सऊदी अरब की अगुवाई में हो रही इस कवायद की ट्रंप प्रशासन ने आलोचना की है. अमरीका का कहना है कि इससे क़ीमतों में बनावटी इजाफा किया जा रहा है। हालांकि सऊदी अरब इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि तेल बचाकर रखने वाले देशों के भंडार भी खत्म होने वाले हैं।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी सेंटर के रिसर्चर एंटनी हाल्फ कहते हैं, "बड़े तेल भंडार जिनकी वजह से तेल की कीमतें काबू में थीं, अब ख़त्म हो चले हैं।"सऊदी अरब-रूस के बीच जिस योजना पर आपूर्ति बनी है, वो इस साल के आखिर तक जारी रहने की संभावना है। उम्मीद है कि इसके नतीजे अगले साल तक ऐसे ही रहेंगे।
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दूसरा कारण: ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध
एलेन आर वाल्ड राजनीति और ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ हैं। वे 'सऊदी इंक' नाम से किताब भी लिख चुके हैं। उनका कहना है कि ईरान का मुद्दा तेल की कीमतों में हालिया हुए इजाफे का एक बड़ा कारण है। एलेन आर वाल्ड राजनीति यमन और सीरिया में चल रही लड़ाई को तेल की कीमतों में वृद्धि से जोड़ने की दलील को सिरे से खारिज करते हैं। वे कहते हैं कि ये दोनों देश तेल के अहम उत्पादक नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "दरअसल ईरान पर प्रतिबंधों की आशंका के बाद से ही तेल की कीमतें चढ़ने लगी थीं और जब इन प्रतिबंधों की घोषणा हुई तो कीमतें एक बार फिर बढ़ीं।""फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि तेल बाजार से कितना ईरानी तेल कम होगा लेकिन एक अंदाजा है कि प्रतिदिन दो लाख बैरल से दस लाख बैरल तक कमी आएगी। जिस तरह की अनिश्चितता का माहौल है, उसके मद्देनजर ट्रंप के फैसले के संभावित असर पर सवाल उठाने वालों में वाल्ड अकेले शख्स नहीं हैं।
एंटनी हाल्फ के मुताबिक, "इसमें कोई शक नहीं कि ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगाने के ट्रंप प्रशासन के फैसले से तेल की कीमतें बढ़ी हैं", "लेकिन तेल की बिक्री से ईरान को होने वाली कमाई पर कितना असर पड़ेगा, ये देखना अभी बाकी है।"
एलेन आर वाल्ड राजनीति और ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ हैं। वे 'सऊदी इंक' नाम से किताब भी लिख चुके हैं। उनका कहना है कि ईरान का मुद्दा तेल की कीमतों में हालिया हुए इजाफे का एक बड़ा कारण है। एलेन आर वाल्ड राजनीति यमन और सीरिया में चल रही लड़ाई को तेल की कीमतों में वृद्धि से जोड़ने की दलील को सिरे से खारिज करते हैं। वे कहते हैं कि ये दोनों देश तेल के अहम उत्पादक नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "दरअसल ईरान पर प्रतिबंधों की आशंका के बाद से ही तेल की कीमतें चढ़ने लगी थीं और जब इन प्रतिबंधों की घोषणा हुई तो कीमतें एक बार फिर बढ़ीं।""फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि तेल बाजार से कितना ईरानी तेल कम होगा लेकिन एक अंदाजा है कि प्रतिदिन दो लाख बैरल से दस लाख बैरल तक कमी आएगी। जिस तरह की अनिश्चितता का माहौल है, उसके मद्देनजर ट्रंप के फैसले के संभावित असर पर सवाल उठाने वालों में वाल्ड अकेले शख्स नहीं हैं।
एंटनी हाल्फ के मुताबिक, "इसमें कोई शक नहीं कि ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगाने के ट्रंप प्रशासन के फैसले से तेल की कीमतें बढ़ी हैं", "लेकिन तेल की बिक्री से ईरान को होने वाली कमाई पर कितना असर पड़ेगा, ये देखना अभी बाकी है।"
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तीसरा कारण: वेनेजुएला में तेल उत्पादन में कमी
वेनेजुएला के राजनीतिक संकट का खामियाजा उसके तेल उद्योग को काफी हद तक भुगतना पड़ा है। पिछले दो साल में उसके उत्पादन में एक तिहाई कटौती हुई है। फ्रैंसिस्को मोनाल्डी ह्यूस्टन की राइस यूनिवर्सिटी में लातिन अमरीका की ऊर्जा नीति के जानकार हैं।
वे बताते हैं कि सरकार और बाज़ार को तेल के उत्पादन में जितनी कटौती की उम्मीद थी, उससे छह गुणा ज्यादा कमी हुई है। ये गिरावट उम्मीद से ज्यादा तेज हुई है।
ऊर्जा मामलों की जानकार अमृता सेन बताती हैं कि वेनेजुएला अब भी 14 लाख बैरल तेल का प्रति दिन उत्पादन करता है, इसमें जरा भी कमी हुई तो कीमत चढ़ेगी। उन्होंने बताया कि पिछले साल भर के भीतर वेनेजुएला में दस लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन कम हुआ है और इस लिहाज से कीमतें बढ़ने में उसका भी योगदान है।
वेनेजुएला के राजनीतिक संकट का खामियाजा उसके तेल उद्योग को काफी हद तक भुगतना पड़ा है। पिछले दो साल में उसके उत्पादन में एक तिहाई कटौती हुई है। फ्रैंसिस्को मोनाल्डी ह्यूस्टन की राइस यूनिवर्सिटी में लातिन अमरीका की ऊर्जा नीति के जानकार हैं।
वे बताते हैं कि सरकार और बाज़ार को तेल के उत्पादन में जितनी कटौती की उम्मीद थी, उससे छह गुणा ज्यादा कमी हुई है। ये गिरावट उम्मीद से ज्यादा तेज हुई है।
ऊर्जा मामलों की जानकार अमृता सेन बताती हैं कि वेनेजुएला अब भी 14 लाख बैरल तेल का प्रति दिन उत्पादन करता है, इसमें जरा भी कमी हुई तो कीमत चढ़ेगी। उन्होंने बताया कि पिछले साल भर के भीतर वेनेजुएला में दस लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन कम हुआ है और इस लिहाज से कीमतें बढ़ने में उसका भी योगदान है।