आपने शिव मंदिर और विष्णु भगवान के मंदिर तो कई देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी सास-बहू का मंदिर देखा है। आपको इस तरह के मंदिर के बारे में जानकर हैरानी तो हो रही होगी, लेकिन हम आपको बता दें कि यह बिल्कुल सच है। यह मंदिर राजस्थान के उदयपुर में है। इस मंदिर के निर्माण की कहानी बड़ी ही रोचक है।
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Saas Bahu Temple Udaipur
- फोटो : Social media
सास बहू का मंदिर उदयपुर के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों में से एक है। बहू का मंदिर, सास के मंदिर से थोड़ा छोटा है। 10वीं सदी में निर्मित सास-बहू का मंदिर अष्टकोणीय आठ नक्काशीदार महिलाओं से सजायी गई छत है। मंदिर की दीवारों को रामायण की विभिन्न घटनाओं के साथ सजाया गया है। मूर्तियों को दो चरणों में इस तरह से व्यवस्थित किया गया है कि वो एक-दूसरे को घेरे रहती हैं।
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सास-बहू के इस मंदिर में एक मंच पर त्रिमूर्ति यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश की छवियां खुदी हुई हैं, जबकि दूसरे मंच पर राम, बलराम और परशुराम के चित्र लगे हुए हैं। कहते हैं कि मेवाड़ राजघराने की राजमाता ने यहां भगवान विष्णु का मंदिर और बहू ने शेषनाग के मंदिर का निर्माण कराया था। सास-बहू के द्वारा निर्माण कराए जाने के कारण ही इन मंदिरों को 'सास-बहू के मंदिर' के नाम से पुकारा जाता है।
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Saas Bahu Temple Udaipur
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1100 साल पहले इस मंदिर का निर्माण राजा महिपाल और रत्नपाल ने करवाया था। सास-बहू के इस मंदिर के प्रवेश-द्वार पर बने छज्जों पर महाभारत की पूरी कथा अंकित है, जबकि इन छज्जों से लगे बायें स्तंभ पर शिव-पार्वती की प्रतिमाएं हैं। हालांकि आज दोनों ही मंदिरों के गर्भगृहों में से देव प्रतिमाएं गायब हैं।
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सास-बहू के इस मंदिर में भगवान विष्णु की 32 मीटर ऊंची और 22 मीटर चौड़ी प्रतिमा है। यह प्रतिमा सौ भुजाओं से युक्त है, इसलिए इस मंदिर को सहस्त्रबाहु मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। सास-बहू के दोनों मंदिरों के बीच में ब्रह्मा जी का भी एक छोटा सा मंदिर है।