सभी देशों में यातायात के लिए रेलवे सबसे सुगम और महत्वपूर्ण साधन है। जहां लाखों लोग काम करते हैं। लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जहां रेलवे की जिम्मेदारी बच्चों पर है। बच्चे ही वहां की ट्रेनें चलाते हैं। यूरोप के देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के ऊपरी हरी पहाड़ियों के जंगलों में एक रेलवे स्टेशन है। ये रेलवे स्टेशन हर तरफ से वुडलैंड के गहरे जंगल से घिरा हुआ है। लेकिन ये रेलवे पूरी दुनिया में इन कारणों से बल्कि दूसरे वजहों से जाना जाता है। क्योंकि इस रेलवे स्टेशन को चलाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से बच्चों पर है।
रेलवे टिकट कार्यालय, डीजल इंजन, सिग्नल गार्ड और एक समय सारिणी है। सभी की जिम्मेदारियां बच्चों पर ही हैं। आपको बता दें कि पिछले साल ही रेलवे ने अपनी 70वीं वर्षगांठ मनाया। इस खास कार्यक्रम के दौरान यंगस्टर ऑफ गिएर्मेक्वास रेलवे स्टेशन पर बच्चे अपने लाल, नीले और सफेद रंग की वर्दी में बिल्कुल ही अलग अंदाज में नजर आ रहे थे।
इस दौरान सभी ने रेलवे स्टेशन पर बच्चों की कुशलतापूर्वक टिकट बेचते देखा। ये बच्चे ट्रेनों की जांच करते हैं और स्टेशन से ट्रेन निकलते समय सलामी करते हैं। सबसे खास बात यह है कि बच्चों को यह सबकुछ करने में बहुत मजा आता है। ये ट्राम लाइन दुनिया की सबसे तेज़ और पुरानी ट्राम लाइन है। खास बात ये है कि ये लाइन पूरी तरह से बच्चों के कंट्रोल में है। ये स्कूली बच्चे ही इसे चलाते हैं।
आपको बता दें कि ये ट्रेन साम्यवाद के दिनों की याद दिलाती है। जब हंगरी, सोवियत संघ का एक उपग्रह राज्य हुआ करता था। उस दौरान बच्चों को एक साथ काम करने और जिम्मेदारी सिखाने के लिए पायनियर रेलवे की शुरुआत की गई थी। उस वक्त नाबालिगों ने व्यस्कों की अंतर्गत रेलवे में काम करना शुरू कर दिया था।
यही कारण है कि रेलवे स्टेशन को आज भी उसी तरह से संचालित किया जाता है। हालांकि इसमें थोड़ा बहुत अंतर भी है। क्योंकि कम्युनिस्ट सिद्धांत के बिना ये रेलवे खुद को गाइर्मेक्वास या चिल्ड्रन्स रेलवे के रूप में आगे बढ़ा रहा है। यहां के स्थानीय बच्चों को लगभग 15 दिनों में एक दिन रेलवे में काम करना पड़ता है।