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हैरतअंगेज खुलासा: कौवे भी समझते हैं 'जीरो का मतलब', नई स्टडी में दावा

Wed, 16 Jun 2021 04:36 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Wed, 16 Jun 2021 04:36 PM IST
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crows understand concept of zero claim in study
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कौवे को सबसे चालाक पक्षी माना जाता है। बचपन में आपने चालाक कौवे की कहानी भी पढ़ी होगी, जिसमें एक प्यासा कौवा घड़े में कंकड़ डाल-डाल कर पानी को ऊपर लाता है। फिर अपनी प्यास बुझाता है। भले ही इस पक्षी की खोपड़ी में बहुत छोटा दिमाग हो, लेकिन ये जीरो का मतलब भी समझता है। इस बात का खुलासा हाल ही में एक स्टडी में हुआ है। वैसे जीरो की अवधारणा पांचवीं सदी में या उससे थोड़ा पहले दी गई थी। हालांकि, ये बात काफी हैरान करने वाली है कि कौवे भी इस अवधारणा को समझते हैं। जबकि, ना ही कभी इस पक्षी को जीरो के बारे ट्रेनिंग दी गई है और ना ही पढ़ाया गया है। ऐसे में ये कैसे संभव हो सकता है कि कौवे भी जीरो के बारे में समझते हैं। आइए पहले हम जीरो की अवधारणा को समझते हैं।


 

जीरो में किसी भी अन्य संख्या को जोड़ दिया जाए, घटा दिया जाए, गुणा या भाग कर दिया जाए, लेकिन जीरो का अस्तित्व कभी खत्म नहीं होता है।

crows understand concept of zero claim in study
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

जर्मनी स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ तुबिनजेन में इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोबायोलॉजी में एनिमल फिजियोलॉजी के प्रोफेसर आंद्रिया निएडेर का कहना है कि कोई भी गणितज्ञ जीरो की खोज को बड़ा अचीवमेंट मानते हैं। हालांकि, जीरो के बारे में सबसे खास बात ये है कि आम दिनचर्या की गिनतियों में जीरो कहीं नहीं शामिल होता है। जैसे- अगर किसी बास्केट में तीन सेब रखे हैं तो आप उसे एक, दो, तीन करके गिनेंगे।

crows understand concept of zero claim in study
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आंद्रिया निएडेर कहते हैं कि जीरो भले ही खालीपन को भी दर्शाता है, लेकिन कौवे के संबंध में ये बिल्कुल अलग है। अध्ययन के दौरान हमने जितनी बार कौवों के दिमाग को पढ़ने की कोशिश की तो पता चला कि वो अन्य संख्याओं की तरह ही जीरो को भी समझते हैं। कौवों के दिमाग की गतिविधि से ये स्पष्ट है कि वो एक से पहले जीरो को समझता है।
 

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crows understand concept of zero claim in study
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

द जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने कौवों के दिमाग का अध्ययन करने के लिए दो प्रयोग किए और इसके लिए दो नर कैरियन कौवे शामिल किए गए। एक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने कौवों को लकड़ी के टुकड़े पर बिठा दिया गया। हर प्रयोग में कौवों के सामने ग्रे रंग की स्क्रीन आई, जिसमें जीरो और चार काले डॉट्स एकसाथ निकल कर सामने आए।

 

इसके बाद कौवों को दूसरी संख्याओं के साथ भी डॉट्स दिखाए गए। कौवे स्क्रीन पर जैसे ही किसी दो तस्वीर को एक समान देखते, तो वो तुरंत स्क्रीन पर चोंच मारते या फिर उस इमेज के साथ अपना सिर हिलाते। अगर संख्या नहीं मिलती, तो वो चुपचाप बैठे रहते।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

साल 2015 में कौवों पर एक स्टडी हुई थी, जिसमें बाई बात सामने आई थी कि कौवे मिलती-जुलती तस्वीरों को और नहीं मिलने वाली तस्वीरों के बीच के अंतर को 75 फीसदी समझ लेते हैं। यह स्टडी प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित हुई थी।

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