वो अद्भुत है, अविश्वसनीय है, अकल्पनीय है। वो खुले आसमान में हवा के साथ कदमताल करता है। वो बिना थके, जमीन पर उतरे बिना एक महीने में 10 हजार किलोमीटर तक परवाज कर सकता है। और अपनी पूरी जिंदगी में 85 लाख किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। उसके तीन मीटर लंबे पंख उसे गजब की ताकत देते हैं। वो एक ही उड़ान में समुद्र का चक्कर लगा सकता है। वो है, एल्बाट्रॉस यानी एक विशेष प्रकार का समुद्री पक्षी जिसे बहुत जल्द एक नया काम मिलने वाला है।
समुद्री डाकुओं पर नजर रखेगा ये जीव, मछली चोरी रोकने में प्रशासन को पहुंचाएगा मदद
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प्रशासन की मदद
एल्बाट्रॉस अब समुद्र से मछली चुराने वालों और समुद्री डाकुओं की खबर लेगा और उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाने में प्रशासन की मदद करेगा। मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए जाल डालते हैं। लेकिन, बहुत बार उसमें अन्य पक्षी भी फंस जाते हैं। बायकैचिंग की वजह से ही हजारों समुद्री पक्षी हर साल मौत के मुंह में समा जाते हैं। पिछले कई दशकों में बार-बार बायकैचिंग का मुद्दा उठाया गया। खास तौर से एल्बाट्रॉस और समुद्र काक का मुद्दा उठाया गया जो सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
समुद्री लुटेरों पर नजर
पर्यवेक्षकों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बायकैचिंग करने वाली नौकाओं पर कड़ी नजर रखी गई। जिसके बाद एलबेट्रोस की बायकैचिंग में जबरदस्त गिरावट आई। इसके अलावा समुद्री लुटेरों पर नजर रखने के लिए दक्षिणी महासागर में सैन्य जहाज भी गश्त करते हैं। पर, सवाल ये है कि समुद्र में अवैध तरीके से मछलियां पकड़ने वाली नौकाओं की निगरानी कैसे की जाए? अब कौन कानून असरदार साबित हो रहा है, और कौन नहीं, इसकी निगरानी का कोई सुनिश्चित तरीका नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्र
इसलिए एल्बाट्रॉस की बायकैचिंग पर नजर रखना मुश्किल है। समुद्र में सभी देशों की अपनी सीमा होती है। उसके आगे समुद्र अंतरराष्ट्रीय है। वहां किसी भी देश के लिए निगरानी करना बहुत मुश्किल है। लेकिन, अब ये काम एल्बाट्रॉस करेंगे, जो 30 दिनों में 10 हजार किलोमीटर फासला तय करेंगे और समुद्री लुटेरों की मुखबिरी करेंगे। मछली पकड़ने की रेखाओं में फंसने की वजह से अक्सर एल्बाट्रॉस मर रहे थे। रिसर्चरों ने एल्बाट्रॉस और मछली पकड़ने की नौकाओं के बीच ओवरलैप का अध्ययन किया।
पक्षियों की बायकैचिंग
शोधकर्ताओं ने ये समझने का प्रयास किया कि समुद्री पक्षी मछली के संपर्क में कहां से आते हैं। साथ ही ये भी जाना कि कौन-सा पक्षी किस तरह की नाव सबसे ज्यादा पीछा करता है। इससे ये समझने में मदद मिली कि पक्षियों की बायकैचिंग सबसे ज्यादा कहां पर हो रही है। ऑन बोर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम से लिए गए डेटा की मदद से समुद्र में नौकाओं की मौजूदगी की मैपिंग संभव है। लेकिन ये रिकॉर्ड रियल टाइम नहीं होते। पहले रिसर्चरों को ये अंदाजा नहीं था कि मछली पकड़ने वाली नौकाओं के साथ और खुले में समुद्री पक्षी कितना समय बिताते हैं।