दिल्ली परिवहन विभाग का आरोप है कि लाइट मोटर व्हीकल (हल्के मोटर वाहन) (एलएमवी) या कार ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदक ऑटोमेटेड ट्रैक्स पर ड्राइविंग टेस्ट के लिए कारों के बजाय ऑटोरिक्शा का इस्तेमाल कर रहे हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली परिवहन विभाग ने इस मुद्दे को उठाया है कि एलएमवी ड्राइविंग लाइसेंस के कई आवेदक कारों के बजाय ऑटोरिक्शा के साथ ऑटोमेटेड ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट के लिए आ रहे थे। दिल्ली परिवहन विभाग ने कहा है कि यह राष्ट्रीय राजधानी में सड़क यातायात के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।
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Car Driving
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रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली परिवहन विभाग के एक इंटरनल कम्युनिकेशन ने इस मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कोई आवेदक ड्राइविंग टेस्ट के लिए ऑटोरिक्शा का इस्तेमाल करता है, भले ही ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन हल्के मोटर वाहन के लिए हो, तो ड्राइविंग टेस्ट अधिकारी गुण-दोष के आधार पर फैसला ले सकता है। दिल्ली परिवहन विभाग ने दावा किया कि ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक्स को मोटर कारों की ड्राइविंग और हल्के मोटर वाहनों की गतिशीलता की टेस्टिंग करने के लिए डिजाइन किया गया है। जबकि मोटर कार ऑटोरिक्शा से पूरी तरह अलग होते हैं।
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Car Driving
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जहां कारों टर्निंग रेडियस लगभग पांच मीटर होता है, वहीं ऑटोरिक्शा में तीन मीटर से कम टर्निंग रेडियस होता है। साथ ही, कार का व्हीलबेस ऑटोरिक्शा की तुलना में लगभग 1.5 से दोगुना लंबा होता है। इसका मतलब है कि कारों को चलाने के लिए ऑटोरिक्शा चलाने की तुलना में ज्यादा जगह और ज्यादा कंट्रोल की जरूरत होती है। परिवहन विभाग के मेमो में कहा गया है, "ऐसी स्थिति में, ऑटोरिक्शा ड्राइविंग टेस्ट को कार या चार पहिया वाहनों के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। चार पहिया वाहनों के बजाय ऑटोरिक्शा के साथ ड्राइविंग टेस्ट सड़क सुरक्षा से समझौता करता है।"
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Auto Rickshaw
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विभाग के कम्युनिकेशन में आगे कहा गया है कि एक हल्के मोटर वाहन का लाइसेंस धारक जो एक ऑटोरिक्शा का इस्तेमाल करके ड्राइविंग टेस्ट पास करता है, वह मिनी बस या मिनी ट्रक चलाते समय सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालेगा।