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जानिए बुध का वक्री होना शुभ होता है या अशुभ

Sat, 02 Nov 2019 11:21 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 02 Nov 2019 11:21 AM IST
सार

अगर किसी व्यक्ति के जन्म के समय बुध वक्री हो तो वह संकेत और अंर्तदृष्टि की भाषा को समझने में निपुण बनता है।

 

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vakri budh shubh and ashubh effects
बुध ग्रह

विस्तार

बुध को ज्ञान, विवेक एवं धन-संपदा का कारक माना गया है एवं इस ग्रह का वक्री होना आपको कई तरह से शक्ति प्रदान कर सकता है। बुध के वक्री होने पर व्यक्ति को छठी इंद्रिय जैसा ज्ञान प्राप्त होता है और वह आपको दूरदर्शी बनाता है। इसके प्रभाव से रहस्यमयी विद्याओं में रूचि बढ़ने लगती है। अगर किसी व्यक्ति के जन्म के समय बुध वक्री हो तो वह संकेत और अंर्तदृष्टि की भाषा को समझने में निपुण बनता है।
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बुध के वक्री होने की पांच अवस्थाएं होती हैं...

छाया चरण के पूर्व में
इस दौरान बुध की गति धीमी हो जाती है और वह उसी मार्ग में आगे बढ़ता है। बाद में रूक कर वक्री होना शुरु हो जाता है। छाया चरण की पूर्व अवस्था में वक्री बुध जीवन में कठिनाईयां उत्पन्न करता है। कई तरीकों से हम वक्री बुध में सहायता करते हैं जैसे अपने अंर्तमन की आवाज़ को नज़रअंदाज़ करना और ब्रहमांड के संकेतों पर ध्यान ना देना।
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बुध वक्री दशा
इस अवस्था में बुध वक्री होने से पूर्व धीरे होना शुरु हो जाता है। हिंदू पंचाग में इसे बैंगनी रंग में बनाया जाता है। इस दौरान आकाश बुध की स्थिति स्थिर नज़र आती है। इस अवस्था में वक्री बुध को शिखर के रूप में माना जाता है।
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बुध वक्री अवस्था
वक्री अवस्था के पश्चात् बुध पीछे की ओर चलने लगता है। बुध वक्री के क्षेत्र संचार, यात्रा, सूचना वितरण, कंप्यूटर प्रोग्राम व सीखना है। इन सभी चीजों में गलतियां और विवाद भरे रहते हैं। सामान्य तौर पर एक तिहाई आबादी द्वारा बुध वक्री का प्रत्येक चरण महसूस होता है। वक्री का प्रभाव कंप्यूटर, शिक्षा एवं संचार से जुड़े लोगों पर होता है। इस दौरान बैठकों, कार्यक्रमों और प्रतिबद्धताओं पर ध्यान देना चाहिए। यह समय रूके हुए कार्यों को पूरा करने और दोस्तों से मिलने के लिए फायदेमंद होता है।

बुध प्रत्यक्ष अवस्था
इस अवस्था में आकाश में बुध के पीछे जाने की गति धीरे-धीरे कम होती नज़र आती है। वक्री बुध के शिखर पर होने की यह पंचांग में इस अवधि को भूरे रंग में दर्शाया गया है जोकि बुध वक्री अवस्था के अंतिम चरण और छाया चरण के बाद के समय के आरंभ को प्रस्तुत करता है।

छाया चरण के बाद
इस अवस्था में बुध आगे की ओर बढ़ने लगता है। अब यह वो पूरा रास्ता तय करता है जिससे यह पीछे गया था। इस अवधि के दौरान गलत निर्णय लेना, ध्यान व अवधारणा की कमी जैसी दिक्कतें आती हैं।

बुध के वक्री होने पर निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए...

स्वभाव में परिवर्तन
जब बुध वक्री होता है तो इसके शुभ और अशुभ फल का स्वभाव पर कोई अंतर नहीं आता है। किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाले बुध वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में शुभ फल ही प्रदान करेंगे तथा किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाले बुध वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में अशुभ फल ही प्रदान करेंगे किन्तु वक्री होने से बुध के व्यवहार में कुछ बदलाव अवश्य आ जाते हैं।

वाणी और निर्णय क्षमता होती है प्रभावित
वक्री बुध का असर व्यक्ति की वाणी और निर्णय लेने की क्षमता पर भी पड़ता है। ऐसे लोग आम तौर पर या तो सामान्य से अधिक बोलने वाले होते हैं या फिर बिल्कुल ही कम बोलने वाले।

वाणी में नियंत्रण की कमी आती है
वक्री बुध के प्रभाव के कारण कई बार कुछ बोलना चाहते हुए भी बोल नहीं पाते हैं या ना बोलने वाली स्थिति में भी बहुत कुछ बोल जाते हैं। ऐसे लोग वक्री बुध के प्रभाव में आकर जीवन मे अनेक बार बड़े अप्रत्याशित तथा अटपटे से लगने वाले निर्णय ले लेते हैं जो परिस्थितियों के हिसाब से लिए जाने वाले निर्णय के एकदम विपरीत हो सकते हैं तथा जिनके लिए कई बार ऐसे लोग बाद में पछतावा भी करते हैं किन्तु वक्री बुध के प्रभाव में आकर ये लोग अपने जीवन में ऐसे निर्णय लेते ही रहते हैं।


वक्री बुध के प्रभाव
साल में तीन या चार बार बुध वक्री होता है। इस दौरान आकाश में लगभग तीन सप्ताह के लिए बुध पीछे की ओर चलता है। इसे आप चलते हुए देख सकते हैं लेकिन कोई भी ग्रह अपनी संबंधित कक्षा से बाहर नहीं जा सकता है। वक्री बुध असल में एक भ्रम है जोकि एक विशेष अवधि में पृथ्वी से देखा जाने पर बनाया जाता है। सूर्य से बुध 28 डिग्री से ज्यादा नहीं घूम सकता है। जब यह सूर्य से अंतिम दूरी तक पहुंच जाता तो अपनी दिशा बदल लेता है। बुध का वक्री होना नवीनता का कारक माना गया है। इस दौरान नई योजना बनाना, फिर से करना, पुर्नविचार करना, पुर्नगठन करना एवं पुर्नमूल्यांकन करने का समय होता है। ये समय कर्ज चुकाने, कागजी कार्रवाई को पूरा करने और पूर्व में किए गए वादे को पूरा करने के लिए अच्छा होता है।

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